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मीठा खाने का नशा कोकेन से ज्यादा नशीला व हानिकारक

शक्कर एक तरह का जहर है जो कि मूख्यतः मोटापे, हृदयरोग,सभी तरह के दर्द व कैंसर का कारण है । भारतीय मनीषा ने भी इसे सफेद जहर बताया है । डाॅ0 मेराकोला ने इसके विरूद्ध बहुत कुछ लिखा है । डाॅ0 बिल मिसनर ने इसे प्राणघातक शक्कर-चम्मच से आत्महत्या बताया है । डाॅ0 लस्टींग ने अपनी वेब साईट डाॅक्टर में इसे विष कहा है । रे कुर्जवले इस सदी के एडिसन जो कि 10 वर्ष अतिरिक्त जीने अपने वार्षिक भोजन पर 70 लाख रूपया खर्च करते हैं ने अपने आहार में अतिरिक्त चीनी लेना बन्द कर दी है ।

अधिक शक्कर से वजन व फेट दोनों बढ़ते हैं । डाॅ0 एरान कैरोल तो स्वीटनर से भी चीनी को ज्यादा नुकसानदेह बताते हैं । चीनी खाने पर उसकी आदत नशीले पदार्थ की तरह बनती है । प्राकृतिक शर्करा जो फल व अनाज में तो उचित है । sugar is poision
हम जो चीनी बाहर से भोजन बनाने में प्रयोग करते हैं वह विष का कार्य करती है । यह शरीर के लिए घातक है । डिब्बाबन्द व प्रोसेस्ड फूड में चीनी ज्यादा होती है उससे बचे । अर्थात् पेय पदार्थ व मिठाईयांे के सेवन में संयम बरतना ही बेहतर है।

चीनी के विकल्प
आप जितनी कम चीनी खाएंगे, उतने ही स्वस्थ रहेंगे। मधुमेह पीडि़तों को चीनी का कम सेवन करना चाहिए। प्राकृतिक मिठास जैसे फल, अंजीर का सेवन करें। स्वस्थ लोग चीनी की बजाय गुड़, शहद, खजूर व फलों का सेवन करें। इससे चीनी की तुलना में खून में शुगर का स्तर कम तेजी से बढ़ता है। शहद चीनी का बेहतर व पोषक विकल्प है।
चीनी के कृत्रिम विकल्पों में स्टेविया,  प्रमुख हैं। स्टेविया सामान्य चीनी से 300 गुना अधिक मीठी है, पर इसके सेवन से खून में शर्करा का स्तर अधिक नहीं बढ़ता।
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चैत्र नवरात्रि में नीम रस क्यों पीना चाहिए ?

चैत्र माह में गर्मी प्रारम्भ हो जाती हैl मौसम परिवर्तन के कारण अनेक रोग हो जाते हैl इनसे बचाव  के लिए आयुर्वेद में  प्रातः भूखे  पेट नौ दिन नीम रस पिने का  विधान हैl

नीम के बारे में हमारे ग्रंथों में कहा गया है-

निम्ब शीतों लघुग्राही कटुकोडग्रि वातनुत।

अध्यः श्रमतुट्कास ज्वरारुचिकृमि प्रणतु॥ 

नीम शीतल, हल्का, ग्राही पाक में चरपरा, हृदय को प्रिय, अग्नि, वात, परिश्रम, तृषा, ज्वर अरुचि, कृमि, व्रण, कफ, वमन, कुष्ठ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करता है। नीम में कई तरह के लाभदायी पदार्थ होते हैं।

  • नीम जूस मधुमेह रोगियों के लिये भी फायदेमंद है। अगर आप रोजाना नीम जूस पिएंगे तो आपका ब्लड़ शुगर लेवल बिल्कुल कंट्रोल में हो जाएगा।
  • नीम के रस की दो बूंदे आंखो में डालने से आंखो की रौशनी बढ़ती है और अगर कन्जंगक्टवाइटिस हो गया है, तो वह भी जल्द ठीक हो जाता है।
  •  शरीर पर चिकन पॉक्स के निशान को साफ करने के लिये, नीम के रस से मसाज करें। इसके अलावा त्वचा संबधि रोग, जैसे एक्जिमा और स्मॉल पॉक्स भी इसके रस पीने से दूर हो जाते हैं।
  •  नीम एक रक्त-शोधक औषधि है, यह बुरे कैलेस्ट्रोल को कम या नष्ट करता है। नीम का महीने में 10 दिन तक सेवन करते रहने से हार्ट अटैक की बीमारी दूर हो सकती है।
  •  मसूड़ों से खून आने और पायरिया होने पर नीम के तने की भीतरी छाल या पत्तों को पानी में औंटकर कुल्ला करने से लाभ होता है। इससे मसूड़े और दाँत मजबूत होते हैं। नीम के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से भी इसमें लाभ होता है। नीम का दातुन नित्य करने से दांतों के अन्दर पाये जाने वाले कीटाणु नष्ट होते हैं। दाँत चमकीला एवं मसूड़े मजबूत व निरोग होते हैं। इससे चित्त प्रसन्न रहता है।
  •  नीम के रस का फायदा मलेरिया रोग में किया जाता है।
  • नीम वाइरस के विकास को रोकता है और लीवर की कार्यक्षमता को मजबूत करता हैl

