भावी जीवन साथी में कोन से गुण होने चाहिए : अंतिम भाग

लक्ष्य समान हो, सपने हो, शौक सम्मान हो तो जीवन साथी के साथ जीने में सुविधा होती है। क्योंकि उनके समान होने से परस्पर समझ बढ़ जाती है। जिससे समायोजन में सुविधा रहती है।

‘सम्पूर्ण जीवन’ साथी एक कल्पना है। यह जीवन में नहीं मिलता है। हम सब अधुरे है। कमियां हम सब में है। अतः पूर्णता की ईच्छा अपने साथी से न करें। साथी ऐसा चुने जिसके साथ आप सुख पूर्वक रह सके, खुल कर हँस सके बिना बोर हुवे समय बिता सके। कभी-कभी थोड़ा लड़ सके, नाराज हो सके ताकि रेचन होता रहे व ताजगी बनी रहें। खट्टा-मीठा स्वाद दाम्पत्य जीवन मे अच्छा रहता है।ज्योतिष?कुछ लोग ज्योतिष के आधार पर पाटर्नर की कुन्डली मिलवाते है। वैसे कुण्डली की प्रकृति, स्वभाव व गुणों का अवलोकन प्राचीन है कि दोनों में तालमेल कितना संभव है।यह एक अनुमान विज्ञान से अधिक कुछ नहीं है। इसकी बजाय सेहत कुन्डली व गुण कुन्डली मिलान करना बेहतर है।

वर-वधु का चयन करते वक्त परिजन तो सामाजिक, वंशानुगत व अन्य पक्ष देखे ही लेकिन संभावित उम्मीदवारों की व्यक्तिगत मूलाकातें जरूर कराएं। इनसे ही परस्पर रूचि व लक्ष्यों की समझ हो सकती है। शुरू में दोनों को ठीक लगें तो अंतरंग वार्ताएं करने के ओर अवसर दे। इनमें ही व्यक्तिगत स्वभाव एवं सामाजिक सोच, मनोवैज्ञानिक दृष्टि से एक दूसरें को समझने का अवसर मिलता है।शादी भावी वर-वधु को करनी है। उन्हें साथ रहना है। अतः यह निर्णय उन्हें करने दे कि वे सहमत है या नहीं। माता-पिता इस सम्बन्ध में उन्हें सूचनाएं उपलब्ध कराएं, वर-वधु के विश्लेषण में मदद करें लेकिन अन्तिम निर्णय उन्हीं को करने दें।

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भावी जीवन साथी में कोन से गुण होने चाहिए? भाग-3

पूर्व में आप समायोजन की क्षमता, समझदारी, आन्तरिक क्षमता, परिवार एवं शिक्षा के बारे में पढ़ चूके है। शेष पाँच योग्यताएँ निम्न प्रकार है।

6.रुचियाँ/आदतें-

लक्षण-चाहतेंअपने पाटर्नर की रुचियों का ज्ञान बहुत जरुरी है। रुचियाँ व्यक्तितत्व को दर्शाती है। रुचियाँ मिलने पर जीवन सहज हो जाता है। समान रूचि वाले के साथ जीवन-मात्रा आनन्द प्रद हो जाती है। रुचि न होने पर दूसरे से विवाह की संभावना यह एक प्राचीन विज्ञान है लेकिन इसकी प्रामाणिकता सिद्ध नहीं है। फिर भी कुछ लोग उसको बहुत महत्व देते है। इन्हें गलत कहना भी सरल नहीं है। है, इससे फिजूल में विवाद हो सकते है।जीवन साथी के व्यसनों के बारे में पता कर लें। क्योंकि धुम्रपान, मध्यपान आदि व्यसन कुछ लोगों को बहुत बुरे लगते है। तो शादी के पहले इनके बारे में जानकारी कर लें।

7. आर्थिक स्थिति-

पेशा क्या है?हमारा जीवन अर्थ प्रधान है। उपभोक्ता समाज में कौन कितना खर्च करता है। उससे हम मापते है। समान आर्थिक स्थिति वालों के बीच तेरे-मेरे के झगड़े कम होते है। व्यवसाय, नौकरी, पेशा इन पर विचार आवश्यक है। क्योंकि हर पेशे में एक सोच होती है। क्या आप इस सोच के साथ जी सकते है।

8. सुन्दरता-लूक-

दिखती कैसी है।जीवन में सौन्दर्य भी व्यक्तित्व का हिस्सा है। अतः पाटर्नर का रंग रूप आकार वजन व लम्बाई भी महत्वपूर्ण है। लेकिन बाह्य रूप से ही जीवन नहीं चलता है। गुब्बारा अपने भीतर भरी गैस से उपर उठता है, उसके ब्राह्य रंग से नहीं। जैसा कि किसी ने कहा है कि सुन्दरता की गहराई चमड़ी तक होती है। यदि आप शो बिजनेस में नहीं है तो यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। लेकिन स्मार्ट साथी होना अच्छी बात है। लेकिन यह दूसरों के लिए होती है।

