हार्ट ब्लोकेज खोलने हेतु योगिक क्रिया कर स्टंट लगवाने से बचे

इससे हृदय के पास रक्त शिराओ में जमा कोलेस्त्रोल हटने लगता है l

प्रथम चरण :

सर्वप्रथम विश्राम की मुद्रा में खड़े हो , अब सीने को फुला कर एक हाथ से मुट्ठि को नावनुमा बंद  कर   एक  तरफ  सीने पर जोर से    २० बार मारे l अंदर हाथ में हवा भरी ही रहने दे , इससे हृदय मजबूत होता हैंl फिर दूसरी तरह इसी प्रकार  बीस बार सीने पर मारे , इससे  ह्रदय  व पुरे वक्षस्थल की मालिस भी हो जाती है l

द्वितीय चरण :

श्वास छोड़ते हुए एक हाथ से मुट्ठी बंद कर मारते हुए एवं श्वास धीरे से छोड़ते रहे l इससे ब्लोकेज  खुलते है l इसके बाद विश्राम करें l

( आभार : योग विशेषज्ञ पूर्ण सिंग राठोड़ )

सर्दी-जुकाम से बचने हेतु लोंग, कालीमिर्च व कपूर का ‘इनहेलर’ बना कर सूंघे

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अपने रुमाल के एक कोने पर पांच लोंग,पांच कालीमिर्च एवं कपूर की एक टिकिया को गांठ में बांध ले l खानेवाले अच्छे कपूर का प्रयोग करे l प्रति सप्ताह कपूर को फिर से डाले l यह आपका इनहेलर तैयार है l उक्त पोटली को दिन में 10 से २० बार अपने हाथ पर रगड़ उसे अच्छी तरह सूंघे l परिवार के प्रत्येक सदस्य की पोटली अलग रखे ,इससे किसी प्रकार का संक्रमण नहीं फेलेगा l  जुकाम ,सर्दी ,स्वाइन फ्लू ,बुखार ,सरदर्द सभी के  निवारण में मदद मिलेगी l


इससे बचने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ घरेलू उपाय आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैंl  धूप में बैठे l  गिलोय ,लहुसन एवं हल्दी का सेवन बढा कर अपनी प्रतिरोध क्षमता बढाऐ l

रोजाना प्राणायाम करें

नहाने की सही विधि ताकि उसका पूरा लाभ मिले

अगर सही तरीके से स्नान नहीं किया गया तो १-२ नहीं बल्कि कई तरह की परेशानियाँ होती हैं. ये इस प्रकार हैं:

  • अक्सर गुस्सा होना.
  • बीमार पड़ना.
  • ब्लड प्रेशर की परेशानी.
  • सर में दर्द होना.
  • जल्दी जल्दी बुखार आना.

सबसे उत्तम शरीर के समान तापमान वाले पानी से नहाना है l  सबसे पहले मुख में पानी भर ले , फिर दाये कंधे पर तीन मग्गे पानी डाले ताकि सिहरन निचे जाए l बायीं तरफ ह्रदय होता है इसलिए उधर पानी पहले नहीं डाले ,फिर पांच मग्गे पानी सिरपर डाले l

पहले पावों पर पानी न डाले ,अन्यथा  सिहरन उपर उठेगी जो शरीर को नुकसान पहुचाती है l इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि इस प्रकार नहाने से हमारे सिर की गर्मी शरीर से होते हुए पैरों से निकल जाती है। शरीर को अंदर तक शीतलता मिलती हैl बीमारी की हालत में सिर के नीचे से ही स्नान करना चाहिएl

स्नान आरम्भ करने के प्रथम, यदि शरीर के अंग-प्रत्यंग की सूखी मालिश कर ली जाय तो अधिक लाभ होगा। तेल की मालिश करके भी यह स्नान किया जा सकता है, पर स्नानोपराँत शरीर पर लगे उस तेल को किसी खुरदुरे तौलिये से खूब रगड़-रगड़ कर पोंछ लेना अत्यन्त आवश्यक है।