स्वास्थ्य सेतु में प्रातः नीम रस सुबह 7 बजे उपलब्ध है,आप पीने पधारेl

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रोग मुक्त होने व विष मुक्त होने:ऑयल पुलिंग

मुहं में तेल का कुल्ला करने से शरीर के टोक्सिंस बाहर निकल जाते हैंl यह एक आयुर्वेदिक विधि है जिसे विज्ञान भी स्वीकारता हैंl डॉ .कराच जिन्होंने आयल-पुलिंग पर एक विस्तृत शोध किया है उन्होंने पाया है कि आयल-पुलिंग के बाद निकले एक बूंद थूक में जीवाणुओं के लगभग 500 प्रजातियाँ बाहर आ जाती हैं ,अर्थात शरीर से जीवाणुओं को बाहर करने में आयल-पुलिंग थेरेपी बड़ा ही कारगर होती है lब्रुश फाईफ ने “Oil Pulling Therapy: Detoxifying and Healing the body through Oral Cleansing” नाम से एक पुस्तक लिखी है जिसमे इसके लाभ बताएं हैl

एक चम्मच सुरजमुखी /नारियल /तिल्ली का तेल मुहं में भर कर १५ मिनट तक घुमाएँl इस तेल की एक भी बूंद निगलनी नहीं हैlप्रयोग के आधा घंटा पूर्व व आधा घंटा बाद तक कुछ लेना नहीं हैl आमतौर पर फायदे के लिए आॅयल पुलिंग तकनीक को कम से कम लगातार चालीस से पचास दिनों तक प्रयोग में लाये जाने के आवश्यकता होती हैl

आयल-पुलिंग के लाभ :-

*यह तकनीक एलर्जी को दूर करने में कारगर है !
*दमे के रोगीयों में भी इसे लाभकारी पाया गया है !
* उच्चरक्तचाप के रोगियों में भी इसे फायदेमंद देखा गया है !
*कब्ज ,माइग्रेन एवं इन्सोमनीया जैसी अवस्था में भी इस तकनीक का प्रयोग लाभकारी है l
* मसूड़ों और दाँतों से समबन्धित समस्याओं में इस तकनीक के तत्काल फायदे को महसूस किया जा सकता हैl

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शौच करने का सही तरीका ताकि बवासीर,लकवा व दांतों के रोग ना हो

विधिपूर्वक शौच करने से दातों के रोग नहीं होते हैl  उषःपान(प्रातः जल सेवन) के बाद कुछ देर घुमने से मलत्याग सरलता से होता हैl

विधि:

भारतीयशैली के टॉयलेट का उपयोग करें l  शौच  हेतु  उकड़ू आसन में बैठेl  पश्चिमी शैली की टॉयलेट के प्रयोग में मलद्वार पूरा नहीं खुलता है नहीं पेट पर दबाव पड़ता हैlशौच करने का सही तरीका

दोनों हाथ ठुड्डी को पकडे रहे व दांत भींच कर रखे l  शौच या पेशाब के समय दांतों के जबड़ों को आपस में दबाकर रखने से दांत मजबूत रहते हैं।

मल छोड़ते वक्त दांतों को और भींचे और श्वास फेकेंl

शौच करते वक्त मुहं बंद रखे l  तत्समय पढ़ना – बोलना उचित नहीं हैl

सहजता से मलत्याग न होने पर कुछ लोग जोर लगाकर शौच करते हैं किंतु ऐसा करना ठीक नहीं हैl

मल आपके स्वास्थ्य को दर्शाता है, बहुत सूखा या पतला, दुर्गन्धयुक्त, चिपचिपा, रक्त या  सफ़ेद झाग युक्त मल रोग को दर्शाता हैl

 

