अवचेतन की धुलाई होली पर:शुभकामनाएँ

 अवचेतन  की  धुलाई होली   परहोली तो बस एक बहाना है रंगों का, ये त्यौहार तो है आपस में दोस्ती और प्यार बढ़ने का, चल सारे गिले सिक्वे दूर कर के, एक दुसरे को खूब रंग लगते हैं मिलकर होली मानते हैं!
होली की आपको हार्दिक शुभकामनायें!

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उत्तरी भारत में होली पर बच्चे की ढून्ढ क्यों करतेहै?

प्राचीन कथानुसार राजा पृथु के समय कुटिल ढुन्ढा नाम की एक राक्षसी थी जो बच्चों को परेशान करती थी,चुराया करती थी,उसके भय से बच्चे बीमार हो जाते थे एवं वह उन्हे खा जाती थी । इस कारण बच्चे उससे बहुत डरते थे।उसे वरदान प्राप्त था लेकिन शिव के शाप के कारण बच्चो की शरारत से मुक्त नही ंथी।वह नकारात्मकता का प्रतीक थी ।उससे सुरक्षा हेतु तत्समय के राजपुरोहित ने एक उपाय सुझाया था ताकि बच्चे उसके झांसेमें न आए । फाल्गुन मास की पूर्णिमा को समूह में बच्चे जब किलकारियां करते हुए उसके पास जाते है तो वह अप्रभावी हो जाती है ऐसे में  बच्चे उसे चिल्लाते हुवे जला देते है।इस तरह बच्चे भय से मुक्त हो जातेहै।इसलिए होली के दिन बच्चों को अग्नि के चारों ओर समूह में शोर करते हुवे घुमाया जाता है । इसी प्रक्रिया को ढून्ढ कहा जाता है अर्थात् राक्षसी ढुन्ढा के डर को बच्चों के मन से निकालने हेतु ढून्ढ की जाती है ।वैसे ही नकारात्मकता अर्थात् राक्षसवृति से बच्चों को मुक्त रखने के लिए ढून्ढ की जाती है ।असद को पराजित कर सदवृति को स्ािापित करने हेतु होली मनाते है ।प्रहलाद अर्थात् सत्य की जय होती है । इसीलिए ढंूढ होली के दिन मनाई जाती है ।
यह बच्चो ंको निर्भय बनाने का त्यौहार है । बच्चों के मन में बैठे डर को भगाने हेतु मनाया जाता है ।इस तरह  यह अभय को सिखाने का त्यौहार है । नवजात को जीवन से परिचय कराने काअवसरहै । पुराने समय मेंबच्चे के जन्म की खुशी भी ढून्ढ पर ही मनाई जाती है । तब   जन्मदिन नही ंमनाते थे।

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आज से हजारो वर्ष पूर्व इन त्यौहारों की संरचना की गई थी। आज के समय में इनका औचित्य समझना जरुरी है। अपने त्यौहारों को खुली आँख से देखना आवश्यक है।
मनुष्य उत्सव धर्मा है। वह सदैव आनन्द और मस्ती में पसन्द करता है। होली भी आनन्द दायक त्यौहार है।
हिरण्यकश्यप् की आदेश से ं अग्नि रोधी(फायर प्रुफ ) साड़ी पहन कर अग्नि में बैठने के उपरान्त होलीका भक्त प्रहलाद को उसके सद्गुणों के कारण जला नहीं पाती, बल्कि स्वयं जल जाती है।अथार्त  नकारात्मकता सत्य को मिटा नहीं सकती है।इस तरह बुराई पर अच्छाई की विजय का यह त्यौहार है। यह पतझड़ की विदाई पर खुशियां मनाने वाला त्यौहार है। बंसत के उल्लास का त्यौहार है।
होली जलाना दहन का प्रतीक है। अपने भीतर वर्ष भर के वैमनस्य, गंदगी व ईष्या को जलाने का त्यौहार है।यह मन के मैल को धोने का त्यौहार है। गाली, गलौच कर कड़वाहट को मिठास में बदलने का मौसम है।यह भीतर छिपी गन्दगी को बाहर लाने का अवसर है। मन की शुद्धता को उज्जवल करने का मौका पैदा कराता है।
दूसरों का दिल न दुखाते हुए रंग डालने ,गंदे मजाक,हंसी उड़ाने, छेड़छाड़ करने व नंाचने गाने का त्यौहार है। इस तरह मन की भड़ास निकालने में यह त्यौहार सहायक है।
आप सबको  दिल की गहराई से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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