Art of Living · Articles · Life-Management · Meditation · Self-Healing · Spirituality

अन्तर्यात्रा, होश बढ़ाने में नादानुसंधान सहायक है

नादानुसंधान ध्यान के पूर्व का अभ्यास है । यह ध्यान के लिए साधक को तैयार करता है । अनाहत नाद को सुनना इसका उद्देश्य है । यह अन्तर्यात्रा में सहायक है ।shilpa pranayam ध्यान मुद्रा मे बैठ कर चिन् मुद्रा धारण कर आंखे बन्द व शरीर शिथिल रखें । धीरे से श्वांस भरें व धीरे-धीरे अ-कार का उच्चारण करते हुए श्वांस छोड़ें । अपना होश कमर के नीचे ले जाएं । कमर के नीचे के भाग में कम्पन्न व मालिश को महसूस करें । इसके नौ चक्र करें । ध्यान मुद्रा मे बैठ कर चिन्मय मुद्रा धारण करें । आंखे बन्द रखें व शरीर को शिथिल करें । धीरे से श्वांस भरें व ऊ-कार का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें । पेट, छाती व पीठ पर ध्यान ले जाएं । गर्दन के नीचे के भाग में कम्पन्न व मालिश को महसूस करें । इसके नौ चक्र करें । ध्यान मुद्रा मे बैठ कर आदि मुद्रा धारण करें । आंखे बन्द रखें व शरीर को शिथिल करें । धीरे से श्वांस भरें व म-कार का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें । सिर में कम्पन्न महसूस करें । इसके नौ चक्र करें । ध्यान मुद्रा मे बैठ कर ब्रह्म मुद्रा धारण करें । आंखे बन्द रखें व शरीर को शिथिल करें । धीरे से श्वांस भरें व ओम का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें । पूरे शरीर में कम्पन्न महसूस करें । इसके नौ चक्र करें । अ, ऊ, म व ओम का उच्चारण अलग-अलग इस तरह करें कि शरीर मे सूक्ष्म कम्पन्न उत्पन्न हो सके । शरीर के प्राकृतिक कम्पन्नों के अनुरूप उच्चारण होने पर ही अनुनाद उत्पन्न होता है । इसलिए इन ध्वनियांे का उच्चारण इस तरह करें कि शरीर में अनुनाद उत्पन्न हो सके । इस तरह के अनुनाद उत्तेजक का कार्य करते हैं एवं अनुनाद के बाद का मौन हमारे होश को बढ़ाता है जो सुक्ष्म तनावों को समाप्त करता है । यह अभ्यास अन्र्तध्यान में सहायक है । इसको करने से शरीर में लयबद्धता बढ़ती है । यह होश बढ़ाता है । इसको करने से शरीर में अराजकता कम होती है । यह ध्यान के पूर्व का अभ्यास है । इसको करने से ध्यान गहरा होता है । Related Posts:

मन/श्वांस को शान्त /संतुलित करने के लिए विभागीय श्वसन करें

तनाव व चिन्ता घटाने हेतु भ्रामरी प्राणायाम करें

ऊर्जावान बने रहने व वजन घटाने सूर्य नमस्कार करें

जब कठिन आसन व प्राणायाम न कर सको तो सूक्ष्म व्यायाम करें

गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन का परिचय

Advertisements
Life-Management · Meditation · Self-Healing · Spirituality · Stress Management