9. स्वयं का जातिगत समाज

हमारा समाज अलग-अलग  जातियों में बटा हुआ है। प्रत्येक जाति विशेष के अपने संस्कार होते है। अपनी ही जाति में शादी करने से इन संस्कारों की समानता रहती है। जिससे विवाद के अवसर घटते है। यद्यपि यह कोई ठोस पैमाना नहीं है। मानवता और प्रेम कहीं भी हो सकते है। अपने समाज में ही शादी करने से पाटर्नर के अचेतन पर शादी को निभाने का दबाव रहता है। जिससे मतभेद कम होते है। अपने समाज में व्यक्ति की सामाजिक स्थिति होती है। जो उसकी करनी को बताती है।अपनी समाज में करने पर सगे-सम्बन्धी के यहाँ मौको पर आप अकेले नहीं होते है। क्योंकि कोमन रिश्तेदार भी होते है। दूसरे वहाँ पर आपकी अपनी सामाजिक शान होती है। यद्यपि यह खोखली है, फिर भी है तो। आदर्श अपनी जगह पर है।यद्यपि जातिगत ढाँचा टूट रहा है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अतः बेवजह अपनी जातिगत समाज से बाहर न जाएं। जाना पड़े तो शाकाहारी संस्कार है तो उसी तरह के समाज से जुड़े ।

10. अपनी अन्र्तप्रज्ञा की सुनें-

दिल से पूछोजीवन तर्कातीत है। यह तर्क से नहीं चलता है। यहाँ ज्ञात से अधिक अज्ञात है। प्रथम भेंट पर ही आपके मन में स्वतः गुदगुदी हो व सामने वाला अच्छा लगें तो उसे चुनें। हमारा अचेतन मन कई आधारों से सामने वालो का विश्लेषण कर निर्णय करता है। वे आधार आपको प्रकट नहीं होंगे। लेकिन दिल कहता है कि बस यही है तो उसका भी ध्यान रखें। दिल के अपने आधार है वह ज्ञान से उधर है। भावनाएँ भी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। प्रेम स्वयं भी हो तो एक भाव ही है। अतः इस पर भी पूरा ध्यान दें। दिल मना करें, कारण न मिले तो भी उसके ब्याह न रचाएं क्योंकि आप कभी पूरे दिल से उसे चाह नहीं पाऐंगे।

(To be continued)

भावी जीवन साथी में कोनसे गुण होने चाहिए ? भाग -२

गतांक में  आप   समायोजन की क्षमता  एवं         समझदारी
के बारे में पढ़  चुके है,   शेष …..।
3. अन्तर्मन, अन्र्तदृष्टि, आन्तरिक क्षमता

व्यक्ति आन्तरिक क्षमता से ही बाह्य आचरण करता है। हम अपने भीतर के आधार पर ही चलते है। अन्र्तदृष्टि सम्पन्न होने पर ही हम दूसरों को बेहतर समझ सकते है। जीवन में सफलता हेतु आन्तरिक क्षमता जरुरी है। इसी से व्यक्ति आगे बढ़ता है। बाह्य क्षमता के सारे प्रर्दशन खोखले है। दृष्टि से सृष्टि बनती है। अतः जीवन में दृष्टिकोण का बड़ा महत्व है। अतः साथी के अन्तर्मन को समझे कि उसके आन्तरिक विश्वास कैसे हैं? ब्राह्य आचरण के आधार में जाएं। वह आन्तरिक रूप से कैसा हैं? व्यक्ति के अन्तर मन से उसकी दृष्टि बनती है, उसी से उसकी क्षमता बनती है। अन्दर के गुणों का परखना बहुत जरूरी है। ‘‘अन्दर के गुण भगवान जाने’’ मान कर न चलें। इनका परीक्षण बहुत आवश्यक है। इनको जानने के लिए ही घण्टे भर की मूलाकात काफी नहीं है। प्रत्येक घर के सदस्य को अक्सर निकाल कर अकेले में चर्चा करना चाहिए। साथी से उसकी आदतें व मूल्य जानने उसके जीवन की घटनाएँ जाने। किस परिस्थिति में कैसे प्रतिक्रिया करता है? उसका झगड़ा किससे है, वह कब उलझा है, उसकी दुश्मनी किस-किस से है। विपरित स्थिति में वह क्या प्रतिक्रिया करता है? आदि की समझ साथी के चुनाव करते वक्त जरूरी है। ‘लीव टूगेदर’ का प्रचलन परखने हेतु है वहाँ तक उचित है।

4.  खानदान/परिवार

व्यक्ति अपने संस्कार परिवार से सीखता है एवं फ्रायड के अनुसार हम सात वर्ष तक ही अमुमन सीखते है। अतः हम सब अपने परिवार के संस्कारों से बंधे होते है। एवं उन्हें ही सही मानकर जीते है। अतः अलग संस्कार होने पर साथ निभाना कठिन होता है। इसीलिए पाटर्नर के परिवार को देखना जरुरी है। अगले के परिवार का चरित्र व इतिहास जरुर पता करें। पत्नी के चुनाव में उसकी माँ का व्यवहार व करनी जरूर ध्यान में रखें। कुछ गुण वंशानुगत होते है अतः उसके परिवार का चाल-चलन व पूर्व इतिहास ज्ञात करें। परिवार के घमन्डी होने पर जरूरी नहीं है कि सभी सदस्य घमन्डी, फिर भी संभावना रहती है कि घमन्डी हो। अतः इस पहलू की विशेष जांच कर लें। अपवाद का भी नियम है। परिवार की प्रतिष्ठा साफ-सुथरी हो तो अन्यथा होने की गुजाइश कम रहती है।

