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दिवाली की शुभकामनाएं

हम  चाहे लाख दिये और
मोमबत्तीया जलाऐ इनसे
हमारे  जीवन में रोशनी
होने वाली नही।

असली दिवाली तो उस दिन
ही समझना जिस दिन हमारे
भीतर का दिया जले।

उससे पहले तो सब अंधकार
ही है ।

और राम के घर लौटने
से हमारा  क्या लेना देना,
बात तो उस दिन बनेगी
जब हम अपने
भीतर लौटोगे

तभी  होगी असली दिवाली l

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थकान मिटाने हेतु हर्बल पेय, सम्मेद शिखर पर जो पिलाते है उसे घर बनाएं

सम्मेद शिखर की यात्रा पर जो पेय  हमें ऊंचाई पर थकान उतारने  कोठी की तरफ से मिलता है,यह रेसिपी उसी से ली हुई हैl वास्तव में यह एक आयुर्वेदिक पेय है जो निम्न मसालों से तैयार करते है । इसके सेवन से सभी प्रकार की थकान तत्काल मिट जाती है । एक पाव हर्बल पेय बनाने हेतु निम्न मात्रा में सामग्री लें ।
1. सौंठ – 60 ग्राम
2. काली मिर्च – 25 ग्राम
3. सौंफ – 25 ग्राम
4. धनिया – 25 ग्राम
5. तेज पता – 25 ग्राम
6. ईलाइची छोटी – 12 ग्राम
7. ईलाइची बड़ी – 12 ग्राम
8. दाल चीनी – 12 ग्राम
9. लौंग – 12 ग्राम
10. अजवाईन – 12 ग्राम
11. जायफल – 3 ग्राम
12. पीपल – 3ग्राम
इन उपरोक्त सामग्री को अलग-अलग कुट पीस कर पाउडर बनाकर फिर मिक्स करे । एक कप पानी में उपरोक्त एक चम्मच मिक्स पाउडर को उबाल कर स्वादानुसार शक्कर मिलावें । इस प्रकार ऊर्जा पेय पिने के लिए तैयार है । यह सम्मेदशिखर की 20 किमी0 पैदल यात्रा करने पर पिलाया जाता है । यात्री थकान उतार कर पुनः 10 किमी0 चलते हैं । यह बढि़या हर्बल चाय है, पीकर लाभ देखें ।

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चीनी एक मीठा जहर: चीनी के विकल्प

शक्कर एक तरह का जहर है जो कि मूख्यतः मोटापे, हृदयरोग,सभी तरह के दर्द व कैंसर का कारण है । भारतीय मनीषा ने भी इसे सफेद जहर बताया है । डाॅ0 मेराकोला ने इसके विरूद्ध बहुत कुछ लिखा है । डाॅ0 बिल मिसनर ने इसे प्राणघातक शक्कर-चम्मच से आत्महत्या बताया है । डाॅ0 लस्टींग ने अपनी वेब साईट डाॅक्टर में इसे विष कहा है । रे कुर्जवले इस सदी के एडिसन जो कि 10 वर्ष अतिरिक्त जीने अपने वार्षिक भोजन पर 70 लाख रूपया खर्च करते हैं ने अपने आहार में अतिरिक्त चीनी लेना बन्द कर दी है ।

अधिक शक्कर से वजन व फेट दोनों बढ़ते हैं । डाॅ0 एरान कैरोल तो स्वीटनर से भी चीनी को ज्यादा नुकसानदेह बताते हैं । चीनी खाने पर उसकी आदत नशीले पदार्थ की तरह बनती है । प्राकृतिक शर्करा जो फल व अनाज में तो उचित है । sugar is poision
हम जो चीनी बाहर से भोजन बनाने में प्रयोग करते हैं वह विष का कार्य करती है । यह शरीर के लिए घातक है । डिब्बाबन्द व प्रोसेस्ड फूड में चीनी ज्यादा होती है उससे बचे । अर्थात् पेय पदार्थ व मिठाईयांे के सेवन में संयम बरतना ही बेहतर है।

