पटकथा लेखन एक कला :उसमें पारंगत कैसे हो ?

मनोहर श्याम जोषी की प्रसिद्ध कृति: पटकथा लेखन एक परिचय


यह हिन्दी में पटकथा लेखन पर सर्वश्रेष्ठ कृति है। इसमें पटकथा के सभी अंगोे का विस्तृत उदारहण सहित वर्णन है। पटकथा लिखने से पूर्व इसको पढ़ना बहुत जरुरी है। इसमें फिल्म की पटकथा एवं टीवी धारावाहिको की पटकथा पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। फिल्म मेकिंग, फिल्म सम्पादन,संवाद लेखन, कैमरा टेकनिक एवं षाॅट की जानकारी है। जो फिल्म लेखन के लिए जरुरी है। इसमें 23 पाठ है।
आईडिया, प्रिमाईस, वन मिनट सिनोप्सीस, टू मिनट मूवी, ट्रीटमेन्ट,(आम्बियांस और हाइलाइट्स), स्टेप आउट लाईन,, फिल्म के तीन अंग-सेटअप, टकराहट,चरमोत्कर्ष और समाधान, प्लाॅट पाॅइंट, षूटिंग स्क्रीप्ट ,एक्शन पाॅइंट को विस्तार से समझाया गया है।
मनोहर ष्याम जोषी हिन्दी के जाने माने रचनाकार है। वैसे भारत में टीवी धारावाहिकों के आप जन्मदाता है। कुरु-कुरु स्वाहा, कक्काजी कहिन आदि प्रसिद्ध उपन्यास लिखे है। हम लोग एवं बुनियाद जिसे प्रसिद्ध धारावाहिक आपने ही लिखे थे। है राम, अप्पू राजा, पापा कहते है आदि फिल्मों की पटकथाएं आपने लिखी है।
प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन , नई देल्ही
मूल्य : रू 75

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चोकर युक्त आटा खाने के 5 फायदे

चोकर के लाभ

गेहूं के छिलके को चोकर कहते हैं। आटे को छान कर चोकर को बाहर नहीं निकालना चाहिए l इसको नियमित  खाने के कई लाभ है:

  • इसमें रेशे होने से पाचन में सहायक है,इससे कब्ज दूर होता हैl
  • चोकर में जिसमें लौह, विटामिन बी आदि तत्व पाये जाते है जो की आपके शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाते है और आपकी हड्डियों को भी मजबूत बनाने में सहायक होते है।
  • चोकर वाले आटे में फाइबर और पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है जिससे वजन कम होता है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।
  • डायटीशियन शैलजा त्रिवेदीके अनुसार चोकर वाले आटे से बनी रोटी दाल के साथ खाने से अमीनो एसिड की पर्याप्त मात्रा बॉडी को मिलती है।
  • यह आपके कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखता है तथा आपके अमाशय के घावों को भी सही करने में सहायक होता है।

थायराइड की गोली निरन्तर लेने से उसके घातक साइड इफेक्ट

एलोपैथि में थाइरोइड ग्रंथी ठीक  नहीं की जाती है बल्कि इस रोग को  मैनेज किया जाता हैl रोग के साथ जीना सिखाया  जाता हैl स्वयं थायराइड ग्रंथी नियमित तैयार हार्मोन मिलते रहने से निष्क्रिय हो जाती हैl

थायराइड ग्रंथी एक महत्पूर्ण यदि उचित मात्रा में गोली न ले तो थकान,सरदर्द ,चिडचिडाहट ,पसीना आना ,धडकनों में अनियमितता, अनिंद्रा आदि हो सकते  हैl  अथार्त अपने डॉक्टर  से डोस  समय समय पर तय करा लेंl

थायराइड की गोली उचित मात्रा में  नियमित लेने से  भी कैल्शियम की कमी हो जाती है,फलस्वरूप धीरे धीरे हड्डीया कमजोर होने से ओस्टीपोरोसिस हो जाता हैl  इससे बदन में दर्द रहने लगता हैl कैल्शियम की कमी आगे चल कर गुर्दो को भी ख़राब करने लगती हैl  नियमित थाइरोइड की गोली लेते रहने से मूड  खराब होना, सरदर्द ,पसीना आना , धडकनों में अनियमितता, दस्त लगना  व हाथों में कम्पन्न भी हो सकते हैंl  लम्बे समय तक गोली लेने पर ह्रदय, अग्नाशय व जिगर  खराब हो सकते हैl

 

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लिखने में बाँधाए दूर कर सफल लेखक बने

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महान् लेखक बनने की कंुजी और मोपासां

