ध्यान को गहरा करने में त्राटक साधना सहायक है

ध्यान एकाग्रता नहीं है बल्कि ध्यान का परिणाम एकाग्रता हैl त्राटक मन को एकाग्र करता है इससे हम अपने पास आने लगते हैl इसलिए त्राटक करने से ध्यान गहरा होता हैl
हम सामान्यत: जाग्रत अवस्था में इन्द्रियजन्य आंकड़ो के प्रवाह में खोये रहते हैl इसके साथ ही अवचेतन से आते विचार और भाव भी हमें प्रवाहमान रखते हैl त्राटक का अभ्यास मन के इस विखंडन एवं बिखराव को रोकता हैl

त्राटक करने की विधि


सबसे सरल व श्रेष्ठ विधि मोमबत्ती या दीपक की ज्योति को अपलक देखना हैl

प्रारम्भ में 2 से ३ मिनट्स देखना हैl बाद में आँखे बंद कर भ्रूमध्य में इस की छवि को देखना ,इससे मन की अतीन्द्रिय शक्तियाँ विकसित होती हैl

 

सावधानी

शरीर को शिथिल व स्थिर रखते हुए आँखों को भी विश्राम में रखना हैl

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क्या आप कृष्ण से कम भाग्यशाली है!

योगेश्वर कृष्ण

आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर है! इसमें हॅसने की जरुरत नहीं है।

इसके लिए श्री कृष्ण के जीवन से अपने जीवन की परिस्थिति की तुलना करने की जरुरत है।

हमारे में से किसे का जन्म जेल में नहीे हुआ। जबकि योगेश्वर कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था। उनके मां बाप दोनों राजा होकर कंस के वहाँ बन्दी थे। आपके मां बाप आपके जन्म के समय बन्दी तो न थे।

किसी ने तुम्हें स्तनों पर जहर लगाकर दूध तो न पिलाया ? जबकि पूतना ने कृष्ण को मारने के लिए यह किया था। मां बाप के होते हुए कृष्ण यशोदा केे पास पले।हमारे मे से अधिकतर लोगों का पालन पोषण तो हमारी मां ने ही किया है।

बचपन में उन्हें गाय चराने भेजा गया। मुख्यतः हममे से किसी को भी जानवरों को चराने के लिए तो नहीं भेजा गया।

कम से कम आपके मामा आपको मारना तो नहीं चाहते थे ?

कृष्ण को उनकी प्रेमिका राधा बिछुड़ने के बाद शेष जीवन में फिर कभी ना मिली।

राजा होकर महाभारत के युद्ध में अर्जुन का रथ संचालन करना पड़ा। आज की भाषा में कहे तो वाहन चालक की भूमिका निभानी पड़ी। फिर चिन्ता की क्या बात है।

हुई न आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर ।इसे सदैव यद् रखे l

विपरीत परिस्थितियों के होते हुए महान् कार्य किये। यदि अपनी आत्म छवि एवं आत्म विश्वास है तो आप भी अपना सोचा प्राप्त कर सकते है। आपकी आत्म छवि ही आपको सफलता व सुख दिला सकती है।

कृतज्ञता को महसूस कर जीवन बदले,आनन्दित हो

धन्यवाद देना कृतज्ञता ज्ञापन है। कृतज्ञता प्रकट करना विनम्रता व मानवता है। यह बहुत बड़ी नैतिकता है। कृतज्ञता व्यक्त करने से हम बदलते है, हमें खुशी मिलती है।दूसरे का ऐहसान मानते है। यह दूसरे के योगदान को स्वीकारना है। इससे सम्बन्ध मजबूत बनते है।अस्तित्व के प्रति आभार व्यक्त करने से प्राप्ति बढ़ती है। कृतज्ञ होने पर  अस्तित्व दुगुना देता है।ऐसे में यह एक आन्नददायक कृत्य बन जाता है। वाल्मिकी रामायण में लिखा है कि परमात्मा ने जो कुछ दिया है उसके लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करो। लेसिंग ने लिखा है कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता- पूर्ण भावना स्वयं ही एक प्रार्थना है। कृतज्ञता की शक्ति को पहचानिए।कृतज्ञता रूपान्तरण का बड़ा टूल हैl  Related Posts:

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धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे

जीवन एक अनुपम उपहार है

 

थकान मिटाने हेतु हर्बल पेय, सम्मेद शिखर पर जो पिलाते है उसे घर बनाएं

सम्मेद शिखर की यात्रा पर जो पेय  हमें ऊंचाई पर थकान उतारने  कोठी की तरफ से मिलता है,यह रेसिपी उसी से ली हुई हैl वास्तव में यह एक आयुर्वेदिक पेय है जो निम्न मसालों से तैयार करते है । इसके सेवन से सभी प्रकार की थकान तत्काल मिट जाती है । एक पाव हर्बल पेय बनाने हेतु निम्न मात्रा में सामग्री लें ।
1. सौंठ – 60 ग्राम
2. काली मिर्च – 25 ग्राम
3. सौंफ – 25 ग्राम
4. धनिया – 25 ग्राम
5. तेज पता – 25 ग्राम
6. ईलाइची छोटी – 12 ग्राम
7. ईलाइची बड़ी – 12 ग्राम
8. दाल चीनी – 12 ग्राम
9. लौंग – 12 ग्राम
10. अजवाईन – 12 ग्राम
11. जायफल – 3 ग्राम
12. पीपल – 3ग्राम
इन उपरोक्त सामग्री को अलग-अलग कुट पीस कर पाउडर बनाकर फिर मिक्स करे । एक कप पानी में उपरोक्त एक चम्मच मिक्स पाउडर को उबाल कर स्वादानुसार शक्कर मिलावें । इस प्रकार ऊर्जा पेय पिने के लिए तैयार है । यह सम्मेदशिखर की 20 किमी0 पैदल यात्रा करने पर पिलाया जाता है । यात्री थकान उतार कर पुनः 10 किमी0 चलते हैं । यह बढि़या हर्बल चाय है, पीकर लाभ देखें ।

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हँस कर रोगों को भगाए

दुनिया में प्रसन्नता नामक औषधि का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इसके अनुपात मंे ही शेष दवाइयां काम करती है। हँसी मन की गाँठे खोलती है। प्रसन्नता से मतलब केवल शारीरिक हास्य से नहीं है। भीतरी पवित्रता से उबरने वाला प्रसन्न भाव चाहिए। ऐसे मन की अवस्था मंे न भय होता है न शिकायत और न विरोध।
रोगी को हास्यरस प्रधान कविताएं सुनाकर जो चिकित्सा करने की विधि चली, उसका उद्देश्य भी यही सकारात्मक विचारों के लायक विद्युत् प्रवाह को पैदा करना था।
थकान शरीर में अपच, कब्ज जैसी कुछ बीमारियों को उत्पन्न करके मन के जगत् को घबराहट से भर देती है।। अतः इस बात पर विश्वास पैदा करें कि प्रसन्नता एक देवता है, कल्पवृक्ष है, जो मनोवांछित फल प्रदान करती है। तभी तो जोश बिलिंग्स ने लिखा है कि औषधि मंे कोई आमोद-प्रमोद नहीं है, लेकिन आमोद-प्रमोद में औषधि खूब भरी हुई है।
अब तो वैज्ञानिक ढंग से यह प्रमाणित हो गया है कि मानव शरीर स्वयं ही दर्द निवारक एवं तनाव को कम करने वाले हारमोन्स पैदा करता है। हंसने से इण्डोरफिन नामक हारमोन सक्रिय होता है जो एक प्रभावशाली पेन किलर है।

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