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खोए हुए हम खुद है और खोज रहे है भगवान को,सोए हुए हम खुद है और जगा रहे भगवान को

 हमें  अपना तो कुछ  पता नहीं और परमात्मा का पता करना चाहते है,यही विडम्बना हैl सामने पड़े पत्थर को जानते नहीं और विराट में समाये प्रभु को पाने चले हैl  प्रार्थना की जरूरत हमें है,उससे हमारे भीतर शक्ति जगती हैl परमात्मा को हमारी प्रार्थना की आवश्यकता नहीं है l परमात्मा हमारे भीतर है,किसी मूर्ति में छिपा हुआ नहीं हैl खुद को तराशने की आवश्यकता हैl मूर्ति  पूजा उसमे सहायक हो सकती है यदि पूजा समझ के की जाय l

 

 

 

कर्म कांड में डूबा हुआ व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त नहीं कर सकता हैlअपने को स्वीकार कर इस क्षण जीने में ही उपलब्धी हैl वर्तमान में जीना ही परम जीवन को पाना है,परमात्मा को उपलब्ध होना हैl  जीवन अन्यत्र  कहीं नहीं ,जीवन अभी और यही हैl

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नाम को सार्थक करती डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?”

जो व्यक्ति दवाईया  लेता है,उसे दो बार ठीक होना पड़ता है,एक बीमारी के असर से और दूसरा दवाई के असर से l

–  विलीयम ओस्लर

 

यह मेडीकल भ्रष्टाचार पर भारत की पहली पुस्तक हैl इसमें बताया गया है कि दवाइयों  के बिना भी कैसे ठीक हो सकते है?

डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?”

आज हमारी बीमारी  बड़ी समस्या है लेकिन वही डॉक्टर व दवा कंपनियों के लिए एक व्यापार का अवसर हैl उनके लिए यह वरदान है,समस्या तो हमारी हैl वे इसे  सही भुनाते हैl हम अपनी जीवन शैली बिगाड़ कर यह मोका उनको परोसते हैl हम अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी नहीं लेकर उनकी शरण में जाते है इसमें उनकी कोई गलती नहीं हैl  जल्दबाजी  करते हुए ,अव्यवस्थित हम जीते है,रसायन युक्त पक्व आहार लेकर पेट खराब करते हैl

कोशिकाओं के अंदर की दोषयुक्त रासायनिक प्रतिक्रियाओं  को दवाओ से ठीक करने की कोशिश ठीक वैसी ही होगी जैसे कि आपके घर में मच्छर हो और आप उसे मारने के लिये मिसाइल या रोकेट लांचर का इस्तेमाल करें l

क्या होस्पिटल के डॉक्टरो व कर्मचारियों  से भूले नहीं होती है?

क्या अस्पताल रोगमुक्ति के केंद्र है या यमराज के घर है?

इस तरह के अनेक प्रश्नों के उत्तर इस पुस्तक में दिए हुएं हैl  वास्तव में इसमें स्वास्थ्य उधोग का  वह सच  बताया हुआ है जो आपकी ज़िन्दगी बदल  देगा l

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स्वास्थ्य सेतु से मुझे कैसे लाभ होगा 

आपका स्वास्थ्य आपकी करतूतों एवं आपकी सोच का परिणाम है.आपका परिवार, पैसा, पद , स्थान , बड़ी कार एवं बड़ा मकान तय नहीं करते है.सेहत बाज़ार में मोल नहीं मिलती है.यह अर्जित करनी पडती है.अपने खानपान , रहन सहन, मन में चलते विचारों का देह पर पड़ने वाले प्रभावों का निरीक्षण करते हुए सेहत गढ़नी पडती है. देह के संकेतो को समझना पड़ता है.

रोग तो हम पैदा करे एवं डाक्टर ठीक करे, यह इतना सरल नहीं है. डाक्टर एवं दवाइयाँ मात्र रोग ठीक नहीं कर सकते है.रोगी का सक्रिय सहयोग एवं कुछ सावधानिया अपेक्षित है.
स्वास्थ्य सम्बन्धित ज्ञान आपको मात्र भ्रमित कर सकता है.हम मात्र विचारों से नहीं बदल
सकते. अपनी आदते बदलने हेतु इस पर कार्य करना पड़ता है इसमें यह केंद्र सहायता करता है.
इस हेतु प्रतिदिन निशुल्क योग कराया जाता है.स्वास्थ्य वार्ता व विमर्श भी होता है.

