२४ घंटे ॐ साधना :अंतर्यात्रा की दिशा में एक कदम

गृहप्रवेश के पूर्व बेंगलोर में २४ घंटे अखंड जप अक्षय तृतीया पर करने का अवसर मिलाl पहली बार इस तरह की साधना की l एक मित्र ने वहाँ पर नकारात्मकता शक्ति  होने की बात बताई थी lप्रारम्भ में बहुत उत्साह था लेकिन भीतर डर भी था की पूरी कैसे करेंगे l घी का दीपक कर मीना और मैंने निरन्तर २४ घंटा तक ॐ का जप किया l

चारो तरफ सकारात्मक बढ़ी l घर में डर समाप्त हुआ l रात्रि में सघन नीद आने लगी l इसके जप  से शारीरिक ,मानसिक व आध्यात्मिक शांति महसूस हुई lइससे चेतना में नई ऊर्जा  व सक्रियता का बोध  हुआ l  एकाग्रता बढ़ी l थकान,बैचेनी ,निराशा  एवं आलस्य घटा lबहुत सुखद परिणाम आये

 

गुरु की प्राप्ति कैसे हो ?

एक गुरु बहती हुई सूक्ष्म शक्तियों का केंद्र होता हैं l किसी सत्संग में जाए ,जहा पर आपको शांति मिले व अच्छा लगेl किसी आध्यात्मिक मिलन या योग केंद्र में जाएं l धैर्य पूर्वक खोजते रहे l गुरु की खोज एक प्रतीक्षा है।
कभी भी गुरु के प्रति बहुत तार्किक न हों क्योकि बहुतसी ऐसी चीजें है जो आप समझ नहीं सकते और गुरु आपको समय से पहले समझा नहीं सकता ,अतः केवल विश्वास पर रहें ,अति तर्क आपमें अश्रद्धा उत्पन्न कर सकता है ,जबकि आप गलत भी हो सकते हैं ,क्योकि ऊर्जा संरचना और प्रकृति का विज्ञान गुरु ही समझ
सकता हैl
ओशो ने तो बताया है कि गुरु को शिष्यक नहीं खोज सकता। यह असंभव है । इसका कोई उपाय नहीं है। यह तो बात ही व्यबर्थ है। हमेशा गुरु शिष्यत को खोजता हे। तो जब भी आप शिष्यक होने के लिए तैयार हो जाते है गुरू प्रकट हो जाता है। आप प्यास व पात्रता पैदा करे वह आपको खोज लेगा। फिर आप बच नहीं सकते। वह आपको खोज लेगा। फिर आपके बचने का कोई उपाय नहीं है। इसलिए बड़ी चीज गुरु को खोजना नहीं है, बड़ी चीज शिष्ये बनने की तैयारी है। आप गड्ढे बन जाएं; पानी बरसेगा और झील भर जायेगी।

गुरु एक मार्गदर्शक ज्योति होता है lयह एक तत्व के रूप में भी है एवं यह एक व्यक्ति के रूप में भी हो सकता है l इसको खोजना कठिन है चुकि कोई हमारा शोषण भी कर सकता हैं l

योग का पूरा लाभ उठाने षट्कर्म अति आवश्यक

षट्कर्म अथार्थ छ: कर्म जिनसे शरीर व मन की सफ़ाई की जाती हैlशारीरिक एवं मानसिक शुद्धीकरण के बिना योगाभ्यास से पूरा लाभ नहीं मिलता हैl शुद्धिकरण योग शरीर, मस्तिष्क एवं चेतना पर पूर्ण नियंत्रण का भास देता हैl वात,पित्त एवं कफ का संतुलन  होता हैlयोग के अनुसार निम्न छ: कर्म है:-
1 नेति
2 धौति
3 बस्ती
4 नौली
५ कपालभाति
6 त्राटक

 

 