साइक्लिक मेडिटेशन :शरीर को खींच कर छोड़े व तनाव कम करें

शरीर की मांसपेशियांे को खींचने-कड़क करने से शरीर में उद्दीपन बढ़ता है जो उसके शिथिल करने पर शान्त हो जाता है । इसी के द्वारा मन को उद्दीपन व शान्त किया जाता है ।C M
शरीर को उद्दीप्त करने वर रक्तदाब, हृदयगति, तन्त्रिकाओं में विद्युत्तिय व रसायनिक आवेग बढ़ते, नाडि़यों में प्रवाह की गति, त्वचा में कड़कपन, मांसपेशियों में खींचाव, श्वसन गति, संवेदनशीलता व मस्तिष्क की गति बढ़ती है इससेे व्यक्ति के परसेप्शन की गति, समझने की गहराई व विश्लेषण की गति बढ़ती है । इससे उसका होश बढ़ता है । अर्थात विचारों की गति बढ़ने से चिन्ता करने के लूप में तब वह उलझ जाता है । यह तनाव का बढ़ना है ।
संवेदनशीलता के चक्रव्यूह से बाहर आने शिथिल कर अपने होश को बढाते है । अपने को ढीला छोड़ दे । स्वयं को मुूक्त करें । शरीर को शिथिल करते ही रक्त दाब, हृदय की गति, श्वसन दर, विचारों की गति कम होती है । इससे बाहर जाने वाला ध्यान अन्दर एकाग्रता बढ़ाता है जिससे होश बढ़ता है व मन शान्त होता है । तन्त्रिकीय आवेगों को हृदय व मस्तिष्क के साथ समक्रमिक व समायोजित करना है । अर्थात मांसपेशियों व तन्त्रिकाओं को मालिश करना है ।
बिन्दु एकाग्रता को रेखिय होश में बदलते है । रेखिय होश पृष्ठ होश बनता है । फिर पृष्ठ होश को द्वि- विमिय होश में बढ़ाते हैं । वह फिर त्रिविमिय होश बन जाता है । बढ़ते हुए वह समुह व सर्वहोश बन जाता है । यह फैलाव मन को शान्त करता है । योग संवेदनशीलता को बढ़ाना है लेकिन उसक जाल मंे फंसना नहीं, चक्रव्यूह से बाहर निकलना है । बन्दर मन को एकाग्र कर शान्त कर होश में बदलना है ।अपने शरीर व मन के बिगड़े सम्बन्धों को पुनः संतुलित करना है । शिथिलता को ओर बढाना व गहरा करना है । मन में व्याप्त विश्रान्ति को मुक्त करना है ताकि वह अपनी सहज अवस्था मंे आ सके । प्रयत्न व शिथिलता में मधुरता स्थापित करना है । दबाव मुक्त होने से शरीर अपनी सामान्य अवस्था मंे पुनः आ सके ।
होश बढ़ाने के लिए ध्वनि का उपयोग करते है । ऊंॅ-कार की ध्वनि शरीर में होश को बढ़ाती है । ओम का उच्चारण एवं उससे उत्पन्न कम्पन्न अर्थात अनुनाद शरीर को शिथिल करता है ।

Related Posts:

गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन की विधी

सूर्य नमस्कार करें:वजन घटाए व दिन भर तरोताजा रहें

आरोग्यधाम (एस. व्यासा) बैंगलोर ,असाध्य रोगों की सर्वांगीण चिकित्सा हेतु श्रेष्ठ जगह

टीवी सिरिअल व फिल्म की पटकथा कैसे लिखे?

Art of Living · Life-Management · Meditation · Self-Healing · Spirituality · Stress Management

