साधना में बाधा : पिंड में असंतुलन (Planetary Imbalances)

स्वस्थ शरीर साधना हेतु जरूरी हैlइसके अभाव में अंतर्यात्रा नहीं की जा सकती हैl  शरीर को स्वस्थ रखने हेतु सही विचारों का होना जरूरी हैl इस हेतु व्यक्तिमें नो दोषों का समाधान करना चाहिए l
1 वात दोष
2 पित्त दोष
3 कफ दोष
4 जोडों में दर्द
५ सरदर्द
6 दस्त
7 कब्ज
8 मूत्र  आने की आवृति में गडबड

9 स्नायविक असंतुलन

एक साधक को अपनी विचार प्रक्रीया को बदलते हुए उपरोक्त दोषों का समाधान आयुर्वेद, आहार  व योगिक  प्रक्रियाओ को अपना कर साधना करनी चाहिए l दोष अनुरूप समाधान  आगे  कभी बताया जायेगा l

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शवासन सबसे कठिन व सबसे महत्वपूर्ण आसन क्यों व कैसे है?

 

हमारा जीवन तनावग्रस्त होने  से हमारे शरीर व मन खीचें हुए रहते हैl  शवासन में इन दोनों को शिथिल कर विश्राम करते हैl  मन व तन को शिथिल करना बड़ा कठिन है इसलिए शवासन कठिन आसन हैl यह महत्वपूर्ण भी इसीलिए है चुकि इस आसन से जीवन के तनाव कम होते हैl  श्वसन को मंद करने से शांति प्राप्त होती हैl शरीरके एक एक अंग पर ध्यान ले जा कर उसे  शिथिल करना सम्भव है क्योंकि इस निर्देश में  आवेश यानि कोई पूर्वाग्रह नही होता हैl   इससे मांसपेशीया  व आन्तरिक अंग शिथल होते  हैl इसमें जितनी सजगता बढ़ाते है उतनी ही विश्राम की गहराई बढती  जाती हैl शवासन एक कला ही नही एक विज्ञानं भी हैl

सॉवरक्रॉट कैंसर रोकने व ठीक करने में सहायक

सॉवरक्रॉट क्या है?

बंदगोभी/पत्ता गोभी के फर्मेंटेशन द्वारा तैयार होता है। डॉ बुडविज ने अपने कैंसर विरोधी प्रोटोकॉल में बताया हैl फर्मेंटेशन एक जीवरसायन प्रक्रिया है जिसमें सॉवरक्रॉट छाछ की तरह एक तरह का जर्मन   लोकप्रिय प्रोबायोटिक हैl  यह जीवाणुओं द्वारा कार्बोहाइड्रेट का फर्मन्टेसन से बनता है, जो लेक्टोबेसीलाई (LABs) द्वारा सम्पन्न होती है। सॉवरक्रॉट में लेक्टिक एसिड बनाने वाले जीवाणु बंदगोभी को जल्दी जल्दी फर्मेंट करना शुरू कर देते हैं। ये लेक्टोबेसीलाई (LABs) पीएच कम करते हैं, माध्यम को अम्लीय बनाते हैं और यह अम्लीय माध्यम अनावश्यक हानिकारक जीवाणुओं के लिए उपयुक्त नहीं होता है। सॉवरक्रॉट बनाते समय हमारा मुख्य उद्देश्य लेक्टोबेसीलाई के विकास हेतु उपयुक्त वातावरण बनाये रखना होता है।

फिनलैंड की अनुसंधानकर्ता इवा लिज़ा रेहानेन और साथियों ने सॉवरक्रॉट में कैंसर-रोधी तत्वों का पता लगाया है। इवा के अनुसार बन्दगोभी को खमीर करने पर कुछ एंजाइम्स बनते हैं जो उनके ग्लुकोसाइनालेट को विघटित कर कैंसर-रोधी आइसोथायोसायनेट बनाते हैं।