इजरायली शोधकर्ता डॉ. बेरको सिकिरोव ने अपने शोध के निष्कर्ष में पाया कि सिटिंग मेथड कब्जियत का करण बनती है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्यागने के लिए लगभग तीन गुना अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिसके कारण चक्कर और हृदयतंत्र की गड़बड़ियों के कारण लोग मर जाते हैं।

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मैग्नीशियम की कमी दूर कर अधिकांश रोगों को भगाए

मांसपेशियों व जोड़ों के दर्द का कारण : मैग्नीशियम की कमी

अच्छे स्वास्थ्य के लिए मैग्नीशियम बहुत आवश्यक खनिज तत्व है। सम्पूरक के रुप  में मैग्नीशियम लिया जाना जरूरी है l यह चौथा सबसे प्रचुर मात्रा में खनिज शरीर में पाया जाता  है मैग्नीशियम ह्यूमन सेल का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो बॉडी में 300 से भी ज्यादा एंजाइम्स को रेगुलेट कर हमें हेल्दी बनाता है। साथ ही सल्फेट ब्रेन टिशू बनाने में रोल निभाता है और बॉडी में न्यूट्रिएंट्स के एब्जॉर्प्शन को तेज करता है। ये बॉडी से हानिकारक तत्वों को भी निकालता है। डॉ  नार्मन शेअली जो की दर्द प्रबंधन के विशेषज्ञ है ने लिखा है कि  वृधावस्था सम्बन्धित सभी रोगों की जड़ में मैग्नीशियम की कमी होना हैl

शरीर में कैल्शियम और विटामिन सी का संचालन, स्नायुओं और मांसपेशियों की उपयुक्त कार्यशीलता और एन्जाइमों को सक्रिय बनाने के लिये मैग्नेशियम आवश्यक है। कैल्शियम-मैग्नेशियम सन्तुलन में गड़बड़ी आने से स्नायु-तंत्र दुर्बल हो जाता है। मांसपेशियों में खिंचाव,एंठन, शुन्यता, झनझनाहट का कारण मैग्नीशियम की कमी हैl रक्त नलिकाओं एवं स्न्नायुओं में जकड़न, दर्द  एवं असुविधा का कारण भी इसकी कमी हैl मैग्नेशियम के निम्न स्तरों और उच्च रक्तचाप में स्पष्ट अंतर्संबंध स्थापित हो चुका है। निम्न मैग्नेशियम स्तर से मधुमेह भी हो सकता है। यूरोलोजी जर्नल की एक रिर्पोट के अनुसार मैग्नेशियम और विटामिन बी६ गुर्दे और पित्ताशय की पथरी के खतरे को कम करने में प्रभावी थे। कठोर दैहिक व्यायाम शरीर के मैग्नेशियम की सुरक्षित निधि को क्षय कर देते है और संकुचन को कमजोर कर देते हैl थकान भी इसकी कमी से होती हैlव्यायाम एवं शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों को मैग्नेशियम सम्पूरकों की आवश्यकता है।

शरीर में मैग्नीशियम के घटते स्तर के कारण तेज़ सिर दर्द होने के आसार रहते हैं लगातार इस तरह की कमी बनी रहने से माइग्रेन का दर्द होता हैl यह विशेषकर महिलाओं में देखा जाता है. यही नहीं महिलाओं में पीरियड के दौरान भी इस तरह का दर्द देखा जाता है. पीरियड के दौरान यदि मैग्नीशियम से भरपूर डाइट ली जाए तो दर्द दूर हो जाता हैl

ज्यादातर सभी खाद्य पदार्थों में मैग्नीशियम आसानी से उपलब्ध  होता हैl साबुत अनाज, फल,हरी पत्तेदार सब्जियां,नट्स,फलियां सेम जैसे शाकाहारी स्रोतों में  खूब होता  हैं l मटर, नट और बीज, टोफू, सोयाबीन का आटा, बादाम, काजू, केला ,कद्दू, अखरोट और पूरे अपरिष्कृत अनाज भी मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।

मैग्नीशियम एक खनिज लवण है जिसे  भोजन नली पचा नहीं पाती हैl लेकिन त्वचा द्वारा इसका अवशोषण अच्छा हो जाता हैlमैग्नीशियम को लेने का सबसे सरल तरीका १०० gm  मेग्नीसियम  क्लोराइड को ५०० मिलीलीटर पानी में घोल ले l  इसे कांच की बोतल में भर लेl मैग्नीशियम क्लोराइड किसी भी लेब  के केमिकल  बेचने वाले की दुकान पर मिल जाएगा l इस घोल की मालिश भी त्वचा पर  २० मिनट तक करने से लाभ होता हैl  उक्त घोल का स्प्रे भी नहाने के बाद अपने शरीर पर मल सकते है l फिर खाने के आधे घंटे के बाद एक  चम्मच ले l इस तरह मैग्नीशियम की कमी पूरी कर हम स्वस्थ रह सकते हैंl

