घर में फैली नकारत्मकता को कैसे बदलें?

नकारात्मकता हमारी सोच व व्यव्हार को अशांत बनाती हैl हमें थका देती है व तरह तरह से परेशान करती हैl अत: इसे कम करने हेतु निम्न उपाय करने चाहिए l
नमक नकरात्मक ऊर्जा को पी जाता हैl अपनी नकारत्मक विचारों से बचने के लिए नमक का सहारा ले l
नकारत्मकता को कम करने नमक से नहाएl इस हेतु समुद्री नमक को नहाने के पानी में घोल दे या फिर पहले नमक को शरीर पे लगा दे फिर नहाए l
घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए घर में पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा साबुत खड़ा नमक (समुद्री नमक) मिला लेना चाहिए। व घर में नमक का पोंछा लगाएl
एक कांच की कटोरी में खड़ा नमक (समुद्री नमक) भरें और इस कटोरी को बाथरूम में रखें। इस उपाय से भी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सकती है।
घर में किसी महापुरुष,भगवान या मनोरम द्रश्य की पेंटिंग भी घर को सकारात्मक बनाते हैl
घर में पोधें लगाने से भी नकारत्मक ऊर्जा कम होती हैl

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योग का पूरा लाभ उठाने षट्कर्म अति आवश्यक

षट्कर्म अथार्थ छ: कर्म जिनसे शरीर व मन की सफ़ाई की जाती हैlशारीरिक एवं मानसिक शुद्धीकरण के बिना योगाभ्यास से पूरा लाभ नहीं मिलता हैl शुद्धिकरण योग शरीर, मस्तिष्क एवं चेतना पर पूर्ण नियंत्रण का भास देता हैl वात,पित्त एवं कफ का संतुलन  होता हैlयोग के अनुसार निम्न छ: कर्म है:-
1 नेति
2 धौति
3 बस्ती
4 नौली
५ कपालभाति
6 त्राटक

 

 

1 नियमित रूप से नेति क्रिया करने पर कान, नासिका एवं कंठ क्षेत्र से गंदगी निकालने की प्रणाली ठीक से काम करती है तथा यह सर्दी एवं कफ, एलर्जिक राइनिटिस, ज्वर, टॉन्सिलाइटिस आदि दूर करने में सहायक होती है। इससे अवसाद, माइग्रेन, मिर्गी एवं उन्माद में यह लाभदायक होती है।

2 धौति क्रिया  में भोजन संसथान की सफाई की जाती हैl शंख प्रक्षालन में गुनगुना जल पीकर बाहर निकाला जाता हैl

3 बस्ती एक तरह का सहज एनिमा लगाने की तरह हैl इसमें गुदा द्वार से पानी को खिंच कर मल द्वार  को साफ किया जाता हैl

नौली क्रिया उदर की पेशियों, तंत्रिकाओं, आंतों, प्रजनन, उत्सर्जन एवं मूत्र संबंधी अंगों को ठीक करती है। अपच, अम्लता, वायु विकार, अवसाद एवं भावनात्मक समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति के लिए लाभदायक है।

5कपालभाति बीमारियों से दूर रखने के लिए रामबाण माना जाता है।  यह बलगम, पित्त एवं जल जनित रोगों को नष्ट करती है। यह सिर का शोधन करती है और फेफड़ों एवं कोशिकाओं से सामान्य श्वसन क्रिया की तुलना में अधिक कार्बन डाईऑक्साइड निकालती है। कहा जाता है कि कपालभाति प्रायः हर रोगों का इलाज है।

6 त्राटक नेत्रों की पेशियों, एकाग्रता तथा मेमोरी के लिए लाभप्रद होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव मस्तिष्क पर होता है।यह  मन को एकाग्र करता हैl हठ योग से राजयोग की तरफ ले जाने की क्रिया हैl

साधना में बाधा : पिंड में असंतुलन (Planetary Imbalances)

