कमजोरी मिटाने व प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु प्रोटीन जरूरी और उसकी पूर्ति कहाँ से करें


हड्डियों, मांसपेशियाँ, ब्लड के प्रॉपर फंक्शन, कोशिकाओं को बनाने व सुधारने, प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में, वसा घटाने में, दिमाग के फंक्शन और बेहतर त्वचा के लिए प्रोटीन अनिवार्य पोषक तत्व हैं। इसके अलावा हर्मोन और बॉडी केमिकल्स का सुचारू रूप से कार्य  हेतु भी प्रोटीन चाहिए ।protin

इस हेतु हम निम्न  पदार्थो का सेवन करें :

पनीर – दूध से बने सभी प्रोडक्ट स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं जो हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी करते हैं।पनीर की पतली स्लाइस बना कर सैक कर कहा सकते है l

 मूंग की दाल – मूंग की दाल प्रोटीन की कमी पूरी करने का एक सस्ता साधन है क्योंकि मूंग की दाल प्रोटीन से भरपूर होती है।

दूध – दूध ना सिर्फ शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी कर हड्डियां मजबूत करता है बल्कि ये प्रोटीन से भी भरपूर होता है।

 अंकुरित अनाज – अंकुरित अनाज भी प्रोटीन सेवन का एक बेहतरीन जरिया है।अंकुरित सोयाबीन अच्छा स्रोत है l

मूंगफली – यूँ तो मूंगफली में फैट पाया जाता है लेकिन ये प्रोटीन से भरपूर होती है।

माँसाहार  से  तो  प्रोटीन मिल  ही जाता है l

डार्विन, फ्रायड एवं कार्ल मार्क्स तीनो से महर्षि अरविन्द की खोज आगे एवं सार्थक

श्री रामधारी सिंह  दिनकर ने कहा हे कि महर्षि अरविन्द का विकासवाद का सिधान्त डार्विन से आगे है l यह मनुष्य के दिव्य मनुष्य की विकास यात्रा की  स्थापना करता है l sriaurobindo फ्रायड ने लिखा है की मनुष्य  करता वही है जो वह चाहता है लेकिन वह क्या करना चाहेगा, उस पर उसका कोई अधिकार नहीं है,अथार्त स्वाधीन नहीं है l अरविन्द के अनुसार वह स्वाधीन है ,अगर वह मन को विकसित कर ले l मार्क्स आर्थिक गुलामी की बात करता है जबकि इसके विपरीत अरविन्द के  अनुसार मनुष्य अपनी आवश्कताओ पर विजय पा सकता है l   अरविन्द के पूर्ण योग का पालन कर- अतिमानस प्रकट कर  व्यक्ति दिव्यता  अपने भीतर प्रकट कर दिव्य मानव बन सकता है l

व्यंग करने व टोकने से सामने वाले का आत्म विश्वास कम होता हैं

बार बार व्यंग  करने  व टोकने से व्यक्ति  अपने को छोटा महसूस करते है l इससे व्यक्ति की चेतना पर भार पड़ता है l यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि व्यक्ति की शारीरिक गति और योजनाएं पूरी तरह उसकी सोच से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस  टोकने  व हँसी उड़ाने से श्रोता  सोच के साथ वह अपने कामों में संतुलन नहीं बना पाता और आगे की चीजें बिगड़ सकती हैं।intruption

रोक टोक से  श्रोता की निर्णय लेने की शक्ति  विकसित नहीं हो पाती है l उसकी कुंठा बढती जाती है, , वह दबाव में जीने लगता हैl उनकी पसन्द-नापसन्द की शक्ति विकसित नहीं हो पाती है l अथार्त नजरिया  विकसित  नहीं  हो पाता हैl

इस पर एक सच्ची घटना याद आती है l पांडिचेरी आश्रम में श्री अरविन्द की समाधि पर मौन रखते है l  वहाँ पर  दो पुराने साधक  कभी कभी बाते करते थे l  इस पर एक अन्य साधक ने श्री माँ से शिकायत की कि  हमारे  दो साधक समाधि पर बाते करते है ,उन्हें मैं टोकू क्या ?

इस पर श्री माँ ने कहा कि अगर टोकेंगे और उन्होंने समझा तो उनको लाभ होगा l अगर नहीं टोकेंगे तो आपको लाभ होगा,आपकी आंतरिक समझ बढ़ेगी l आपकी चेतना विकसित होगी l

 

 

तनाव मिटाने व स्वस्थ रहने मेग्निसियम स्नान करें

मेग्निसियम एक महत्वपूर्ण खनिज है जो की हमारे शरीर में होने वाली  तीन सौ  क्रियाओ   में जरूरी है l यह हमें शाकाहारी भोजन से आवश्यक मात्र जितना नहीं मिलता है l इसके अभाव में हम थक जाते है व शरीर बीमार पड जाता है l इसका अवशोषण त्वचा के द्वारा  अच्छा होता है इसलिए मेग्निसिम स्नान स्वस्थ होने का सरल तरीका हैlwoman-relaxing-in-bathtub_23-2147835569

एक कप मेग्निसियम क्लोराइड या एप्सोम साल्ट (मेग्निसियम सल्फेट ) टब में गुनगुने पानी में गोल कर  बीस से तिस मिनट स्नान करें l  पहले चार दिन रोज ले व बाद में सप्ताह में एक बार ले l आपके शरीर में मेग्निसियम के पहुँच जाने से आपका स्वास्थ उतरोत्तर ठीक हो जायेगा l

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क्या खुद को दिवाली की राम राम की!

हम अपने को भी तो  प्यार कर सकते है l हमें  अपने  को भी ख्याल में रखना है l अपने को खोकर  कुछ भी पा ले उसका क्या महत्व है ?हम ही अपने को सच्ची ख़ुशी दे सकते है l

अस्तित्व आपके लक्ष्यों को पुरा करने का षड्यन्त्र करे ! दिवाली  एवं नव वर्ष की शुभकामनाएँ !

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