आंतरिक तारतम्य(हारमनी )स्थापित करने में ॐ कैसे सहायक है?

ओम का उच्चारण होश के साथ करने से भीतरी यात्रा करने में मदद मिलती है।शरीर में होने वाली हलचलों पर ध्यान जाता है साथ ही होने वाले भाव भी दिखाई देने लगते हैं। इससे अपने को महसूस करना आता है। यह स्वयम् के भीतर उतरना है। यही आन्तरिक सत्संग है। इससे अपनी ज्योत प्रकट होती है। अपने भीतर के पट खुलते है। बाह्य आवरण, सीमाएं एवम् स्थूलता पिघलती है। सजगता पूर्वक ओम का जाप स्वयम् के प्रति सचेत बनाता हैं। इससे अपने को जानने में मदद मिलती है। बिना जागृति के ओम को जपने से शरीर शिथिल हो जाता है। ओम का उच्चारण अन्तर आत्मा को शुद्व करता है। कर्मो की अशुद्वि व अज्ञान के अन्धकार को दूर करता है।प्राचीन काल से ओम का जाप किया जाता रहा है । सभी सनातन धर्मो में इसको प्रमुखता दी है।

ओम का अर्थ कोई निश्चित् नहीं है। यह निराकार, असीम, अद्धश्य व अनन्त के लिये प्रयुक्त होता है। कई बार इसे ईश्वर के लिये भी प्रयुक्त करते है।यह ध्वनियाात्मक अक्षर हैं।
ओम जपना मात्र शरीरिक क्रिया नहीं हैं। इससे उत्पन्न ध्वनि शरीर को व्यवस्थित करती है। शरीर अपने निज स्वभाव को प्राप्त होता है। असंतुलन,विकृति व अराजकता का नाश होता है। हमारे शरीर के प्रत्येक अणु को शान्ति मिलती है। उन्हें ठीक होने में मदद मिलती है।

ओम जपना मानसिक ग्रन्थियों को भी खोलता है। योग व्यक्ति को व्यर्थ की सोच से ऊपर उठाता है तथा व्यक्ति के भीतर बैठी घृणा, ईष्र्या, लोभ, काम आदि को मिटाता है । हम अपनी नकारात्मकता को पहचानने लगते हैं, जिससे उसकी मात्रा घटती है। आत्म देह की पहचान जीवन की सार्थकता बताती है। शरीर से मन की शक्ति बहुत ज्यादा है और मन से आत्मा की शक्ति अनन्तगुना है। हम आत्मा की सत्ता को ही भूल गये हैं, जब हम आत्मा को जानेगें तो मन की शक्ति जाग्रत कर पायेगें। मन द्वारा स्वस्थ होने की क्षमता को पुनस्र्थापित करना है। देह को बनाने वाले डी.एन.ए. (डीआक्सीराइबो न्यूक्लिक एसीड- जीन) एवं डी.एन.ए. बनाने वाले मन को बदलता है।

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योग के अनुसार शौच करने का सही तरीका क्या है ?

विधिपूर्वक शौच करने से दातों के रोग, लकवा ,बवासीर व् कई अन्य रोग नहीं होते हैl  उषःपान(प्रातः जल सेवन) के बाद कुछ देर घुमने से मलत्याग सरलता से होता हैl

विधि:

भारतीयशैली के टॉयलेट का उपयोग करें l  शौच  हेतु  उकड़ू आसन में बैठेl  पश्चिमी शैली की टॉयलेट के प्रयोग में मलद्वार पूरा नहीं खुलता है नहीं पेट पर दबाव पड़ता हैlशौच करने का सही तरीका

दोनों हाथ ठुड्डी को पकडे रहे व दांत भींच कर रखे l  शौच या पेशाब के समय दांतों के जबड़ों को आपस में दबाकर रखने से दांत मजबूत रहते हैं।

मल छोड़ते वक्त दांतों को और भींचे और श्वास फेकेंl

शौच करते वक्त मुहं बंद रखे l  तत्समय पढ़ना – बोलना उचित नहीं हैl

सहजता से मलत्याग न होने पर कुछ लोग जोर लगाकर शौच करते हैं किंतु ऐसा करना ठीक नहीं हैl

मल आपके स्वास्थ्य को दर्शाता है, बहुत सूखा या पतला, दुर्गन्धयुक्त, चिपचिपा, रक्त या  सफ़ेद झाग युक्त मल रोग को दर्शाता हैl

 

इजरायली शोधकर्ता डॉ. बेरको सिकिरोव ने अपने शोध के निष्कर्ष में पाया कि सिटिंग मेथड कब्जियत का करण बनती है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्यागने के लिए लगभग तीन गुना अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिसके कारण चक्कर और हृदयतंत्र की गड़बड़ियों के कारण लोग मर जाते हैं।

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नव वर्ष की शुभकामनाएँ !अस्तित्व आपके लक्ष्यों को पुरा करने का षड्यन्त्र करे !

दोस्तो,मेरे प्रणाम स्वीकारे एवं आप सबको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !

IMG-20170202-WA0002नव वर्ष की शुभकामनाएँ !

