नव वर्ष की शुभकामनाएँ !अस्तित्व आपके लक्ष्यों को पुरा करने का षड्यन्त्र करे !

दोस्तो,मेरे प्रणाम स्वीकारे एवं आप सबको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !

IMG-20170202-WA0002नव वर्ष की शुभकामनाएँ !

मेरे भीतर बैठी विराट सत्ता आपके भीतर विराजमान परम सत्ता को सर झुकाती है। आपके निकटस्थ मित्र शरीर को प्रणाम जिसके होने से आपका जीवन हैं। दुनिया के सबसे बडे सुपर कम्प्यूटर आपके मस्तिष्क को प्रणाम। उस दिल को नमन जो आपके जन्म से आज तक साथ दे रहा है। उन फेफड़ों को प्रणाम जो आज तक आपको श्वास लेने में मदद दे रहे है। अस्थि तन्त्र को प्रणाम जो आपके शरीर को आकार दिये हुए हैं। उस पाचन शक्ति को नमन जो पहले दिन से आपके भोजन को ऊर्जा में बदलते है।उस स्नायू तन्त्र को प्रणाम जो दुनिया में व्याप्त समस्त टेलिफोन जाल से सात गूना बड़ा है।अन्तः स्त्रावी ग्रन्थियों व प्रजनन तन्त्र को प्रणाम जो शरीर व दुनिया को सन्तुलित रखने में जिनका योगदान है।

परम सत्ता से प्रार्थना है कि नव वर्ष में आपकी सभी कामनाएँ पूरी करें।आप सबसे महत्वपूर्ण है।आप अनुपम व अद्वितीय हैं चुँकि आप ही जगत हैं।

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शक्तिशाली रोग प्रतिरोधक सुप (Immunity Booster Soup ) घर पर कैसे बनाए?

यह सुप रक्त को शुद्ध करता हैl रोग प्रतिरोध की क्षमता बढ़ाता हैlसभी प्रकार के रोगी इसे पी सकते हैl तिन माह तक डेली पिने से थेलिसिमिया  पूरी तरह ठीक हो जाता है व कैंसर में भी इससे लाभ होता हैl
250 ग्राम लाल गाजर
250 ग्राम देसी नुकीली पालक
१०० ग्राम चुकन्दर 1 नग
१०० ग्राम टमाटर 1 नग
एक प्याज ,एक आलू ,3-4 कली लहसुन ,1 गांठ अदरक (२५ ग्राम )
जीरा अजवाइन,सेंधा नमक ,धनिया ,सौंफ व काला गुड स्वादानुसार डाले l स्टील के कुकर में सवा लीटर पानी के साथ मिक्स कर 6 सिटी ले ,फिर बिना छाने शाम के खाने के एक घंटा पूर्व पिए l

मुझे चमत्कारिक रूप से अवचेतन मन से मदद कैसे मिली

मैंने अपने अवचेतन मन का उपयोग अनजाने में ही सन् 1978 में किया । जब मैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ता था।  मेरी बचपन में मँगनी हो गई थी। मेरा परिवार शादी करने हेतु मुझ पर दबाव डाल रहा था।  मेरी माँ को उच्च रक्तचाप था।  पिताजी सामाजिक दबावों से व्यथित थे।  इन्हीं कारणों से, मैंने अपने माता-पिता से बात नहीं की।  साथ ही मुझे वह लड़की भी पसन्द नहीं थी।  मैं आई.ए.एस. की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परन्तु मैं इस अनिर्णय की स्थिति से परेशान था।subconscious mind
उस समय मैं अवचेतन मन की शक्ति से परिचित नहीं था।  पर मैंने निश्चय किया कि, “ मैं, एक महीने में निर्णय कर लूँगा कि मुझे विवाह करना है या नहीं।”  कई दिनों तक सोने से पहले बिस्तर में पड़े़-पडे़ मैं स्वयं से पूछता, “क्या मुझे इस लड़की से विवाह करना चाहिये ?” अचानक 31 मार्च, 1978 की रात्रि को, जब मैं नींद में था मुझे एक तेज प्रकाश का आभास मेरे कमरे में हुआ।  एवं साथ ही मैंने एक आवाज सुनी, इस लड़की से शादी कर लो, भविष्य में इससे तुम्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं आयेगी।
आज मैं समझ पाया हूँ कि यह निर्णय मेरे अवचेतन मन से आया था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि उस लड़की से विवाह का प्रस्ताव मेरे अवचेतन की शक्ति से प्रभावित था। और वह निर्णय मेरे जीवन में सफल एवं सकारात्मक रूप में उचित सिद्ध हुआ है।

क्या आप कृष्ण से कम भाग्यशाली है!

योगेश्वर कृष्ण

आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर है! इसमें हॅसने की जरुरत नहीं है।

इसके लिए श्री कृष्ण के जीवन से अपने जीवन की परिस्थिति की तुलना करने की जरुरत है।

हमारे में से किसे का जन्म जेल में नहीे हुआ। जबकि योगेश्वर कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था। उनके मां बाप दोनों राजा होकर कंस के वहाँ बन्दी थे। आपके मां बाप आपके जन्म के समय बन्दी तो न थे।

किसी ने तुम्हें स्तनों पर जहर लगाकर दूध तो न पिलाया ? जबकि पूतना ने कृष्ण को मारने के लिए यह किया था। मां बाप के होते हुए कृष्ण यशोदा केे पास पले।हमारे मे से अधिकतर लोगों का पालन पोषण तो हमारी मां ने ही किया है।

बचपन में उन्हें गाय चराने भेजा गया। मुख्यतः हममे से किसी को भी जानवरों को चराने के लिए तो नहीं भेजा गया।

कम से कम आपके मामा आपको मारना तो नहीं चाहते थे ?

कृष्ण को उनकी प्रेमिका राधा बिछुड़ने के बाद शेष जीवन में फिर कभी ना मिली।

राजा होकर महाभारत के युद्ध में अर्जुन का रथ संचालन करना पड़ा। आज की भाषा में कहे तो वाहन चालक की भूमिका निभानी पड़ी। फिर चिन्ता की क्या बात है।

हुई न आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर ।इसे सदैव यद् रखे l

विपरीत परिस्थितियों के होते हुए महान् कार्य किये। यदि अपनी आत्म छवि एवं आत्म विश्वास है तो आप भी अपना सोचा प्राप्त कर सकते है। आपकी आत्म छवि ही आपको सफलता व सुख दिला सकती है।

कृतज्ञता को महसूस कर जीवन बदले,आनन्दित हो

धन्यवाद देना कृतज्ञता ज्ञापन है। कृतज्ञता प्रकट करना विनम्रता व मानवता है। यह बहुत बड़ी नैतिकता है। कृतज्ञता व्यक्त करने से हम बदलते है, हमें खुशी मिलती है।दूसरे का ऐहसान मानते है। यह दूसरे के योगदान को स्वीकारना है। इससे सम्बन्ध मजबूत बनते है।अस्तित्व के प्रति आभार व्यक्त करने से प्राप्ति बढ़ती है। कृतज्ञ होने पर  अस्तित्व दुगुना देता है।ऐसे में यह एक आन्नददायक कृत्य बन जाता है। वाल्मिकी रामायण में लिखा है कि परमात्मा ने जो कुछ दिया है उसके लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करो। लेसिंग ने लिखा है कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता- पूर्ण भावना स्वयं ही एक प्रार्थना है। कृतज्ञता की शक्ति को पहचानिए।कृतज्ञता रूपान्तरण का बड़ा टूल हैl  Related Posts:

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धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे

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