5. शिक्षा

जीवन में  शिक्षा का बहुत महत्व  है। शिक्षा से जीवन में बहुत से आयाम खुलते है। पाटर्नर दूसरे साथी की  शिक्षा के अनुसार शिक्षित होना चाहिए। इन्जीनियर पति होने पर पत्नी का इन्जीनियर होना जरुरी नहीं है। लेकिन स्कूली शिक्षा कम से कम समान स्तर की हो । साथी का आई क्यू भी उत्तम होना चाहिए। वैसे ही यह मसला व्यक्तिगत अधिक है।

( To be continued…)

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भावी जीवन साथी में कोनसे गुण होने चाहिए ?

शादी हेतु पाटर्नर में निम्न दस योग्यताओं  को देखना जरुरी है। इस हेतु मैं यहाँ कुछ योग्यताओं का उल्लेख कर रहा हूँ। जब हम पार्टनर को खोजने जाएँ तो निम्न बिन्दुओं पर जांचे व प्रत्येक बिन्दु पर मार्किंग कर उसका योग कर निर्णय लें। हम प्रत्येक अर्हता के लिए दस नम्बर रख सकते है। साठ प्रतिशत से अधिक नम्बर आने पर विवाह के सफल होने की प्रबल संभावना है।
1. समायोजन की क्षमता
इस एक मात्र गुण से विवाह सफल हो जाता है। समरयोजन की वृत्ति न हो और शेष सारे गुड़ हो तो वैवाहिक जीवन के नर्क बनने की पूरी संभावना है। शादी की सफलता पाटर्नर की समायोजन क्षमता पर निर्भर है। समझौता करने में दक्ष है या नहीं , अड़ियलपना इसमें ठीक नहीं है। जिसे सहन करना आता है वह सफलता पूर्वक शादी को निभा सकता है। इसे निभाने की कला कहते है।दो व्यक्ति अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आते है। अतः विचार व संस्कारों में अन्तर स्वाभाविक है। मतभेद होेने पर भी दूसरे की इज्जत कर स्वीकारने से गाड़ी सुखपूर्वक आगे बढ़ती है। दूसरा मत होने पर अस्वीकारना तो सहज है। लेकिन वाल्तेयर की बात ध्यान रखें कि हो सकता है कि मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊँ, फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करुँगा। अर्थात् दूसरे को ससम्मान अपना पक्ष रखने दो। इससे आधी समस्या हल हो जाती है।
विवाह की अधिकांश सफलता का आधार समायोजन की क्षमता है। एक पार्टनर दूसरे को कितना स्वीकार कर पाता है। क्योंकि सारी स्थितियाँ एक जैसी नहीं होती है। दो भिन्न संस्कारों में पले व्यक्ति एक साथ रहते है तो संघर्ष स्वाभाविक है। इसको अन्यथा न लेने की कला ही विवाह की सफलता है। वैसे भी विवाह एक समझौता है। अतः इसमें साथ निभाने की कला का बड़ा महत्व है।
स्वयं पर भरोसा कितना है? आत्मविश्वास की कमी वाला साथी ठीक नहीं रहता है। जीवन में आगे बढ़ने में आत्म विश्वास बहुत जरूरी है। आत्म विश्वास से भरा व्यक्ति ही समझौता कर सकता है।

2. समझदारी
वैसे समायोजन की क्षमता समझदारी से ही आती है। शादी एक सामाजिक संस्था है जो परिवार की बुनियाद है मनुष्य का पूरा जीवन इसके चारों और घूमता है। शादी से कत्र्तव्य और अधिकार मिलते है। अतः इनका निर्वहन समुचित तरीके से करने के लिए पाटर्नर का समझदार होना निहायत जरुरी है। यहाँ समझदारी का अर्थ दूसरे को समझने व समझाने की क्षमता है। एक साथी कैसे क्रिया करता है और उस  क्रिया की दूसरा साथी क्या प्रतिक्रिया करता है। इनकी समझ जरूरी है। परिस्थिति को समझ कर सही व्यवहार करना एक कला है जिसका ज्ञान वैवाहिक सफलता के लिए जरुरी है। पाटर्नर को दूसरे पाटर्नर के मन की भाषा का ज्ञान होना चाहिए। दोनों एक भाषा समझते हों। परस्पर समझ के न होने पर जीवन नरक बन सकता है। समझदारी से विनम्रता बढ़ती है। इसे से मिलन सारिता भी बढ़ती है। समझदारी सारे गुणों की माँ है।

(To be continued)