२४ घंटे ॐ साधना :अंतर्यात्रा की दिशा में एक कदम

गृहप्रवेश के पूर्व बेंगलोर में २४ घंटे अखंड जप अक्षय तृतीया पर करने का अवसर मिलाl पहली बार इस तरह की साधना की l एक मित्र ने वहाँ पर नकारात्मकता शक्ति  होने की बात बताई थी lप्रारम्भ में बहुत उत्साह था लेकिन भीतर डर भी था की पूरी कैसे करेंगे l घी का दीपक कर मीना और मैंने निरन्तर २४ घंटा तक ॐ का जप किया l

चारो तरफ सकारात्मक बढ़ी l घर में डर समाप्त हुआ l रात्रि में सघन नीद आने लगी l इसके जप  से शारीरिक ,मानसिक व आध्यात्मिक शांति महसूस हुई lइससे चेतना में नई ऊर्जा  व सक्रियता का बोध  हुआ l  एकाग्रता बढ़ी l थकान,बैचेनी ,निराशा  एवं आलस्य घटा lबहुत सुखद परिणाम आये

 

एसिडिटी और श्वशन रोगों से बचने कुंजल करें

हठयोग के षट्कर्म में से एक कुंजल क्रिया है जिसमे कुनकुना पानी पीकर उसे मुहं के द्वारा पुनः निकालना होता हैl 4 से 6 गिलास पानी बिना रुके पी कर उसे निकालते है l  एक लीटर पानी में एक चम्मच सेंधा नमक  मिलाते  है lमुहं में अनामिका व मध्यमा अंगूली डालकर  जीभ के निचे रगड़ते है इससे पानी बाहर आ जाता है , न आये तो 60 डिग्री पर धड को झुकाए व दूसरे हाथ से पेट को दबाने से पानी बाहर आ जाता है l  इससे आमाशय ,गला व श्वशन तंत्र में चिपका श्लेष्मा,कफ व बलगम साफ हो जाता है l आमाशय में जमा पित्त बाहर आ जाता हैl

ध्यान को गहरा करने में त्राटक साधना सहायक है

ध्यान एकाग्रता नहीं है बल्कि ध्यान का परिणाम एकाग्रता हैl त्राटक मन को एकाग्र करता है इससे हम अपने पास आने लगते हैl इसलिए त्राटक करने से ध्यान गहरा होता हैl
हम सामान्यत: जाग्रत अवस्था में इन्द्रियजन्य आंकड़ो के प्रवाह में खोये रहते हैl इसके साथ ही अवचेतन से आते विचार और भाव भी हमें प्रवाहमान रखते हैl त्राटक का अभ्यास मन के इस विखंडन एवं बिखराव को रोकता हैl

त्राटक करने की विधि


सबसे सरल व श्रेष्ठ विधि मोमबत्ती या दीपक की ज्योति को अपलक देखना हैl

प्रारम्भ में 2 से ३ मिनट्स देखना हैl बाद में आँखे बंद कर भ्रूमध्य में इस की छवि को देखना ,इससे मन की अतीन्द्रिय शक्तियाँ विकसित होती हैl

 

सावधानी

शरीर को शिथिल व स्थिर रखते हुए आँखों को भी विश्राम में रखना हैl

क्या आप कृष्ण से कम भाग्यशाली है!

योगेश्वर कृष्ण

आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर है! इसमें हॅसने की जरुरत नहीं है।

इसके लिए श्री कृष्ण के जीवन से अपने जीवन की परिस्थिति की तुलना करने की जरुरत है।

हमारे में से किसे का जन्म जेल में नहीे हुआ। जबकि योगेश्वर कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था। उनके मां बाप दोनों राजा होकर कंस के वहाँ बन्दी थे। आपके मां बाप आपके जन्म के समय बन्दी तो न थे।

किसी ने तुम्हें स्तनों पर जहर लगाकर दूध तो न पिलाया ? जबकि पूतना ने कृष्ण को मारने के लिए यह किया था। मां बाप के होते हुए कृष्ण यशोदा केे पास पले।हमारे मे से अधिकतर लोगों का पालन पोषण तो हमारी मां ने ही किया है।

बचपन में उन्हें गाय चराने भेजा गया। मुख्यतः हममे से किसी को भी जानवरों को चराने के लिए तो नहीं भेजा गया।

कम से कम आपके मामा आपको मारना तो नहीं चाहते थे ?

कृष्ण को उनकी प्रेमिका राधा बिछुड़ने के बाद शेष जीवन में फिर कभी ना मिली।

राजा होकर महाभारत के युद्ध में अर्जुन का रथ संचालन करना पड़ा। आज की भाषा में कहे तो वाहन चालक की भूमिका निभानी पड़ी। फिर चिन्ता की क्या बात है।

हुई न आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर ।इसे सदैव यद् रखे l

विपरीत परिस्थितियों के होते हुए महान् कार्य किये। यदि अपनी आत्म छवि एवं आत्म विश्वास है तो आप भी अपना सोचा प्राप्त कर सकते है। आपकी आत्म छवि ही आपको सफलता व सुख दिला सकती है।

कृतज्ञता को महसूस कर जीवन बदले,आनन्दित हो

धन्यवाद देना कृतज्ञता ज्ञापन है। कृतज्ञता प्रकट करना विनम्रता व मानवता है। यह बहुत बड़ी नैतिकता है। कृतज्ञता व्यक्त करने से हम बदलते है, हमें खुशी मिलती है।दूसरे का ऐहसान मानते है। यह दूसरे के योगदान को स्वीकारना है। इससे सम्बन्ध मजबूत बनते है।अस्तित्व के प्रति आभार व्यक्त करने से प्राप्ति बढ़ती है। कृतज्ञ होने पर  अस्तित्व दुगुना देता है।ऐसे में यह एक आन्नददायक कृत्य बन जाता है। वाल्मिकी रामायण में लिखा है कि परमात्मा ने जो कुछ दिया है उसके लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करो। लेसिंग ने लिखा है कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता- पूर्ण भावना स्वयं ही एक प्रार्थना है। कृतज्ञता की शक्ति को पहचानिए।कृतज्ञता रूपान्तरण का बड़ा टूल हैl  Related Posts:

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धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे

जीवन एक अनुपम उपहार है