योग का पूरा लाभ उठाने षट्कर्म अति आवश्यक

हठयोग के अनुसार योग का प्रथम चरण षट्कर्म – नेति ,धौति,बस्ति,नौली,कपाल भाति एवं त्राटक हैlआसन प्राणायाम करने का पूरा लाभ शारीरिक व मानसिक शुद्धी पर ही मिलता हैl
नेति द्वारा नासिका को,धौति द्वारा पाचन तंत्र को ,बस्ति द्वारा उत्सर्जन तंत्र को ,कपाल भाति द्वारा मस्तिष्क को शुद्ध एवं त्राटक द्वारा मन की चंचलता को कम किया जाता हैl

काम, क्रोध, लोभ, द्वेष इत्यादि मानसिक मलिनताएँ शरीर के अंदर विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं। अशुद्ध भावनाओं के कारण प्राणों में असंतुलन हो जाता है। शरीर के विभिन्न अवयव इससे प्रभावित हो जाते हैं। तंत्रिकातंत्र दुर्बल हो जाता है। इसलिए शरीर को स्वस्थर और शक्तिशाली बनाने के लिए मानसिक मलिनताओं को दूर करना आवश्यक है।

भय से हृदय रोग होता है। दु:ख से तंत्रिकातंत्र असंतुलित हो जाता है। निराशा से दुर्बलता होती है। लोभ प्राणों को असंतुलित करता है जिससे अनेक प्रकार के शारीरिक रोग उत्पन्न होते हैं। अहंकार जीवन की पूर्णता का आनंद नहीं लेने देता। इससे पाचनतंत्र तथा किडनी संबंधी रोग होते हैं। अधिकांश बीमारियाँ रोगी की मानसिक विकृतियों के ही कारण हुआ करती हैं।

इसी प्रकार ध्यान से संपूर्ण शरीर में प्राणों का प्रवाह निर्बाध गति से संचारित होता है।
शारीरिक ,मानसिक व भावनात्मक शुद्धी षट्कर्म से होती है जो की आसन प्राणायाम का पूरा लाभ लेने के लिए जरूरी हैl तभी कहा जाता है की हठयोग के बिना राजयोग को प्राप्त नहीं किया जा सकता हैl

शवासन सबसे कठिन व सबसे महत्वपूर्ण आसन क्यों व कैसे है?

 

हमारा जीवन तनावग्रस्त होने  से हमारे शरीर व मन खीचें हुए रहते हैl  शवासन में इन दोनों को शिथिल कर विश्राम करते हैl  मन व तन को शिथिल करना बड़ा कठिन है इसलिए शवासन कठिन आसन हैl यह महत्वपूर्ण भी इसीलिए है चुकि इस आसन से जीवन के तनाव कम होते हैl  श्वसन को मंद करने से शांति प्राप्त होती हैl शरीरके एक एक अंग पर ध्यान ले जा कर उसे  शिथिल करना सम्भव है क्योंकि इस निर्देश में  आवेश यानि कोई पूर्वाग्रह नही होता हैl   इससे मांसपेशीया  व आन्तरिक अंग शिथल होते  हैl इसमें जितनी सजगता बढ़ाते है उतनी ही विश्राम की गहराई बढती  जाती हैl शवासन एक कला ही नही एक विज्ञानं भी हैl

डाइबीटीज का स्थाई देशी इलाज

निम्न सात चीजो को अलग अलग कूट पिस कर चूर्ण बन ले lसुबह खाली पेट व सोने से पहले एक चम्मच रोजाना लेl मधुमेह  समय समय पर चेक कराते रहेl
सुखा करेला ———–५०ग्राम
गुडमार       – ———-५०ग्राम
निम्बोली        ———–५०ग्राम
जामुन गुठली ———–५०ग्राम
मेथी           –   ———-५०ग्राम
तेजपत्ता         ———–५०ग्राम
बेलपत्र        ———–2५०ग्राम

इससे मधुमेह  हमेशा के लिए समाप्त हो जाता हैl

खोए हुए हम खुद है और खोज रहे है भगवान को,सोए हुए हम खुद है और जगा रहे भगवान को

 हमें  अपना तो कुछ  पता नहीं और परमात्मा का पता करना चाहते है,यही विडम्बना हैl सामने पड़े पत्थर को जानते नहीं और विराट में समाये प्रभु को पाने चले हैl  प्रार्थना की जरूरत हमें है,उससे हमारे भीतर शक्ति जगती हैl परमात्मा को हमारी प्रार्थना की आवश्यकता नहीं है l परमात्मा हमारे भीतर है,किसी मूर्ति में छिपा हुआ नहीं हैl खुद को तराशने की आवश्यकता हैl मूर्ति  पूजा उसमे सहायक हो सकती है यदि पूजा समझ के की जाय l

 

 

 

कर्म कांड में डूबा हुआ व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त नहीं कर सकता हैlअपने को स्वीकार कर इस क्षण जीने में ही उपलब्धी हैl वर्तमान में जीना ही परम जीवन को पाना है,परमात्मा को उपलब्ध होना हैl  जीवन अन्यत्र  कहीं नहीं ,जीवन अभी और यही हैl