स्नान करते समय किसी खुरदुरे वस्त्र या केवल हाथ से ही प्रत्येक अंग, विशेष कर गुह्यांगों को मलकर, उस पर जमे मैल को छुड़ाते जाना भी कम आवश्यक नहीं है।   साबुन का प्रयोग नहीं करे ,जिसमे कास्टिक सोडा होता है जो त्वचा के लिए हानिप्रद है  एवं यह कैंसर कारक है l

गर्म पानी से नहीं नहाए l

बहुत देर तक और अच्छे से स्नान करने से जहां थकान और तनाव घटता है, वहीं यह मन को प्रसंन्न कर स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायी सिद्ध होता है।

घुटने के दर्द का घरेलु उपचार,घुटना बदलवाने से बचे

• बीस ग्राम ग्वारपाठे अर्थात् एलोवेरा के ताजा गूदे को खूब चबा-चबाकर खाएं साथ में 1-2 काली मिर्च एवं थोड़ा सा काला नमक तथा ऊपर से पानी पी लें। यह प्रयेाग खाली पेट करें। इस प्रयोग के द्वारा घुटनों में यदि साइनोबियल फ्रलूड भी कम हो गई हो तो बनने लग जाती है।
• दिन भर में तीन अखरोट/ पांच चम्मच अलसी अवश्य खाएं। इससे भी साइनोबियल फ्रलूड बनने लगती है। अनुभूत प्रयोग है।
• एक्यूप्रेशर-रिंग को दिन में तीन बार, तीन मिनट तक अनामिका एवं मध्यमा अंगुलि में एक्यूप्रेशर करें।
• प्रतिदिन कम से कम 2-3 किलोमीटर तक पैदल चलें।
• दिन में दस मिनट आंखें बंद कर, लेटकर घुटने स्वस्थ हो रहा है ,इसका ध्यान करें।
• नियमित रूप से अनुलोम-विलोम एवं कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करें। अनुलोम-विलोम धीरे-धीरे एवं कम से कम सौ बार अवश्य करें। इससे लाभ जल्दी होने लगता है।
• खाने के एक ग्रास को बार बार चबाकर खाएं। इस साधरण से प्रतीत होने वाले प्रयोग से कुछ ही दिनों में घुटनों में साइनोबियल फ्रलूड बनने लग जाती है।
• पूरे दिन भर में कम से कम 12 गिलास तक पानी अवश्य पिए। ध्यान दीजिए, कम मात्रा में पानी पीने से भी घुटनों में दर्द बढ़ जाता है।
• भोजन के साथ अंकुरित मेथी का सेवन करें।

कमजोरी मिटाने व प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु प्रोटीन जरूरी और उसकी पूर्ति कहाँ से करें


हड्डियों, मांसपेशियाँ, ब्लड के प्रॉपर फंक्शन, कोशिकाओं को बनाने व सुधारने, प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में, वसा घटाने में, दिमाग के फंक्शन और बेहतर त्वचा के लिए प्रोटीन अनिवार्य पोषक तत्व हैं। इसके अलावा हर्मोन और बॉडी केमिकल्स का सुचारू रूप से कार्य  हेतु भी प्रोटीन चाहिए ।protin

इस हेतु हम निम्न  पदार्थो का सेवन करें :

पनीर – दूध से बने सभी प्रोडक्ट स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं जो हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी करते हैं।पनीर की पतली स्लाइस बना कर सैक कर कहा सकते है l

 मूंग की दाल – मूंग की दाल प्रोटीन की कमी पूरी करने का एक सस्ता साधन है क्योंकि मूंग की दाल प्रोटीन से भरपूर होती है।

दूध – दूध ना सिर्फ शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी कर हड्डियां मजबूत करता है बल्कि ये प्रोटीन से भी भरपूर होता है।

 अंकुरित अनाज – अंकुरित अनाज भी प्रोटीन सेवन का एक बेहतरीन जरिया है।अंकुरित सोयाबीन अच्छा स्रोत है l

मूंगफली – यूँ तो मूंगफली में फैट पाया जाता है लेकिन ये प्रोटीन से भरपूर होती है।

माँसाहार  से  तो  प्रोटीन मिल  ही जाता है l