चीनी के विकल्प
आप जितनी कम चीनी खाएंगे, उतने ही स्वस्थ रहेंगे। मधुमेह पीडि़तों को चीनी का कम सेवन करना चाहिए। प्राकृतिक मिठास जैसे फल, अंजीर का सेवन करें। स्वस्थ लोग चीनी की बजाय गुड़, शहद, खजूर व फलों का सेवन करें। इससे चीनी की तुलना में खून में शुगर का स्तर कम तेजी से बढ़ता है। शहद चीनी का बेहतर व पोषक विकल्प है।
चीनी के कृत्रिम विकल्पों में स्टेविया,  प्रमुख हैं। स्टेविया सामान्य चीनी से 300 गुना अधिक मीठी है, पर इसके सेवन से खून में शर्करा का स्तर अधिक नहीं बढ़ता।
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त्रिफला एक अमृत रसायन : कायाकल्प करें व गम्भीर रोग दूर करें

त्रिफला के सेवन से अपने शरीर का कायाकल्प कर जीवन भर स्वस्थ रहा जा सकता है | इस त्रिफला चूर्ण जिसे आयुर्वेद रसायन भी मानता है के सेवेन से  शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है | बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की | क्योंकि त्रिफला का 12 वर्षों तक नियमित सेवन हमारे  शरीर का कायाकल्प होता  है |उक्त चूर्ण में हरड,बहेडा व आंवला 1:2:4 की मात्रा होती हैंl

सेवन विधि –

सुबह खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें | इस नियम का कठोरता से पालन करें |
यह तो हुई साधारण विधि पर आप कायाकल्प के लिए नियमित इसका  प्रयोग  कर रहे है तो इसे विभिन्न ऋतुओं के अनुसार इसके साथ गुड़, सैंधा नमक आदि विभिन्न वस्तुएं मिलाकर निम्नानुसार  ले |
अपनी उम्र जितना रत्ती लेना हैl

 ऋतु मास मिलाये जाने वाली वस्तु का नाम मिलाये जाने वाले द्रव्यों का
अनुमानित अनुपात
ग्रीष्म ऋतु  ज्येष्ठ , आषाढ़

 

गुड़ 1/4  भाग
वर्षा ऋतु

 

सावन और भादो

 

सेंधा नमक 1/8 भाग
शरद ऋतु

 

अशिवनी और कार्तिक

 

देशी खांड के
साथ
1/6 भाग
हेमन्त रितु

 

अगहन और पौष

 

सौंठ का
चूर्ण के साथ
1/6 भाग
शिशिर ऋतू

 

 माघ, फागुन,

 

पिप्पली
चूर्ण के साथ
1/8 भाग
बसंत ऋतू

 

 चेत्र , वैसाख

 

शहद के साथ चाटा जा सके
इतनी मात्रा में

इस तरह इसका सेवन करने से एक वर्ष के भीतर शरीर की सुस्ती दूर होगी , दो वर्ष सेवन से सभी रोगों का नाश होगा , तीसरे वर्ष तक सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी , चार वर्ष तक सेवन से चेहरे का सोंदर्य निखरेगा , पांच वर्ष तक सेवन के बाद बुद्धि का अभूतपूर्व विकास होगा ,छ: वर्ष सेवन के बाद बल बढेगा , सातवें वर्ष में सफ़ेद बाल काले होने शुरू हो जायेंगे और आठ वर्ष सेवन के बाद शरीर युवाशक्ति सा परिपूर्ण लगेगा |

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जीवन ऊर्जा बढ़ाने प्राण मुद्रा लगाएँ

प्राण मुद्रा को प्राणशक्ति का केंद्र माना जाता है और इसको करने से प्राणशक्ति बढ़ती है । इस मुद्रा में छोटी अँगुली (कनिष्ठा) और अनामिका (सूर्य अँगुली) दोनों को अँगूठे से स्पर्श कराना होता है । और बाकी छूट गई अँगुलियों को सीधा रखने से अंग्रेजी का ‘वी’बन जाता हैl