उच्च रक्तचाप भगाए, नाड़ी शोधन व भ्रामरी प्राणायाम करें

स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान संस्थान (एस. व्यासा) विश्वविद्यालय, बैंगलोर में नाड़ी शोधन प्राणायाम कर के अपना उच्च रक्तचाप कम किया । मैं विगत 18 वर्षों से उच्च रक्तचाप को नियन्त्रित करने हेतु दवाईयां नियमित लेता रहा हूं । बीच में स्वामी रामदेव व श्री श्री रविशंकर द्वारा संचालित योग भी करता रहा हूं । लेकिन वांछित परिणाम न आए । इस बार भाव से किया तो मन शान्त हुआ । इस बार जब प्रतिदिन उच्च रक्तचाप मापते रहे तो एक दिन तो नीचे का रक्तचाप 68 तक हो गया ।Alternate Nostrial Breathing
नाड़ी शोधन में बांये नथूने से श्वांस लेकर दांये से छोड़ते हैं । दांये पुनः श्वांस लेकर बांये से छोड़ते हैं । जब बांये से श्वांस लेते हैं तब दांये नथूने को अंगुठे से बन्द करते हैं । जब दांये से श्वांस लेते हैं तब अनामिका से बांया नथूना बन्द रखते हैं । इसे ही अनुलोम विलोम प्राणायाम भी कहते हैं।इस प्राणायाम को 15-20 मिनट तक प्रातः व 15-20 मिनट सांय करना पड़ता है । इसको करते वक्त स्वस्थ हो रहा हूं, सकारात्मक हूं का भाव करना है । श्वांस लेते व छोड़ते वक्त निराशा जा रही है, दुःख जा रहा है के भाव करने चाहिए । इस प्राणायाम को करते वक्त जोर नहीं लगाना है ।
इस प्राणायाम के करने से नाडि़यों व प्रवाह प्रणाली के अवरोध मिट जाते हैं । रक्त में कार्बन-डाइ आक्साईड की सान्द्रता बढ़ने से न्यूरोपेप्टाईड बढ़ते हैं जो एन्टी-आक्सीडेन्ट का कार्य करते हैं । अतः स्वास्थ्य सुधरता है । इससे प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है ।
इसके साथ ही 5-10 मिनट तक भ्रामरी किया । भ्रामरी प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरे-धीरे भ्रमर की गुंजन के साथ श्वांस छोड़ते हैं । यह प्राणायाम पूरी तरह शरीर को शिथिल कर आराम के साथ किया जाता है । इसमे ध्वनि निकालते वक्त न पर जोर रखें । इसमे श्वांस छोड़ने में 20 से 30 सैकण्ड तक का समय लगाएं । इसके करने से मस्तिष्क में मालिश हो जाती है । चिन्ता व तनाव मिट जाते हैं । विचार करने की गति कम हो जाती है । इसे सहज होकर करते हैं ।

Related Posts:

गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन का परिचय

एसीडीटी एवं जलन का रामबाण उपचार खानें का सोडा

मधुमेह निवारण शिविर का सार: योग व प्राणायाम एक पूरक चिकित्सा

आरोग्यधाम (एस. व्यासा) बैंगलोर ,असाध्य रोगों की सर्वांगीण चिकित्सा हेतु श्रेष्ठ जगह

Uncategorized

गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन की विधी

प्रारम्भिक प्रार्थना: साधना सूत्र लये सम्बोधयेत् चित्तं विक्षिप्तं शमयेत पुनः । सकषायं विजानीयात् समप्राप्तं न चालयेत् ।। Cyclic Meditation   तत्क्षण शिथिलीकरण तकनीक (आई0आर0टी0) शवासन में लेट कर शरीर के प्रत्येक भाग को कड़क कर शिथिल करना (एक मिनट) दांई करवट लेटना – रेखीय अभिज्ञा ताड़ासन – केन्द्रीभूत होना (सेन्टरींग) पंजो पर वजन ले जाना व एड़ी पर वजन ले आना – दाये बाये वजन ले जाना अर्ध कटिचक्रासन – धीरे-धीरे करना । शीघ्र शिथिलीकरण तकनीक (क्यू0आर0टी0) धीरे से लेटना – बांई तरफ से – । -उदर की गति देखें ।।-उदरीय श्वसन – उससे जुड़े – 5 चक्र श्वसन को महसुस करना – शिथिल होएं – आत्म सुझाव दे, श्वास लेते समय पूरा शरीर दीव्य ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया है । श्वास छोड़ते समय, शरीर की थकान, मन का तनाव बाहर जा रहा है । शिथिल दण्डासन से वज्रासन में बैठना शशांकासान – दांये हाथ को पकड़े अर्द्ध-उष्ट्रासन – कमर पकड़ कर पीछे झुके । गहन शिथिलीकरण तकनीक (डी0आर0टी0) शवासन कमर के नीचे एक-एक अंग को ढीला करना अ-कार जपना व उसके कम्पनों को महसूस करना शरीर के मध्य भाग को ढीला करना ऊ-कार जपना के एक एक अंग व उसके कम्पनों को महसूस करना मस्तिष्क के एक-एक भाग को ढीला करना म-कार जपना व उसके कम्पनों को महसूस करना ओम का उच्चार करना एवं उसके कम्पन्नो को अपने अन्दर महसूस करना शरीर को लेटे हुए देखना आकाशवत होना, ऊंकार ध्वनी कर पुनः शरीर को सक्रिय करना । समापन प्रार्थना सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःखभाग भवेत्।।

