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सफलता पाने हेतु विश्राम से प्राणऊर्जा कैसे बढ़ाएं?

प्राणऊर्जा प्राप्त करने का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत विश्राम है। हम विश्राम के द्वारा ही स्वयं को संतुलित एवं समायोजित करते है। हम खोई हुई ऊर्जा की प्राप्ति विश्राम से ही करते है। कार्य के दौरान् विश्राम जरुरी है। विश्राम के दौरान् हम अपनी ऊर्जा को संरक्षित व सुरक्षित करते है।

तभी तो योगासन के बाद शवासन कराया जाता है। अन्ततोगत्वा सारी ध्यान विधियाँ विश्राम की ही विधियाँ है। नींद विश्राम का ही एक उपाय है। हम सोने पर तरोताजा होते है। मोक्ष भी एक प्रकार से विश्राम की ही अवस्था का दूसरा नाम है।

विश्राम के उपाय:

  •  कार्य के दौरान भी विश्राम करना आना चाहिये । हम तनाव से ग्रस्त न हों और पूरे दिन काम करने की क्षमता बनी रहे इसके लिए उचित अनुपात में विश्राम जरुरी है। हमारा शरीर और दिमाग अपनी पूरी सामथ्र्य शक्ति तक ठीक ढंग से काम कर पाए इसके लिए सही अनुपात में विश्राम बहुत जरुरी है।इसलिए क्रियाशीलता और विश्राम के बीच एक सही संतुलन बनाए रखना बेहद जरुरी है। हमारा ह्नदय प्रत्येक धड़कन के बाद विश्राम करता है, तभी यह अनेक वर्षों तक हमें जीवित रखता है।नेपोलियन युद्ध के मैदान में भी घोड़े पर बैठे-बैठे विश्राम कर लेता था। तभी वह सबसे बड़ा योद्धा हुआ है। महात्मा गांधी भी दस-पन्द्रह मिनट की नींद लेकर ताजा हो जाते थे।
  •  नींद विश्राम का सबसे बडा स्रोत है । गहरी नींद उसके लिये जरूरी है ।अतः आवश्यक नींद लें ।
  •  प्रकृति के साथ समय बितायें । खुले में शान्ति से धूमे ।
  •  रूचिप्रद कार्य करें ताकि थकान न लगें ।

आज बहुत बड़ी विडम्बना है कि भागदौड भरी जिन्दगीं में मनुष्य विश्राम करना भूल गया है। जल्दबाजी भी विश्राम की शत्रु हैै। आज के अस्सी प्रतिशत व्यक्ति जल्दबाजी के कारण तनाव ग्रस्त है और उसके कारण विश्राम नहीं कर पाते है , उल्टा तनाव बढ जाता है । अतः विश्राम के लिये योजना बना कर समय निकालें । जीवन को उर्जावान बनाये रखनें हेतू इसे प्राथमिकता दें ।

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सफलता पाने हेतु भोजन से प्राणऊर्जा कैसे प्राप्त करें?

सफलता पाने हेतु प्राणऊर्जा कैसे विकसित करें?

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सफलता पाने हेतु भोजन से प्राणऊर्जा कैसे प्राप्त करें?

यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हम जन्म से भोजन करते है लेकिन यह नहीं जानते है कि कब खाना, कितना खाना और क्या खाना है।

एक बार अरस्तु से उसके शिष्य ने पूछा, ‘‘सफलता का रहस्य क्या है ?’’ अरस्तु ने जवाब दिया, ‘‘सफलता का रहस्य मुँह में है।’’ शिष्य ने फिर पूछा, ‘‘कैसे?’’ तब गुरु ने बताया, ‘‘अपने आहार पर ध्यान दो और सफल होओ।’’जब आपका आहार संतुलित, पोैष्टिक व हल्का होगा तो आपकी कार्य क्षमता स्वतः ही बढ़ जाएगी। एवं जब आप गरिष्ठ व अधिक भोजन करते है तो आलस्य आपको घेर लेता है, तब आपकी कार्य क्षमता घट जाती है। इसलिए सफल होने में आहार की बड़ी भूमिका है। अच्छा आहार हमें प्राणवान बनाता है। तामसिक व अत्यधिक भोजन से व्यक्ति प्रमादी हो जाता है।