स्वस्थ शरीर साधना हेतु जरूरी हैlइसके अभाव में अंतर्यात्रा नहीं की जा सकती हैl  शरीर को स्वस्थ रखने हेतु सही विचारों का होना जरूरी हैl इस हेतु व्यक्तिमें नो दोषों का समाधान करना चाहिए l
1 वात दोष
2 पित्त दोष
3 कफ दोष
4 जोडों में दर्द
५ सरदर्द
6 दस्त
7 कब्ज
8 मूत्र  आने की आवृति में गडबड

9 स्नायविक असंतुलन

एक साधक को अपनी विचार प्रक्रीया को बदलते हुए उपरोक्त दोषों का समाधान आयुर्वेद, आहार  व योगिक  प्रक्रियाओ को अपना कर साधना करनी चाहिए l दोष अनुरूप समाधान  आगे  कभी बताया जायेगा l

अंतर्यात्रा शिविर के साधकों का फीडबैक

तपोवन में आदरणीय शशांक जी ने 7 से १३ मार्च 18 तक गहन योगिक साधना करवाई l शिविरार्थियो के अनुभव ज्यों के त्यों उद्धरत कर रहा हू:

 

 

 

शशांक भैया ने जो भी विधियाँ ध्यान की कराई जैसे निशा ध्यान, रात्रि ध्यान,ज्योति ध्यान, संकल्प साधना, मौन साधना,क्रिया योग  आदि लयबद्ध तरीके से  कराएl इनका अनुभव  शब्दों  में नहीं किया जा सकता है;उसे स्वयं को अनुभव करना चाहिए l

—– श्रेया गदिया, M Sc yoga

 

Pranam Bhai Sahab,

Reached kota and got checked with Jim on B C A machine. As expected results are amazing. My metabolic age reduced by 2 years in these 7 days. And the body has shown amazing progress in all parameters.
Regards

—–Ajay Dutta, Kota

तन , मन ,  बुद्धि,एवं  भावनात्मक तल पर आंतरिक खिलावट का शानदार प्रोग्राम डिज़ाइन किया हुआ हैl  योग ,प्राणायाम, ध्यान के सम्बन्ध में कई मान्यताओ  एवं धारणाओं को नूतन परिभाषा देता अमूल्य प्रोग्राम l

—–प्रकाश चंद्र,टोंक

गुरूजी का अनुशाशन ,सिखाने व समझाने की शैली अति उत्तम व व्यावहारिक हैl मुद्राओं के साथ प्राणायाम व ध्यान करने से चक्र शुद्धी व कुण्डलिनि पर बहुत काम हुआ l

—– महेंद्रसिंह चौहान ,उदयपुर

संकल्प साधना बहुत  ही प्रभावकारी रही जो साधना पथ पर आगे बढ़ने में सहायक होगीl

—— अमित ,फतहपुर

आपने सम्पूर्ण विषय को बहुत बारीकी से समझाया व साधना करवाई l

—— भंवर लाल ,जयपुर

योग को व्यायाम समझ कर  10 वर्ष   से करती थी l यहाँ पर इसके प्रति गहन रूचि जगी व मन से साधना करने का मज़ा आया व जीवन जीने की कला  मिली l

—– मीना जैन ,उदयपुर

 

 

 

 

 

स्वस्थ रहने १६ आसन लयबद्ध तरीके से करें

अष्टांग विन्यास योग

pachmochtasanaasan
श्वसन व लय के साथ करें व साथमे आसन  के निर्गमन के पूर्व  एक बार भ्रामरी करें l

1 सचल कटी चक्रासन
2 अर्द्ध शलभासन
3 शलभासन
4 भूजंगासन
५ धनुरासन
6 मार्जरी आसन
7 नौकासन
8 अर्द्ध पवन मुक्तासन
9 पवन मुक्तासन
10 सर्वांगासन
11 सेतु बंध
12 नटराज आसन
१३ पश्चिम उत्तानासन
१४ मत्स्येन्द्र आसन
15 पर्वतआसन
१६ योगमुद्रा

शरीर को लचीला बनाने व साधना में उक्त आसन परमोपयोगी हैंl