Related posts:

 Practical Instruction of CM in MP3 

मधुमेह निवारण शिविर का सार: योग व प्राणायाम एक पूरक चिकित्सा

सूर्य नमस्कार करें:वजन घटाए व दिन भर तरोताजा रहें

योग के अनुसार हमारा निर्माता कौन / जीवन का सत्य क्या है?

भावनात्मक असंतुलन के संकेत पहचाने एवं EQ (भावनात्मक संतुलन)बढ़ाए

Art of Living · Articles · Bloging · Self-Healing · Spirituality · Stress Management

गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन का परिचय

एस व्यासा, बैंगलोर मे हुए अनुसंधान से यह स्पष्ट हुआ है कि आवर्तन ध्यान निद्रा एवं शवासन करने से भी अधिक विश्राम देता है । माण्डूक्य उपनिषद से इसकी प्रेरणा ली गयी । इसमे शरीर को क्रियाशील कर शिथिल किया जाता है । इसमे उद्दीपन व विश्राम साथ साथ चलते हैं ताकि साधक विचारांे के जाल में न फंस जाय व स्वयं में केन्द्रीत रहे । विश्राम करने की यह तकनीक शवासन की अपेक्षा अधिक कारगर है । व्यक्ति इसमे सो नही सकता, न ही विचारों में डुब सकता है । इसमे पांचो शरीर प्रभावित होते हैं । सक्रिय होने पर एकाग्रता बढ़ती व शिथलीकरण पर तनाव विसर्जित होते हैं । यह ध्यान करते समय अपने शरीर को झटका न दे, न ही क्रिया के बीच रूके । सभी क्रियाएं बहुत धीरे धीरे करें । अपनी गतिविधी के प्रति सजग रहे । पोश्चर की अपेक्षा आन्तरिक जागरण ज्यादा महत्वपूर्ण है । जीवन की कला, कुशलता व बुद्धिमता मन को शान्त करना है । चेतना का फैलाव होता है ।

यह चंचलता, तम्स (शारीरिक-मानसिक) आलस्य अशान्ति की लय को तोड़ मन को सक्रिय कर शान्त करना है । संवेदनाएं समस्या बन जाती है । चिन्ता के चक्र में आ जाते है । हम अभिमन्यू की तरह अशान्ति के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं । बाहर आना नहीं जानते है। ऊर्जा का प्रबन्धन जरूरी है ।
विचारों को जाने वाली अत्यधिक ऊर्जा बन्द करनी है । शरीर को सक्रिय करने में ऊर्जा को लगाना है ताकि रजस्व बढ़े । तम्स काम नहीं करने देती, नीचे खींचती है । यह गुरूत्वाकर्षण की तरह ठण्डा करती है । रजस सक्रिय करता है । ग्रन्थियों का भेदन कर अवरोधों को हटाना है ।
रक्त संचारण, स्नायु-तन्त्र व हृदय के स्पन्दनों को देखें । उद्दीपन व विश्राम के संवेदनाओं के प्रति सचेत रहना बहुत जरूरी है ।यह आधे घंटे का ध्यान छः घंटे नींद के बराबर है । प्रत्येक सक्रियता (स्टीमुलेशन) जड़ता को तोड़ती है व सिकुड़न को खोलती है । जब सक्रियता को चेतन रूप से देखते हैं तो तत्क्षण हम शिथिल हो जाते हैं । जब शिथिलन जारी रहता है तो सुस्ती आ जाती है । इसे तोड़ने फिर सक्रिय होते हैं । इस तरह बार-बार सक्रिय व शिथिल होते रहने से मन में दबे गहरे तनाव बाहर आ जाते हैं । सक्रियता से तमस दबता है व राजस जगता है । आॅक्सीजन की मात्रा से चयापचयी दर सम्बन्धित है । विश्राम की अवस्था में आॅक्सीजन खपत घट जाती है । शवासन में 10 प्रतिशत आॅक्सीजन खपत घटती है जबकि आवर्तन ध्यान में यह खपत 32 प्रतिशत तक घट जाती है । अर्थात इस ध्यान में विश्राम अधिक मिलता है ।