कैंसर-रोधी होने के साथ साथ सॉवरक्रॉट पाचनक्रिया में बहुत सहायक हैं। इसे खमीर करने की प्रक्रिया में लेक्टोबेसीलस जीवाणु पैदा होते हैं जो पाचन में सहायता करते हैं, विटामिन्स की मात्रा बढ़ाते हैं, विभिन्न लाभदायक एंजाइम बनाते हैं और पाचन-पथ में मित्र जीवाणुओं की सेना में वृद्धि करते हैं। हर स्वास्थ्य समस्या या रोग में पाचन का बहुत सहायक है। प्रातकाल खाली पेट इसे लेते हैl

 

इमोशनल फ्रीडम टेकनिक (EFT)क्या है?

इमोशनल फ्रीडम टेकनीक (Emotional Freedom Technique) सामान्य मनो-चिकित्सा से अलग एक नई जादुई उपचार पद्धति है जो हमारे शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली में आई रुकावट को संतुलित करती है और हमारे शरीर तथा मन से नकारात्मक भावनाओं को निकाल देती है। जिससे हमें भावनात्मक और दैहिक विकारों से तुरंत मुक्ति मिल सकती है। चीन में इस ऊर्जा को ची या Qiकहते हैं जो ऊर्जा तंत्रिकाओं (Meridians) में बहती है। 5000 वर्ष पुरानी एक्युपंक्चर और एक्युप्रेशर उपचार पद्धतियां भी इसी सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली पर आधारित हैं। गैरी क्रेग द्वारा विकसित इस उपचार को भावनात्मक एक्युपंक्चर भी कहते हैं, लेकिन इसमें सुई न लगा कर ऊर्जा बिन्दुओं को दो अंगुलियों से थपथपाया जाता है। यह डर, भय, चिंता, क्रोध, व्यसन, आघात, अवसाद, बुरे स्वप्न, दर्द, सिरदर्द आदि सभी भावनात्मक और दैहिक विकारों का सरल लेकिन शक्तिशाली उपाय है। जिस प्रकार हमारे कम्प्यूटर में एक रिस्टार्ट बटन होता है और जब कोई गड़बड़ होती है या कम्प्यूटर हैंग हो जाता है तो रिस्टार्ट बटन दबाने पर कम्प्यूटर पुनः ठीक से चालू हो जाता है। उसी तरह ई.एफ.टी. भी हमारी सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली में आई रुकावट को ठीक करने के लिए रिस्टार्ट बटन का काम करती है।

( निरन्तर…… इसकी विधि अगली बार )

स्टेरॉइड लेने के 8 साइड इफेक्ट

स्टेराइड के इस्तेमाल के कई गंभीर साइड इफेक्ट हैं।

  •  इससे मौत तक हो सकती है।
  • यह आदमी को पूरी तरह से नपुंसक बना सकता है।
  • यह चेहरे को मुंहासों से भर सकता है
  • और आपको बेहद गुस्सैल भी बना सकता है।
  • इससे लेनेवाले का हार्मोन संतुलन बिगड़ता हैl
  • कार्डियो सिस्टम खराब होता हैl
  • हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैl
  • लीवर,गुर्दे ख़राब हो जाते  हैl

शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां इसके नुकसान पहुंचाने की संभावना नहीं हो। इसलिए कभी कोई डॉक्टर गम्भीर रोग के सिवाय इसे लेने की सलाह  नहीं देता। इसीलिए दुनियाभर में इसकी खुली बिक्री पर बैन लगा हुआ हैl स्टेरॉइड कोई नशा नहीं होता मगर यह लत भी बन जाता है। अगर आपने एक बार इसे लिया तो आप इसे दोबारा लेंगे। जो नतीजे कोई डाइट या कोई दवा नहीं दे पाती वो स्टेरॉइड दे देता है, इसलिए लोग बार बार इसका इस्तेमाल करते हैं जो की बहुत घातक है।