डॉ मार्क साइरस ने  अपनी पुस्तक ‘ट्रान्सडर्मल  मैग्नीशियम थेरेपी’ में लिखा है कि डॉक्टर्स का  ध्यान इस  पर है लेकिन वे रोगों के इलाज में रूचि रखते है, स्वस्थ रखना उनका पेशा नही हैl

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स्वस्थ रहने हेतु जम कर ताली बजाए

ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है l यदि प्रतिदिन यदि नियमित रूप से ताली बजाई जाये तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। ताली बजाने से पहले हमें सरसों या नारियल का तेल अपने हाथों पर लगा लेना चाहिए।

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डॉ. डोगरा के मुताबिक, इस थेरेपी के लिए सुबह का समय सर्वोत्तम है। सुबह-सुबह 20-30 मिनट तक ताली बजाने से आप स्वस्थ और सक्रिय रहेंगे। फिर किसी हठयोग या आसनों की जरूरत नहीं रहेगी। यदि दिन भर  में लगभग 1500 बार ताली बजाये  तो हम बिल्कुल स्वस्थ रहते हैं।

ताली बजाना मात्र एक  व्यायाम नहीं हैl ताली बजाने से हमारे दोनों हाथों के बिंदु दब जाते हैं जिसके कारण हमारे शरीर को बहुत ही लाभ पहुंचता है।एक्युप्रेशर विज्ञान के अनुसार हाथ की हथेलियों में शरीर के समस्त अंगों के संस्थान के बिंदू होते हैं। जब ताली बजाई जाती है तब इन बिन्दुओं पर बार-बार दबाब यानिप्रेशर पड़ता है जिससे शरीर की समस्त आन्तरिक संस्थान में उर्जा जाती है और सभी अंग अपना काम सुचारू रूप में करने लगते हैं।

ताली बजाने से शरीर के विकार खत्म होते हैं और वात, कफ और पित्त का संतुलन ठीक तरह से बना रहता है। मानसिक तनाव, चिंता और कब्ज के रोग भी ताली बजाने से खत्म होते हैं।लगातार ताली बाजाने से आपका शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है। जिससे कोई भी बीमारी आसानी से शरीर को नहीं लगती है।ताली बजाने से शरीर स्वस्थ और निरोग रहता है।

जब भी हम लगातार ताली बजाते हैं तो हमारे ब्लड में कोलेस्ट्रॉल कम होता है जिससे हमें हार्ट का खतरा कम रहता है। इस प्रकार की ताली बजाने से कब्ज, एसिडिटी, मूत्र, संक्रमण, खून की कमी व श्वांस लेने में तकलीफ जैसे रोगों में लाभ पहुंचता है।

जब हम लगातार ताली बजाते हैं, तो हमारी ऑक्सीजन का फ्लो सही तरीके से काम करता है, हमारे फेफड़ों में ऑक्सीजन सही तरीके से पहुंचती है, जिसके कारण हम हेल्दी रहते हैं। इसके अलावा हृदय रोग, मधुमेह, अस्थमा, गठिया आदि बीमारियों से हमें राहत मिलती हैl शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बीमारियों से बचने के लिए भी क्लैपिंग करनी चाहिए।कहा तो यहां तक जाता है कि कीर्तन के समय हाथ ऊपर उठा कर ताली बजाने  में काफी शक्ति होती है। इससे हमारे हाथों की रेखाएं तक बदल जाती हैं।

ताली बजाने से बच्चों का दिमाग तेज़ होता है।  जब बच्चे लगातार ताली बजाते हैं तो उनकी लिखावट साफ हो जाती है।

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आम नाशक चूर्ण : पाचन से जुड़े विषों के निष्कासन हेतु

प्रतिदिन भोजन के बाद एक चम्मच निम्न  चूर्ण लेने से  पाचन ठीक होता है एवं शरीर में व्याप्त सारे टोक्सिंस  बाहर निकल जाते है l    निम्न घटकों  मात्रा  अनुसार कूट पिस कर चूर्ण तैयार कर ले lआम पाचक चूर्ण

२० gm पुदीना

२० gm सौंफ

२० gm मिश्री

10 gm धनिया

10 gm सौंठ

10 gm जीरा

10 gm छोटी हरड

(  आभार  आर एस  बोहरा  -स्वास्थ्य सेतु)

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