विधि  अगली पोस्ट में पढ़े ।                                                                                            ( To be continued…..)

Related posts:

स्वसंवाद द्वारा अचेतन मन को स्वास्थ्य के पक्ष में करें

पोषक तत्वों के बारे मे डाॅ0 रेण्ड की प्रसिद्ध बढि़या पुस्तक

आरोग्यधाम, एसव्यासा, बैंगलोर से 7 अनुकरणीय बातेंजो मैंने सीखी

हम सब में कुछ खास बात है: सुखी होने याद रखें

Articles · Meditation · Self-Healing · Spirituality · Stress Management · Uncategorized

सहज समाधि ध्यान करना चाहिए या नहीं?

तनावभरी जिन्दगी में शांति पाने सहज ध्यान करें। अपनी अशान्ति, बैचेनी, आकुलता, जल्दबाजी से मुक्त होकर जीवन का रस भोगने सहज ध्यान करें। इससे हमें राहत मिलती है। यह अन्धकार से प्रकाश में जाने का पथ है। इससे जीवन में सन्तोष आता है, स्वीकार भाव आता है, आनन्द आता है।

श्री श्री रविशंकर, आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा संचालित सहज समाधि ध्यान  करने का अवसर मिला। ध्यान को अनुभव करने का, ध्यान को समझने का अवसर मिला व स्वयं को समझने का मौका मिला। इसकी फीस एक हजार रुपया है। अतः इसको करना चाहिए या नहीं है। अतः इस पर समीक्षा करना मैं उचित समझता हूँै।

सहज ध्यान का अर्थ समता में आकर प्रकृतिस्थत होना है। सजगता पूर्ण विश्राम में ध्यान है। इसमें स्वयं को शिथिल करते हुए विश्राम में रहना है। कार्य करते हुए समाधिस्थ होना है। इसमें प्रयत्न की जरुरत नहीं है। सारे प्रयत्न छोड़ने है। मात्र स्वयं को मिटाना है। यह हमारी खोई अवस्था है जिसे पुनः प्राप्त करना है। इसकी विधि बनाने की मुझे आज्ञा नहीं है। ध्यान का अर्थ एकाग्रता नहीं है बल्कि ध्यान का परिणाम एकाग्रता है।

हमारे मन पर अनेक बोझ है। हम सब भावनात्मक रुप से घायल है। हमने अपने को दबा रखा है। समाज और परिस्थिति के कारण बहुत से जहर हम पीते है। इन सब की निकासी ध्यान द्वारा ही होती है। ध्यान स्वयं की सफाई है। यह हमारी चेतना का भोजन है।
सहज ध्यान मन के चारों स्तरों चेतन स्तर, अचेतन स्तर, अवचेतन स्तर, सहचेतन स्तर पर कार्य करता है। जैसे स्पंज को पानी में भिगोने पर वह पानी को शोख लेता है। फिर स्पंज में जमी धूल व बन्द छीद्रों को खोलने के लिए सुई चुभानें पर गन्दगी निकल जाती है वैसे ही मंत्र के उच्चारण द्वारा चेतना के स्तरों में जमा अवरोध दूर हो जाता है।
हमारी चेतना के चार तल होते है।

