भाव सहित करे जो प्राणायाम रोग मुक्ति ताहि को होय

भावमय होकर, ॐ के जाप के साथ प्राणायाम करने से साठ प्रतिशत लाभ बढ़ जाता है ।इसी से पंच तत्वों में समन्वय होने से रोग ठीक होते हैं। भावनात्मक लगाव के बिना  प्राणायाम मात्र शारीरिक  व्यायाम बन कर रह जाता है l  सूक्ष्म शरीर  के शुद्धीकरण हेतु भावनाओ के साथ करना जरूरी है l

प्राणायाम करते वक्त भाव करें कि  मुझ में प्रथ्वी सा धीरज,जल सी शीतलता,अग्नि सा तेज,वायु सा वेग व आकाश सी विशालता प्रकट हो रही है।चारों तरफ से बरसते प्राण को महसूस करना है l धन्यवाद के अहोभाव में प्राणायाम करे l  इसे करते रहने से शक्तिपात  स्वतं होता हैं।

प्राण ही औषधि हैं।प्राण ही ऊर्जा हैं। प्राण ही ब्रह्म है।प्राण ही जीवन है।

उषा: पान की सही विधि ताकि पूरा लाभ हो

 

 

 

 

प्रात: उठते ही पेशाब करे l इसके बाद उकडू  बैठ कर  2 से 4  गिलास पानी पिए l

गर्म पानी पी रहे है तो बाई नासिका (चन्द्र नाडी ) बंद कर पिए lदायाँ सूर्य स्वर के साथ पिएगें जो गर्म होता है तो लाभ अधिक होगा l  ठंडा पानी पी रहे है तो दायीं नासिका बंद कर पिए l

उसके बाद उकडू बैठे बैठे  नितम्बो को दस बार उपर निचे करे ,  हिलाए व घुमाए l इसके बाद खड़े होकर कमर को बीस बार उपर निचे करे l  फिर ताड़ासन व तिर्यक ताड़ासन करे l हाथो को उपर निचे कर आगे झुके व पाव के तलवे को हाथो से छुए l अथार्त त्रिकोनासन करे l इससे पानी आतों में पहुच कर सफाई करेगा l

सावधानी : विविध कफ – वातज व्याधियों, हिचकी, आमाशय व्रण(अल्सर), अफारा(आध्मान), न्यूमोनिया इत्यादि से पीड़ित लोगो को उषा पान नहीं करना चाहिए।

 

भारतीय नव वर्ष 2076 की मंगल कामनाएं

 

 

 

यह विक्रमी सम्वत २०७६ है ,चैत्र मास का प्रथम दिन इस बार 6 अप्रैल को हैl हिन्दू मान्यता के अनुसार इसी दिन ब्रह्माजी ने दुनिया बनाइ थी l दरअसल भारतीय कैलेंडर की गणना सूर्य और चंद्रमा के अनुसार होती है। देखा जाय तो दुनिया के तमाम कैलेंडर किसी न किसी रूप में भारतीय कैलेंडर का ही अनुसरण करते हैं। इतना ही नहीं, 12 महीनों का एक वर्ष और सप्ताह में सात दिनों का प्रचलन भी विक्रम संवत से ही माना जाता हैlइस दिन का बहुत पोराणिक व ऐतिहासिक  बहुत महत्व है l
लेकिन वर्तमान में हम अंग्रेजी केलेंडर हमारे त्योहारों को छोडकर रोज उपयोग करते है l इसे भी मनाए लेकिन उसको नकारना उचित नहीं है l इतिहास हर पल बनता है, बिगड़ता है और संवर्धित होता है ।परम्परा और एतिहासिकता सुरक्षित औऱ संरक्षित रहनी चाहिए। लेकिन संस्कृति अपने आप में प्रवाह है । इसे बहने दें अन्यथा मर जाएगी। हमारी संस्कृति जिसे हम भारतीय कहते हैं उसकी निरन्तरताऔऱ प्राचीनता का खूबसूरत पक्ष यह है कि यह प्रवाही है इसलिये मिटी नहीं ।अत: ईस्वी केलेंडर का विरोध न कर इसको भी मनाए l

प्रसव पश्चात घी,प्रोटीन आदि मॉल भी खाएँ फिर भी पेट न बढ़े :देसी नुस्खा

डिलीवरी के बाद जी भर कर घी ,प्रोटीन ,सूखे मेवे आदि   डिलीवरी वाला माल खाए लेकिन  उपरोक्त योग ले जिससे वजन नहीं बढेगा lआपके शिशु को भी भरपूर पोषण भी मिलेगा ,दूध भी ज्यादा बनेगा व दोनों को अपच , एसिडिटी ,गैस आदि नही होंगे l  वजन कम करने के लिए कोई भी महिला इसे आगे भी  ले सकती है l

सौफ -३५० ग्राम

अजवाइन – १२५ ग्राम

सुआ -१२५ ग्राम

हरड-१०० ग्राम

पीपल —१०० ग्राम

शाही जीरा –२५ ग्राम

काला नमक –२५ ग्राम

इलायची –२५ ग्राम

काली मिर्च –२० ग्राम

सौंठ –2 कुली

सेंधा नमक – स्वादानुसार

इन सबको मिला कर पिस ले व प्रति दिन आधा से  एक चम्मच दोनों समय खाने के बाद  गर्म पानी के साथ ले l

(साभार :डॉ विनीता कोठारी )

मन की धुलाई का त्यौहार है होली

मन की धुलाई से ही व्यक्तित्व  चमकता है l मनोरोगों से  बचाव होता है l यह पतझड़ की विदाई पर खुशियां मनाने वाला त्यौहार है। बंसत के उल्लास का त्यौहार है।
होली जलाना दहन का प्रतीक है। अपने भीतर वर्ष भर के वैमनस्य, गंदगी व ईष्या को जलाने का त्यौहार है।यह मन के मैल को धोने का त्यौहार है। गाली, गलौच कर कड़वाहट को मिठास में बदलने का मौसम है।यह भीतर छिपी गन्दगी को बाहर लाने का अवसर है। मन की शुद्धता को उज्जवल करने का मौका पैदा कराता है।
दूसरों का दिल न दुखाते हुए रंग डालने ,गंदे मजाक,हंसी उड़ाने, छेड़छाड़ करने व नंाचने गाने का त्यौहार है। इस तरह मन की भड़ास निकालने में यह त्यौहार सहायक है।आज से हजारो वर्ष पूर्व इन त्यौहारों की संरचना की गई थी। आज के समय में इनका औचित्य समझना जरुरी है। अपने त्यौहारों को खुली आँख से देखना आवश्यक है।
मनुष्य उत्सव धर्मा है। वह सदैव आनन्द और मस्ती में पसन्द करता है। होली भी आनन्द दायक त्यौहार है।
हिरण्यकश्यप् की आदेश से ं अग्नि रोधी(फायर प्रुफ ) साड़ी पहन कर अग्नि में बैठने के उपरान्त होलीका भक्त प्रहलाद को उसके सद्गुणों के कारण जला नहीं पाती, बल्कि स्वयं जल
आप सबको  दिल की गहराई से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।