प्रसिद्ध फ्रासीसी साहित्यकार मोपासां ;डंनचंेेंदजद्धबचपन से ही लेखक बनने की जिद करने लगा था। तब उसकी समझदार मां अपने परिचित प्रसिद्ध लेखक फ्लोएर्बेट ;थ्संनइमतजद्ध के पास ले गई एवं उनको बताया कि मेरा बेटा लेखक बनना चाहता है। अतः वह आपसे लेखक बनने के सूत्र जानना चाहता है।GDMaupassant
वे उस समय व्यस्त थे। फ्लोएर्बेट ने एक माह बाद बुलाया।
ठीक एक माह बाद बच्चा मोपासां उनके पास पहुँच गया। उन्होने उसे पहचाना नहीं तब उसने अपनी मां का परिचय देकर बताया कि वह लेखक बनने के सूत्र सिखने आया था तब आपने एक माह बाद आने को कहा था।
तब फ्लोएर्बेट ने टेबल पर पड़ी एक किताब उसे दी और कहा कि इसे याद करके आओ।
मोपासां उस किताब को महीने भर में पूरी तरह याद कर फिर उनके पास पहुँच गया। तब गुरु ने फिर पूछा कि क्या पूरी किताब याद कर लीं।
मोपासां ने कहा-हां कहीं से भी पूछ लिजिए। वह किताब एक बड़ी डिक्शनरी थी।
फ्लोर्बेएट आश्चर्य से उस बालक को देखते रहे फिर पूछा कि खिड़की के बाहर से क्या दिखाई देता है?
बालक ने कहा ‘‘पे़ड’’- कौनसा पेड़-‘‘पाईन का पेड़’’
ओह, ठीक से देखो-‘‘ पास के तीसरे मकान की तीसरी मंजिल से एक लड़की झांक रही है।’’
‘‘और अच्छी तरह देखो’’
तब उसने कहां -‘‘आकाश में चिडि़या उड़ रही है।’’
हां, अब ठीक है।
वह पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं है। वह तीन मंजिला मकान, खिड़की से झाँकती लड़की,, वह आसमान, वह चिडि़या, वे सभी उस पेड़ से जुड़े हुए है। पेड़ कभी अकेला नहीं हो सकता है। इसी तरह आदमी के मामले में उसके आस-पास का समाज, उसकी वंश-परम्परा, उसके नाते-रिश्ते के लोग, उसके दोस्त-यार, इन सबको मिला कर ही वह आदमी है। इस तरह वातावरण का भी योगदान होता है। इस तरह की विस्तृत दृष्टि चाहिए।तब जाकर ही साहित्य बनता है।
उसी दिन से मोपासां ने उन्हें अपना गुरु बनाकर उनके सूत्रों का अनुसरण कर एक महान् लेखक बने।

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समझ कैसे बढ़ाना व समझदार कैसे होना ?

 

सबकी परस्पर भूमिका जान कर जीने से समझ बढ़ती है । मात्र मानने से नही जानने से समझ बढ़ती है । किसी परम्परा, शास्त्र, व्यक्ति द्वारा मेरी समझ नहीं बढ़ाई जा सकती है ।जांचने  की विधि अपने अनुभव से जानना समझ है । मात्र मुझे ही इन सब सूचनाओं को परे रख कर स्वयं जांचना पड़ेगा कि मान्यताऐं सही है या नहीं । स्वयं अपने तई जानी गई बातें ही जानना है । मेरा जानने में ही समझ है । मानना परतन्त्रता है । मानना संवेदनाओं के अधिन है । यह बेहोशी है । उनसे स्वयं के वैभव को प्राप्त नहीं किया जा सकता । विवेक, ज्ञान, विज्ञान एवं जानना समझ के ही रूप है । यह व्यक्ति, शास्त्र व उपकरण पर आधारित न होकर सहज स्वीकृति से होता है ।
समझदार कैसे होना ?
व्यवस्था, न्याय व मानव को जान कर मानना है । अस्तित्वगत सच्चाई-प्रकृति के सत्य को जानना है । इसके प्रति सचेत होना है कि व्यवस्था चारों अवस्थाओं के अनुरूप जीने में है । इस चक्र में अपनी भूमिका अनुरूप जीना है । इस चक्र में बाधा नहीं बनना है । अपने कृत्य, व्यवहार व सोच व्यवस्था अनुकूल हो । अपने निजी लाभ हेतु व्यवस्था में विघ्न नहीं पैदा करना है ।
विनीशजी को आप समझदार क्यों मानते हंै ? उनके जीवन में वे सार्वभौम-प्राकृतिक व्यवस्था अनुरूप जीते हैं । सभी के साथ सम्बन्ध जानने के कारण न्यायपूर्ण आचरण करते हैं । धन इकट्ठा कर समृद्ध नहीं होना चाहते चूंकि स्वयं को पूर्ण मानते हैं । धन से अधिक सुविधाएं खरीद कर स्वयं को सुरक्षित रखना नहीं चाहते हैं । अपने प्रति आश्वस्त है । भय-प्रलोभन से कार्य नहीं करते हैं ।

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