मैंने “स्वास्थ्य : एक वैज्ञानिक समाधान ” पुस्तक क्यों लिखी ?

व्यक्ति की पहली  प्राथमिकता स्वास्थ्य  होता है lआज हम चालीस की उम्र पार करते ही जीवन शैली से जुड़े रोगों के शिकार हो जाते है ,उच्च रक्तचाप,मधुमेह,  थायराइड,अपच, अनिद्रा व दर्द की गोली शुरू हो जाती हैl एलोपेथी के पास इसका इलाज नहीं है , रोज  गोली लेने पर जोर देते है l इससे बचाव का रास्ता खोजता रहा l रिटायर्मेंट के बाद स्वस्थ रहने का  कोई मार्ग खोजने लगा l इस क्रम में योग,आयुर्वेद,वैकल्पिक चिकित्सा  व   सप्लीमेंट पर कुछ  प्रयोग किए l सप्लीमेंट रसायनों के बने होने से उनके भी साईड इफेक्ट होते हैं l  ये फार्मा कंपनियों  द्वारा बनाए जाते हैं  इसलिए  ये महंगे भी होते हैं  l इनके बीच कोई मार्ग खोजते हुए त्रिफला पर पहुँचा l

मेरे योगी  मित्र आर एस बोहरा  पोषक  त्रिफला  का   प्रयोग पिछले इक्कीस वर्षों  से कर रहे है l मैंने भी  अट्ठाईस वर्ष की उम्र में  इसे दो वर्ष तक निरन्तर लिया था l इसलिए इसके लाभों से अवगत होने के कारण पुन: लेना शुरू किया है एवं सपरिवार इसे निरन्तर ले रहा हूँ l त्रिफला मात्र एक रेचक चूर्ण नहीं है बल्कि यह तो सर्वरोगहर व सर्वपोषक तत्वों से भरपूर हैl जीवन शैली से जुड़े सभी रोग जड़ से नष्ट हो जाते हैं  l सभी प्रकार की गोलियां  धीरे धीरे बंद हो जाती है l इसको निरन्तर एवं संयमित  लेने से दो वर्ष के भीतर भीतर अनेक   रोग जड़ से समाप्त हो जाते हैं   व लेनेवाला  शतायु होता है l

इसको लिखने का हेतु यही है कि हमारे आयुर्वेद की खोज का लाभ हम सभी को मिले l मैं  श्री बोहरा, परिजन एवं अनुभव भेजने वालें मित्रो का आभारी हूँ l

यह पुस्तिका पोषक त्रिफला लेने वालो की मार्गदर्शिका व सचिव हैl यह जानकारी बढाने वाली नहीं ,त्रिफला प्रेमियों के लिए है l

जयन्ती जैन , संस्थापक, स्वास्थ्य –सेतु

Web: swasthyasetu.wordpress.com

Email:jayntijain@gmail.com

Mobile :9414289437

एफ -4०,सेक्टर 14,उदयपुर

ह्रदय को शक्ति,मस्तिष्क को शांति व पाचन को मजबूत करने हेतु बेल का शर्बत पीए

 

बिल्व/बेल में प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.

बेल का रस पीने के फायदे:

   1 दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक
   2. गैस, कब्ज की समस्या में राहत
   3. कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार

4  दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद

5. ठंडक देने का काम करता है

6 नई माँओ के लिए हितकर 

7 कैन्सर से बचाव करता है 

जूस बनाने की विधि :

गुदा निकाल कर  हाथ से मैश करके  थोडा पानी डाल कर छान लें l दूध ,दही या पानी डाल कर स्वादानुसार शक्कर , चुटकी भर काली मिर्च व सौठ डाल हिला दे l  बर्फ के २ क्यूब  डाले, शर्बत तैयार l

छाछ पीएं व गर्मी से राहत पाए

छाछ एक संपूर्ण भोजन है। यह पोषण से भरपूर है और एक अच्छे संतुलित आहार के लिए सभी आवश्यक तत्व इसमें मिल जाते हैं। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, न्यूनतम लिपिड (फैट), विटामिन और आवश्यक एंजाइम होते हैं। दैनिक रूप से इसका सेवन किया जाना चाहिए। वैज्ञानिक मतानुसार : छाछ में विटामिन `सी` होता है। अत: इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा त्वचा की आरोग्यता और सुन्दरता बरकरार रहती है। छाछ में लैक्टिक ऐसिड पाया जाता है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करता है।