1 नियमित रूप से नेति क्रिया करने पर कान, नासिका एवं कंठ क्षेत्र से गंदगी निकालने की प्रणाली ठीक से काम करती है तथा यह सर्दी एवं कफ, एलर्जिक राइनिटिस, ज्वर, टॉन्सिलाइटिस आदि दूर करने में सहायक होती है। इससे अवसाद, माइग्रेन, मिर्गी एवं उन्माद में यह लाभदायक होती है।

2 धौति क्रिया  में भोजन संसथान की सफाई की जाती हैl शंख प्रक्षालन में गुनगुना जल पीकर बाहर निकाला जाता हैl

3 बस्ती एक तरह का सहज एनिमा लगाने की तरह हैl इसमें गुदा द्वार से पानी को खिंच कर मल द्वार  को साफ किया जाता हैl

नौली क्रिया उदर की पेशियों, तंत्रिकाओं, आंतों, प्रजनन, उत्सर्जन एवं मूत्र संबंधी अंगों को ठीक करती है। अपच, अम्लता, वायु विकार, अवसाद एवं भावनात्मक समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति के लिए लाभदायक है।

5कपालभाति बीमारियों से दूर रखने के लिए रामबाण माना जाता है।  यह बलगम, पित्त एवं जल जनित रोगों को नष्ट करती है। यह सिर का शोधन करती है और फेफड़ों एवं कोशिकाओं से सामान्य श्वसन क्रिया की तुलना में अधिक कार्बन डाईऑक्साइड निकालती है। कहा जाता है कि कपालभाति प्रायः हर रोगों का इलाज है।

6 त्राटक नेत्रों की पेशियों, एकाग्रता तथा मेमोरी के लिए लाभप्रद होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव मस्तिष्क पर होता है।यह  मन को एकाग्र करता हैl हठ योग से राजयोग की तरफ ले जाने की क्रिया हैl

साधना में बाधा : पिंड में असंतुलन (Planetary Imbalances)

स्वस्थ शरीर साधना हेतु जरूरी हैlइसके अभाव में अंतर्यात्रा नहीं की जा सकती हैl  शरीर को स्वस्थ रखने हेतु सही विचारों का होना जरूरी हैl इस हेतु व्यक्तिमें नो दोषों का समाधान करना चाहिए l
1 वात दोष
2 पित्त दोष
3 कफ दोष
4 जोडों में दर्द
५ सरदर्द
6 दस्त
7 कब्ज
8 मूत्र  आने की आवृति में गडबड

9 स्नायविक असंतुलन

एक साधक को अपनी विचार प्रक्रीया को बदलते हुए उपरोक्त दोषों का समाधान आयुर्वेद, आहार  व योगिक  प्रक्रियाओ को अपना कर साधना करनी चाहिए l दोष अनुरूप समाधान  आगे  कभी बताया जायेगा l

ध्यान को गहरा करने में त्राटक साधना सहायक है

ध्यान एकाग्रता नहीं है बल्कि ध्यान का परिणाम एकाग्रता हैl त्राटक मन को एकाग्र करता है इससे हम अपने पास आने लगते हैl इसलिए त्राटक करने से ध्यान गहरा होता हैl
हम सामान्यत: जाग्रत अवस्था में इन्द्रियजन्य आंकड़ो के प्रवाह में खोये रहते हैl इसके साथ ही अवचेतन से आते विचार और भाव भी हमें प्रवाहमान रखते हैl त्राटक का अभ्यास मन के इस विखंडन एवं बिखराव को रोकता हैl

त्राटक करने की विधि


सबसे सरल व श्रेष्ठ विधि मोमबत्ती या दीपक की ज्योति को अपलक देखना हैl

प्रारम्भ में 2 से ३ मिनट्स देखना हैl बाद में आँखे बंद कर भ्रूमध्य में इस की छवि को देखना ,इससे मन की अतीन्द्रिय शक्तियाँ विकसित होती हैl

 

सावधानी

शरीर को शिथिल व स्थिर रखते हुए आँखों को भी विश्राम में रखना हैl