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पटकथा कैसे लिखें पर वर्कशाॅपः गौरव पंजवानी, ’सैकण्डमैरीज डाॅट काॅम’ के निर्देशक द्वारा

उदयपुर इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टीवल के क्रम में स्क्रिप्टराईटिंग पर वर्कशाॅप के दूसरें दिन श्री गौरव पंजवानी द्वारा ली गयी । मैने भी इसमे भाग लियज्ञं पंजवानी पहले एड फिल्मे एवं लघु फिल्में बनाते थे । उनकी चर्चित लघू फिल्म फैसपेक नामक है ।
उन्होने प्रारम्भ में बताया कि पटकथा लिखने के कोई नियम नहीं हो सकते है।कभी भी, कहीं भी किसी भी तरहकी स्थिति में लिखि जा सकती है।यह सृजन का कार्य है, इस हेतु लिखनें का मन होना चाहिये । यह नियमो से परे रूचि और सृजन का काम है।
उपन्यास कहानी की जीवनी है ।इसमें विस्तार से बारीक चीजों का वर्णन होता है ।जैसे खिडकी से झांकती लडकी का वर्णन करतें वक्त आकाश मेंबादल, उडती चिडियां, पडोैस में खडा पेड या सडक पर की हलचल की दास्तान भी महत्वपुर्ण है ।अर्थात विस्तार से लिखना चाहिये फिल्मी पटकथा में भी जितना विस्तृत वर्णन होता है,वह उतना ही महत्वपुर्ण है ।
पात्रों को सामान्य से विशिष्ठ बनाय अर्थात लार्जर देन लाईफ। स्टिरियोटाईप पात्रों में कोई विशिष्ठता जोडकर उसमे ंप्राण फुंके ।इसके लिये हमारें पुराण, महाभारत एवं रामायण उपयोगी है ।पात्र एवं धटनाओं को नया रंग देनें की जरूरत है ।
पटकथा के फिल्म निर्माण पर श्रोताओं को उस धटना का एहसास होना चाहिये ।दर्शक हाल भूलकर वहां पहूंच जाना चाहिये ।
पटकथा लिखतें समय विषय या लक्ष्य पर न्याय करना जरूरी है ।पूर ेविषय का खूलासा एवं परिणाम आना चाहिये ।अपनें बीज को पूरा वृक्ष बनाओं ।इसमेंव् यक्तिगत मूल्य बीच में न आनेें दो ।दर्शक का मनोरजंन या स्वयं के सृजन का सूख ध्यानमें रखों। टी.वी. धारावाहिकों की पटकथा लिखनें का अभ्यास इसमें उपादेय है । पटकथा लिखें, पुनर्ःलिखे । जब तक स्वयं सन्तुष्ठ न हो जाये संशोधन करते रहे । यह अभ्यास तकनिकी बारिकीयां सिखा देगा
ं व्यवसायिक सिनेमा के साथ-2 अब कला फिल्मों के भी दर्शक बढे हैं ।
फार्मूला िफल्में ही सिर्फ नहीं चलती है ।सिनेमा में नये प्रयोग करनें के अवसर बढे है ।अतः नई लहर पैदा करें ।

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पटकथा कैसे लिखें पर वर्कशाॅपः सुभाषकपूर ’फॅस गए ओबामा’ के निर्देशक द्वारा

उदयपुर इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टीवल के क्रम में स्क्रिप्ट राईटिंग पर वर्कशाॅप दिनांक 15.09.2012 को उदयपुर में श्री सुभाषकपूर द्वारा ली गयी । मैने भी इसमे भाग लिया ।
सुभाषकपूर की पहली फिल्म सलाम इण्डिया थी । ये सिधे पत्रकारिता से फिल्म निर्माण व निर्देशन में आये हैं । इन्होने कोई फिल्म कला का औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया है । अपनी फिल्म निर्माण की प्यास एवं रूची के बलबुते पर इस क्षेत्र में सफलता पाई । सफल पटकथा लेखक बनने के लिए लिखने का जुनून होना प्रथम शर्त है ।
सुभाषकपूर ने बताया कि फिल्म का आधार पटकथा ही होता है । इसमे कथा भी सामान्य एवं ज्ञात ही होती है । मात्र प्रस्तुतीकरण नवीन तरह का एवं अपने आप में रूचीप्रद व विशिष्ट होता है । अतः लेखक को बात अपने अन्दाज में इस तरह प्रस्तुत करनी चाहिए कि वह दर्शकोें को डूबा दे । पटकथा दर्शकों के वर्ग को तय कर उसके अनुरूप लिखनी चाहिए । हरेक वर्ग का अपना सोच, स्तर, बिम्बो की समझ, मूल्य, सपने एवं द्वन्द भिन्न-भिन्न होते हैं । यानि उनकी मनोवृति व अवचेतन को ध्यान में रख कर संवाद एवं पटकथा लिखनी चाहिए । वैसे संवाद लेखन पटकथा से भिन्न व्यक्ति भी कर सकता है । नाटक, स्क्रीन-प्ले व पटकथा में अन्तर होता है । बार-बार लिखने से कला स्वतः ही विकसित होती है ।
वैसे डायरेक्टर एवं कथा लेखक के बीच निरन्तर संवाद एवं समझ होने पर अच्छी पटकथा बनती है । डायरेक्टर पटकथा को दृश्यों के रूप में देखता है । संपादक भी पटकथा को माॅजता है ।

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टीवी सिरिअल व फिल्म की पटकथा कैसे लिखे?

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टीवी सिरिअल व फिल्म की पटकथा कैसे लिखे?

मनोहर श्याम जोषी  की प्रसिद्ध कृति: पटकथा लेखन एक परिचय
यह हिन्दी में पटकथा लेखन पर सर्वश्रेष्ठ कृति है। इसमें पटकथा के सभी अंगोे का विस्तृत उदारहण सहित वर्णन है। पटकथा लिखने से पूर्व इसको पढ़ना बहुत जरुरी है। इसमें फिल्म की पटकथा एवं टीवी धारावाहिको की पटकथा पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। फिल्म मेकिंग, फिल्म सम्पादन,संवाद लेखन, कैमरा टेकनिक एवं षाॅट की जानकारी है। जो फिल्म लेखन के लिए जरुरी है। इसमें 23 पाठ है।
आईडिया, प्रिमाईस, वन मिनट सिनोप्सीस, टू मिनट मूवी, ट्रीटमेन्ट,(आम्बियांस और हाइलाइट्स), स्टेप आउट लाईन,, फिल्म के तीन अंग-सेटअप, टकराहट,चरमोत्कर्ष और समाधान, प्लाॅट पाॅइंट, षूटिंग स्क्रीप्ट ,एक्शन पाॅइंट को विस्तार से समझाया गया है।
मनोहर ष्याम जोषी हिन्दी के जाने माने रचनाकार है। वैसे भारत में टीवी धारावाहिकों के आप जन्मदाता है। कुरु-कुरु स्वाहा, कक्काजी कहिन आदि प्रसिद्ध उपन्यास लिखे है। हम लोग एवं बुनियाद जिसे प्रसिद्ध धारावाहिक आपने ही लिखे थे। है राम, अप्पू राजा, पापा कहते है आदि फिल्मों की पटकथाएं आपने लिखी है।
प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन , नई देल्ही

मूल्य : रू 75
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