 

छाछ को भोजन के साथ लेना हितकारी होता है। यह आसानी से पचने वाला पेय है। ताजे दही से बनी छाछ का प्रयोग ज्यादा लाभकारी होता है। छाछ से पेट का भारीपन, आफरा, भूख न लगना, अपच व पेट की जलन की शिकायत दूर होती है।यह गर्मी को काटती है l

छाछ नाश्ते के साथ तथा दिन के भोजन ( लंच ) के बाद नियमित रूप से पीनी चाहिए। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।  देर रात  छाछ नहीं पीनी चाहिए अन्यथा एसिडिटी या पेट की परेशानी हो सकती है। शाम के समय इसे पिया जा सकता है।

कैंसर का इलाज खोजने वाले मशहूर वैज्ञानिक डॉ मंजू रे से कैंसर का सफल इलाज कराएँ

शांति स्वरूप भटनागर पुरुस्कार विजेता डॉक्टर मंजू रे  एक मॉलिक्यूलर एन्जायोमोजी  एवं कैंसर बायोकेमिस्ट्री की मुख्य शोधकर्ता  है l वह कौंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ( CSIR) -बोस इंस्टिट्यूट ,कलकत्ता में कैंसर चिकित्सा पर शोध कर रही है l वह कोशिकओं के पुनर्निर्माण में होने वाली भिन्नताओं  की भी दक्ष  विशेषज्ञ है l उनके  कई शोध पत्र अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके है l

   कैंसर को रोकने पर इनका  गहन शोध चल रहा है l उनका कहनाहै कि मिथायल  ग्लायाक्सोल की कोशिकओं में कमी के कारण कैंसर होता है l  उनके अनुसार मिथाइलग्लॉक्सल से ट्युमर को रोका जा सकता है एवं अन्य कोशिकओं पर उसका दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है l तब किमो व  रेडिएशन थेरेपी की जरूरत नहीं पड़ेगी l इस पर रोगी इसके दुष्प्रभावो से बचेगा व इलाज भी सस्ता हो जायेगा l पर इनकी शोध की सेकंड ट्रायल चल रही है l इसमें कैन्सर के अंतिम स्टेज तक के रोगी ठीक होते है l उनके रोगियों की ठीक होने की दर ७० प्रतिशत है l  डॉ  विलियम एफ कोच ,एक अमरीकन  होमियोपैथ  इस पर कार्य कर चुके थे l नोबल विजेता डॉ अल्बर्ट स्जेंट ग्योर्गी ,हंगरी के वैज्ञानिक ने भी इस पर कार्य किया था l  डॉ मंजू रे  ने इस शोध को आगे बढाया है l वह ट्रायल के नियमो के अनुसार पेट सिटी  व ओंकोलोजिस्ट के सहयोग से उनसे परामर्श व दवा ले सकते है l

निवास : १३,रीजेंट  एस्टेट ,नियर सुलेखा मोरे ,जादवपुर ,कोलकाता

सम्पर्क फोन : 9214044523 वाया अनिल पॉल

नाभि में देशी घी /सरसों तेल लगा कर नजला,आधासीसी व कमजोरी को ठीक करें

 

 

 

 

नाभि गर्भ में शिशु नाभि नाल के द्वारा माँ से जुड़ा होता है l नाभि के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक नाडीयां स्थित होती है।इस पर देशी गाय का घी लगाने से यह सुखी नाडीयों तक पहुँच कर उन्हें ठीक करता है l आयुर्वेद के अनुसार आपका नाभि चक्र आपकी ऊर्जा और कल्पना का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं, नाभि आपकी इच्छा शक्ति और लक्ष्यों का घर होता हैं। अपने नाभि चक्र को संतुलित करने के लिए उसमे तेल लगायेl मनुष्य के शरीर का हर हिस्सा नाभि से जुड़ा हुआ होता हैl इससे कम्पन्न ,याददास्त व सभी प्रकार की कमजोरी ठीक होती है l
प्रतिदिन नहाने के बाद व सोने के पहले दो बूंद घी नाभि व नाक में लगाए l