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आलस्य भगाने व अधिक छींके रोकने अदिति मुद्रा करे

अदिति मुद्रा करने से शरीर का आलस्य एवं हर समय उबासी आना जैसी समस्या समाप्त हो जाती हैंl  अदिति मुद्रा करने से जुकाम एवं ज्यादा छींक आना जैसे रोग दूर हो जाते है। अदिति मुद्रा से व्यक्ति में दया,करुणा,क्षमा,कृतज्ञता जैसे भाव जाग्रत होते हैं |

 

मुद्रा की विधि :
• किसी भी ध्यानात्मक आसन जैसे सुखासन (पालथी बांधकर),पदमासन या सिद्धासन में बैठ जाएँ |
• रीढ़ की हड्डी सीधी रहे |
• अब हाँथ के अंगूठे के अग्रभाग को अनामिका अंगुली (सबसे छोटी अंगली के साथ वाली अंगली) की जड़ में लगा दें (चित्र के अनुसार) |
मुद्रा करने का समय व अवधि :
अदिति मुद्रा को प्रातः, दोपहर एवं सायं 15-15 मिनट कर सकते हैं |

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माइन्ड तकनीकी में नई वैज्ञानिक खोजों से आप बिना प्रयास लाभ ले सकते हैं

पूरे विश्व में नई माइन्ड तकनीकी (वैज्ञानिक संगीत एंव माइन्ड मशीनें) का विकास किया जा रहा है जो आपको जल्दी सीखने, ज्यादा याद रखने, अंग्रेजी के शब्दों को सीखने, गहन विश्राम करने, तनाव कम करने, आपके मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने, शक्तिशाली सकारात्मक विश्वास बढ़ाने, नकारात्मक विश्वास हटाने में मददगार है।
माइन्ड तकनीकी आज विश्व मंे शोध की एक महत्वपूर्ण शाखा है। पहली बार वैज्ञानिक समझने लगे हैं कि मानव मस्तिष्क का अधिक विकास किस प्रकार किया जा सकता है। बहुत सी नई कैसेटें एवं सीडी मशीनें बनाई जा रही है जिससे मानव मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बहुत बढ़ाया जा सके।
नई वैज्ञानिक खोजों से आप बिना प्रयास लाभ ले सकते हैंl

माइन्ड मशीनों पर अनुसंधान कर रहे है वैज्ञानिकों के अनुसार माइन्ड मशीन कई प्रकार से लाभदायक हैः

ऽ बुद्धि बढ़ाना
ऽ शारीरिक एवं मानसिक विश्राम
ऽ रचनात्मक एवं कल्पनात्मक योग्यता बढ़ाना
ऽ मस्तिष्क के दोनों भागों का उपयोग करना
ऽ रोगों से प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाना
ऽ तनाव कम करना व मानसिक शक्ति बढ़ाना
ऽ शराब व ड्रग की आदतों में कमी
ऽ मस्तिष्क के एन्डोर्फिन (म्दकवतचीपदे)का ज्यादा स्त्राव
ऽ तुरन्त ध्यान
ऽ नींद की जरुरत को कम करना

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स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचाव हेतु आयुर्वेदिक पोटली को सूंघे एवं प्राणायाम करे

स्वाइन फ्लू का वायरस बहुत संक्रामक है। इंफ्लूएंजा ए स्‍वाइन फ्लू वायरस के एक प्रकार ‘एच-1-एन-1‘ द्वारा संक्रमित व्‍यक्ति द्वारा दूसरे व्‍यक्ति को फैलता है। फ्लू का असर शरीर पर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने पर सबसे ज्‍यादा होता है। स्‍वाइन फ्लू से भी वैसे ही बचा जा सकता है जैसे हम साधारण फ्लू या सर्दी-जुकाम से बचते हैं। स्वाइन फ्लू से डरने या घबराने की जरूरत नहीं हैl इससे बचने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ घरेलू उपाय आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैं। 

अपने रुमाल के एक कोने पर पांच लोंग,पांच कालीमिर्च एवं कपूर की एक टिकिया को गांठ में बांध ले l दिन में 10 से २० बार अपने हाथ पर रगड़ उसे सूंघे lइससे स्वाइन फ्लू नहीं होगा l  गिलोय ,लहुसन एवं हल्दी भी प्रतिरोध क्षमता बढाते हैl

रोजाना प्राणायाम करें

 गले और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना प्राणायाम करें और जॉगिंग करें। आपको स्वस्थ रखने के साथ ही यह हर बीमारी के लिए फायदेमंद है जो कि नाक, गले और फेफड़ों से संबन्धित हैं। 

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क्या क्षमा मांगे जाने पर आप तक पहुंचती है?

ओपचारिक  रूप से तोते की तरह क्षमा मांगने का कोई अर्थ नहीं हैl जब आप शब्दो से क्षमा मांगते है  वह मात्र 10 प्रतिशत है, आॅखों से क्षमा मांगना 20 प्रतिशत है, दिमाग से मांगना 30 प्रतिशत है एवं 40 प्रतिशत मांगना दिल से होता है।  १००% क्षमा कैसे मांगते है l यह अनुभव का विषय  हैl

एक सच्ची एवं निष्कपट क्षमा याचना वह होती है जिस में आप अपने अपराध को पूर्ण रूप से स्वीकार करते हैं। ‘‘फिरसे ऐसी भूल नहीं होगी’’ ऐसे मानसिक संकल्प के साथ उस तरह का वचन देना| क्षमा करने से डी एन ऐ तक में रूपांतरण हो सकता है यदि मागने वाले ने पूरी तरह से मांगी हो l क्षमा का डी एन ऐ हमारी प्रत्येक कोशिका में हैl यदि हमें उसकी कला आती हो l

 

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