1. जाग्रत अवस्था-इसमें हम सजग रहते है, विश्राम नहीं मिलता है।
2. सुसुप्ति-यह विश्राम की अवस्था है, जाग्रत नहीं रहते है। इसमें हम निद्रा में रहते है।
3. स्वपन-इसमें हम न सजग रहते है, न ही विश्राम में रहते है।
4. तुरीय अवस्था-इसमें हम सजग रहते हुए विश्राम में रहते है। यह ध्यान की अवस्था है।

ध्यान में विचारों का आना सहज है इसे अपनी कमजोरी न माने। इन विचारों को स्वीकारें, इनसे इनकी मृत्यु हो जाएगी। अन्यथा विचारों को महत्व देने से ऊर्जा मिलने पर ये और बढे़गें। इसमें विचारों को स्वीकार कर उनके प्रति साक्षी भाव रखें।

अपने मंत्र का आदर करें। वह आपके गुरु द्वारा दी गई ध्वनि रुप में ऊर्जा है। शक्ति पात स्पर्श द्वारा, दृष्टि द्वारा व ध्वनि ऊर्जा को मंत्र बनाकर दी जाती है।

Life-Management · Meditation · Self-Healing · Spirituality · Stress Management

पल-पल सजगता से जीओं ताकि पूरा जीवन आन्नदमय हो जाय!

जीवन जीने की कला आनन्दपूर्ण ढंग से जीना ही है। आनन्द हमसे बाहर नहीं है। इसे प्राप्त करना होता है। यह स्वतः नहीं उपजता है। आनन्द स्थिर (स्टेटिक) नहीं होता है, यह निरन्तर गतिमान है। आनन्द कोई ऐसी चीज नहीं है कि एकदम व्यक्ति अचानक पा जाय और एक जगह पहुँच जाए जहाँ आनन्द का मन्दिर है, दरवाजा खुलेगा और आनन्द उसे मिल जाएगा। नहीं ऐसा नहीं होता है। आनन्द तो कदम-कदम पर है, श्वास-श्वास पर है कि हम कैसे जी रहे है ? हम प्रत्येक पल सजगता से जीते चले तो एक दिन हम पाएगें कि इतना आनन्द इकट्ठा हो गया है कि अब सिवाय अनुग्रह के कुछ भी शेष नहीं हैं, किसको धन्यवाद दूं उसको खोजना पड़ेगा।

इस क्षण को संभालो पूरा जीवन संभल जायगा। वर्तमान में ही जीवन है। शुरुआत मत देखों। आनन्द प्राप्त करने हेतु हमें सजग होना पड़ेगा। सभी प्रकार के ध्यान का मूल लक्ष्य सजगता सिखाना ही है। ध्यान से ही सजगता बढ़ती है। सजगता ही आन्नन्द का मार्ग है। विचार सजगता के दुश्मन हैं। विचार मन को ऊर्जा देते है जिससे मूच्र्छा बढ़ती है। निर्विचार ही सजगता है। विचारों द्वारा भावनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं खोजा जा सकता है। जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान सजगता में है एवं सजगता से आनन्द बढ़ता है।

Related Posts:

आन्तरिक मुस्कान कैसे बढ़ाए

सफलता प्राप्ति में साधनों की भूमिका

मानवीय मस्तिष्क विलक्षण कंप्युटर पर प्रेरक वचन: क्षमता बढाने

Meditation:The grass grows by itself

हँसकर दर्द को भगाए और रोग – प्रतिरोध शक्ति बढ़ाएं

जीवन में संतोष कैसे प्राप्त करना