मेरे भीतर बैठी विराट सत्ता आपके भीतर विराजमान परम सत्ता को सर झुकाती है। आपके निकटस्थ मित्र शरीर को प्रणाम जिसके होने से आपका जीवन हैं। दुनिया के सबसे बडे सुपर कम्प्यूटर आपके मस्तिष्क को प्रणाम। उस दिल को नमन जो आपके जन्म से आज तक साथ दे रहा है। उन फेफड़ों को प्रणाम जो आज तक आपको श्वास लेने में मदद दे रहे है। अस्थि तन्त्र को प्रणाम जो आपके शरीर को आकार दिये हुए हैं। उस पाचन शक्ति को नमन जो पहले दिन से आपके भोजन को ऊर्जा में बदलते है।उस स्नायू तन्त्र को प्रणाम जो दुनिया में व्याप्त समस्त टेलिफोन जाल से सात गूना बड़ा है।अन्तः स्त्रावी ग्रन्थियों व प्रजनन तन्त्र को प्रणाम जो शरीर व दुनिया को सन्तुलित रखने में जिनका योगदान है।

परम सत्ता से प्रार्थना है कि नव वर्ष में आपकी सभी कामनाएँ पूरी करें।आप सबसे महत्वपूर्ण है।आप अनुपम व अद्वितीय हैं चुँकि आप ही जगत हैं।

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कोन सा तेल स्वास्थ्यवर्धक है, नारियल या कोई और ?

हमे अपने पूर्वजों द्वारा खाए जाने वाले तेल हमारे जीन्स में बसे होते हैं । अतः अपने पूर्वजों द्वारा खाए जाने वाले तेल ही खाना उचित है । जैसे पंजाबी सरसों का व दक्षिण भारतीय नारियल का तेल खाता रहा है, इन्हे खाए तो ठीक है । एक व्यक्ति को प्रतिदिन अधिकतम तीन चम्मच घी/तेल आदि वसा का प्रयोग करना चाहिये । वैसे नारियल के तेल में मिडियम चैन फेटीएसीड्स के होने से खाने में अच्छा माना जाता है ।नारियल का तेल खाने में श्रेष्ठ हैl
भोजन पकाने में अधिक स्माकिंग पाॅईन्ट वाला तेल खाना चाहिए ताकि छोंकने पर ट्रान्सफैट कम से कम बने । अधिक तलने पर प्रत्येक तेल ट्रान्सफैट बन जाता है, अतः उससे बचे ।
सभी प्राकृतिक/सहज तिलहन से बने तेल खाना स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक है । सरसों, तिल, मूंगफली, नारियल के कच्ची घाणी से निकले तेल श्रेष्ठ है । सोया, सफोला, राईसब्रान आदि से निकले तेल को खाने योग्य बनाने हेतू रिफाइण्ड करना पड़ता है । केन्सर फैलाने वाले फास्फोरिक एसिड, हेक्जीन एवं कास्टिक सोड़ा रिफाइण्ड में प्रयुक्त होते हैं । इससे रिफाइण्ड तेल हानिकारक है । कृत्रिम तरिके से निकाले गये तेल सभी अखाद्य है, जिन्हें कृत्रिम तरिके से तैयार किया जाकर खाद्य बनाया गया है, इस प्रकार रिफाइण्ड कर अखाद्य तेल को खाद्य बनाया जाता है । रिफाइण्ड की बजाय फिल्टर्ड तेल खाना स्वास्थ्यवर्द्धक है । कच्ची घाणी व एक्सपेलर से निकले तेल खाना चाहिए ।
तेल की पैकिंग पर लिखे किसी भी वाक्य से अप्रभावित रहें । जैसा कि कुछ तेल की पैंकिग पर लिखा होता है कि इसमें काॅलस्ट्रोल नहीं है । किसी भी वनस्पति तेल में काॅलस्ट्रोल नहीं होता है । काॅलस्ट्रोल हमारे शरीर में जाकर बनता है । जैतुन का तेल अच्छा होता हैं, लेकिन इसका प्रयोग पकाने में ठीक नहीं है ।

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क्या पोषक आहार के होते हुए पुरक आहार की जरूरत है ?
वनस्पति घी भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है
धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे
Essential Fatty Acids

दर्द निवारण हेतु ग्वासा (guasa)थेरेपी/ पंचगव्य सेल थेरेपी

यह एक चीनी एकुप्रेसर की तरह की वैकल्पिक चिकित्सा विधि है जिसमे त्वचा को विशेष ब्रश से रगडा जाता हैlइससे शरीर में रक्त, स्नायु व लिम्फ कोशिकाओ में डीटोक्सीफिकेशन होता हैl इसलिए इसे सेल थेरेपी भी कहते हैl सभी प्रकार के दर्द निवारण में यह बहुत कारगर हैl शरीर में अकडन दूर होती हैl
यह रुके हुए प्राण को प्रवाहित कर देता है जिससे व्यक्ति स्वस्थ हो जाता हैl
उक्त थेरेपि संधियों में दर्द, अस्थमा ,लकवा , कफ , बुखार ,एलर्जी ,सुजन में लाभदेय हैl
इस चिकित्सा हेतु हीलर डॉ शंकर गहलोत,शिवगंज( ०९९२९२४७८९४) से सम्पर्क कर सकते हैlस्वास्थ्य सेतु में इनका शिविर  होते हैl