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मैग्नीशियम की कमी दूर कर अधिकांश रोगों को भगाए

मांसपेशियों व जोड़ों के दर्द का कारण : मैग्नीशियम की कमी

अच्छे स्वास्थ्य के लिए मैग्नीशियम बहुत आवश्यक खनिज तत्व है। सम्पूरक के रुप  में मैग्नीशियम लिया जाना जरूरी है l यह चौथा सबसे प्रचुर मात्रा में खनिज शरीर में पाया जाता  है मैग्नीशियम ह्यूमन सेल का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो बॉडी में 300 से भी ज्यादा एंजाइम्स को रेगुलेट कर हमें हेल्दी बनाता है। साथ ही सल्फेट ब्रेन टिशू बनाने में रोल निभाता है और बॉडी में न्यूट्रिएंट्स के एब्जॉर्प्शन को तेज करता है। ये बॉडी से हानिकारक तत्वों को भी निकालता है। डॉ  नार्मन शेअली जो की दर्द प्रबंधन के विशेषज्ञ है ने लिखा है कि  वृधावस्था सम्बन्धित सभी रोगों की जड़ में मैग्नीशियम की कमी होना हैl

शरीर में कैल्शियम और विटामिन सी का संचालन, स्नायुओं और मांसपेशियों की उपयुक्त कार्यशीलता और एन्जाइमों को सक्रिय बनाने के लिये मैग्नेशियम आवश्यक है। कैल्शियम-मैग्नेशियम सन्तुलन में गड़बड़ी आने से स्नायु-तंत्र दुर्बल हो जाता है। मांसपेशियों में खिंचाव,एंठन, शुन्यता, झनझनाहट का कारण मैग्नीशियम की कमी हैl रक्त नलिकाओं एवं स्न्नायुओं में जकड़न, दर्द  एवं असुविधा का कारण भी इसकी कमी हैl मैग्नेशियम के निम्न स्तरों और उच्च रक्तचाप में स्पष्ट अंतर्संबंध स्थापित हो चुका है। निम्न मैग्नेशियम स्तर से मधुमेह भी हो सकता है। यूरोलोजी जर्नल की एक रिर्पोट के अनुसार मैग्नेशियम और विटामिन बी६ गुर्दे और पित्ताशय की पथरी के खतरे को कम करने में प्रभावी थे। कठोर दैहिक व्यायाम शरीर के मैग्नेशियम की सुरक्षित निधि को क्षय कर देते है और संकुचन को कमजोर कर देते हैl थकान भी इसकी कमी से होती हैlव्यायाम एवं शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों को मैग्नेशियम सम्पूरकों की आवश्यकता है।

शरीर में मैग्नीशियम के घटते स्तर के कारण तेज़ सिर दर्द होने के आसार रहते हैं लगातार इस तरह की कमी बनी रहने से माइग्रेन का दर्द होता हैl यह विशेषकर महिलाओं में देखा जाता है. यही नहीं महिलाओं में पीरियड के दौरान भी इस तरह का दर्द देखा जाता है. पीरियड के दौरान यदि मैग्नीशियम से भरपूर डाइट ली जाए तो दर्द दूर हो जाता हैl

ज्यादातर सभी खाद्य पदार्थों में मैग्नीशियम आसानी से उपलब्ध  होता हैl साबुत अनाज, फल,हरी पत्तेदार सब्जियां,नट्स,फलियां सेम जैसे शाकाहारी स्रोतों में  खूब होता  हैं l मटर, नट और बीज, टोफू, सोयाबीन का आटा, बादाम, काजू, केला ,कद्दू, अखरोट और पूरे अपरिष्कृत अनाज भी मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।

मैग्नीशियम एक खनिज लवण है जिसे  भोजन नली पचा नहीं पाती हैl लेकिन त्वचा द्वारा इसका अवशोषण अच्छा हो जाता हैlमैग्नीशियम को लेने का सबसे सरल तरीका १०० gm  मेग्नीसियम  क्लोराइड को ५०० मिलीलीटर पानी में घोल ले l  इसे कांच की बोतल में भर लेl मैग्नीशियम क्लोराइड किसी भी लेब  के केमिकल  बेचने वाले की दुकान पर मिल जाएगा l इस घोल की मालिश भी त्वचा पर  २० मिनट तक करने से लाभ होता हैl  उक्त घोल का स्प्रे भी नहाने के बाद अपने शरीर पर मल सकते है l फिर खाने के आधे घंटे के बाद एक  चम्मच ले l इस तरह मैग्नीशियम की कमी पूरी कर हम स्वस्थ रह सकते हैंl

डॉ मार्क साइरस ने  अपनी पुस्तक ‘ट्रान्सडर्मल  मैग्नीशियम थेरेपी’ में लिखा है कि डॉक्टर्स का  ध्यान इस  पर है लेकिन वे रोगों के इलाज में रूचि रखते है, स्वस्थ रखना उनका पेशा नही हैl

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