अर्थात् प्राणऊर्जा प्राप्त करने का दूसरा स्रोत है भोजन। जब हम बहुत ज्यादा खा लेते हैं या बहुत गरिष्ठ भोजन कर लेते हैं तो थक जाते है। और जिस दिन बहुत हल्का फुल्का खाना खाते हैं जैसे फल-सलाद वगैरह, उस दिन हल्का लगता है? पहली स्थिति में भारीपन और आलस्य महसूस होता है और दूसरी अवस्था में शरीर हल्का व ऊर्जायुक्त रहता है। तभी तो कहां जाता है कि जैसा खावे अन्न वैसा होवे मन। सात्विक आहार हमारी क्रियाशीलता को बढ़ाते है। मांसाहारी खाने की तुलना में शाकाहारी भोजन हमारे शरीर के लिए ज्यादा उपयुक्त है, और जल्दी पच भी जाता है। मनुष्य की पाचन प्रणाली शाकाहारी भोजन पचाने में अधिक उपयुक्त है। उदाहरण के लिए हमारे दाँत और हमारी लंबी अंतडि़यां शाकाहारी भोजन खाने और पचाने के लिए बनाई गयी हैं। बहुत ज्यादा पका हुआ या बासी खाने की तुलना में ताजा कच्चा भोजन ज्यादा प्राणयुक्त है।

प्रातः ऊर्जा युक्त नाश्ता लेना दिन भर क्रियाशील रहने के जिए जरुरी है। जैविक नाश्ता सर्वोंत्तम है। नाश्ते में अंकुरित अनाज व फल लें। तली-गली चीजें न लें। शाम का भोजन हल्का होना चाहिए। तभी तो कहावत है कि सम्राट की तरह नाश्ता करो, राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन करो एवं भिखारी की तरह शाम का भोजन करो।

अमरीकी स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए हमें ताजा फल और सब्जियां हर रोज खानी चाहिए और तला हुआ भोजन कम से कम और रेशायुक्त भोजन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। भोजन पर यदि हम थोड़ा सा ध्यान दें तो हम अपनी प्राणशक्ति उच्च स्तर पर बनाए रख सकते हैं।

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सफलता पाने हेतु प्राणऊर्जा कैसे विकसित करें?

जीवन ऊर्जा का क्रीड़ा स्थल है। सफलता पाने के लिए हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा पाने के मुख्य चार स्र्रोत है।
1. ज्ञान
2. भोजन
3. विश्राम
4. साँस
ज्ञान से भी ऊर्जा मिलती है। जब हमारा मन नकारात्मक विचारों जैसे चिंता और भय आदि से भरा होता है तो थकान महसूस होती है? तब प्राणशक्ति का स्तर भी नीचे गिर जाता है और जब मन सकारात्मक विचारों जैसे प्रेम, उत्साह, खुशी से भरा होता है तब प्राणशक्ति भी बढ़ जाती है और हम अपने आपको ज्यादा फुर्तीला महसूस करते हैं। नकारात्मक विचार हमारी ऊर्जा को चूस लेते हैं और हम बिल्कुल थका हुआ महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए अगर हम एक घंटे या उससे ज्यादा समय के लिए सिर्फ शिकायत करें या किसी और के बारे में नकारात्मक बात करें तो हम पाएंगे कि शरीर से ऊर्जा का ह्यस हो रहा है, थकान सी लगने लगेगी लेकिन जब हम ज्ञानवर्धक बातेें सुनते हैं-जैसे कोई प्रवचन या कविता या गीत उसी समय हम अपने आपको उत्साहित और प्रफुल्लित हो जाते है। जब हम गहन ज्ञान का अनुभव करते हो जैसे कि ध्यानावस्था में तब शरीर और दिमाग दोनो ही पूर्ण रूप से ऊर्जायुक्त रहेेंगे और प्राणशक्ति का विकास होगा।

                                                                                                                     (To be continued…..)