प्राण मुद्रा के लाभ

  • प्राण मुद्रा से आँखों की रौशनी बढती है साथ ही साथआँखों से जुड़ी कई परेशानियां भी दूर होती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से कई परेशानिया जैसे की बार बार -बार सर्दी-जुकाम होना, बुखार आना होती है| इसके अभ्यास से आपका प्रतिरोधक तंत्र मजबूत बनता है|
  • जिन महिलाओ को मासिक धर्म के दौरान बहुत दर्द होता है उन्हें इसे करने से फायदा मिलता है|
  • जिन लोगो की सहनशीलता कम होती है और लगातार थकान बनी रहती है, उन्हें इस मुद्रा को करने से ताकत मिलती है|
  • यह त्वचा के रोगों को भी ठीक करता है| इससे लाल त्वचा, त्वचा पर चकत्ते, पित्ती आदि रोग ठीक होते है|
  • उच्च रक्तचाप के मरीजो के लिए भी यह आसन लाभदायक है|
  • यदि आपको छोटी छोटी बात पर क्रोध आता है और चिड़चिड़ापन महसूस होता है तो इसे करने से इन सभी चीजों में कमी आती है|
  • अन्य समस्याए जिसमे प्राण मुद्रा को करने से फायदा मिलता है:-

थॉयरायड का बढ़ना

जोड़ों में अस्थिरता

भूलने की आदत

नींद न आना (अनिद्रा)

पेट में जलन

कब्ज और एसिडिटी

मूत्र मार्ग में जलन होना

दुर्गंधयुक्त पसीना

पीलिया

समय से पहले बुढ़ापा आना

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हाई बी पी की गोली निरन्तर लेने के साईड इफेक्ट

 

सभी दवाओं के साईड इफेक्ट होते हैlउच्च रक्तचाप की गोली निरंतर लेते रहने से घातक  दुष्प्रभाव होते हैl प्रत्येक रोगी में साईंड इफेक्ट अलग अलग होते हैl एक ही दवा के प्रभाव भिन्न भिन्न रोगी में  अलग अलग  हो सकते हैl

उच्च रक्तचाप की गोली के लेते रहने से जी घबराना ,उलटी होना , कफ बनना  व थकान बढ़ जाती हैl कुछ लोगो को कब्ज ,दस्त लगना ,वजन बढना या घटना,सरदर्द व सेक्स में रूचि का घटना भी शामिल हैl ऐ सी इ इन्हिबिटोर्स के लेने से कफ बढ़ता हैl डाईयुरेटिकस लेने से पेशाब की आवृति बढ़ जाती हैl

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हार्ट अटैक आने पर उससे बचने अपान वायु मुद्रा लगाएँ

हार्ट अटैक आ जाने पर डॉक्टर की मदद मिलने तक अपान वायु मुद्रा लगा कर रखेंl यह ह्रदय को स्वस्थ रखता हैl

appan vayu mudra

विधि:

अंगूठे के पास वाली पहली उंगली अर्थात तर्जनी को अंगूठे के मूल में लगाकर मध्यमा और अनामिका को मिलाकर उनके शीर्ष भाग को अंगूठे के शीर्ष भाग से स्पर्श कराएं। सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठिका) को अलग से सीधी रखें। इस स्थिति को अपान वायु मुद्रा कहते हैं।इसको मृत संजीवनी मुद्रा भी कहते है

आवश्यकतानुसार हर रोज 20 से 30 मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास किया जा सकता है।

लाभ :

हृदय रोगियों के लिए यह मुद्रा बहुत ही लाभदायक बताई गई है।

इससे रक्तचाप को ठीक रखने में सहायता मिलती है।

पेट की गैस एवं शरीर की बेचैनी इस मुद्रा के अभ्यास से दूर होती है।

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