दर्द निवारण हेतु ग्वासा (guasa)थेरेपी/ पंचगव्य सेल थेरेपी

यह एक चीनी एकुप्रेसर की तरह की वैकल्पिक चिकित्सा विधि है जिसमे त्वचा को विशेष ब्रश से रगडा जाता हैlइससे शरीर में रक्त, स्नायु व लिम्फ कोशिकाओ में डीटोक्सीफिकेशन होता हैl इसलिए इसे सेल थेरेपी भी कहते हैl सभी प्रकार के दर्द निवारण में यह बहुत कारगर हैl शरीर में अकडन दूर होती हैl
यह रुके हुए प्राण को प्रवाहित कर देता है जिससे व्यक्ति स्वस्थ हो जाता हैl
उक्त थेरेपि संधियों में दर्द, अस्थमा ,लकवा , कफ , बुखार ,एलर्जी ,सुजन में लाभदेय हैl
इस चिकित्सा हेतु हीलर डॉ शंकर गहलोत,शिवगंज( ०९९२९२४७८९४) से सम्पर्क कर सकते हैlस्वास्थ्य सेतु में इनका शिविर  होते हैl

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दिवाली की शुभकामनाएं

हम  चाहे लाख दिये और
मोमबत्तीया जलाऐ इनसे
हमारे  जीवन में रोशनी
होने वाली नही।

असली दिवाली तो उस दिन
ही समझना जिस दिन हमारे
भीतर का दिया जले।

उससे पहले तो सब अंधकार
ही है ।

और राम के घर लौटने
से हमारा  क्या लेना देना,
बात तो उस दिन बनेगी
जब हम अपने
भीतर लौटोगे

तभी  होगी असली दिवाली l

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विटामिन बी 12 की कमी को पूरा करने चावल का मीठा ओलिया खाएँ

शाकाहारी मित्रोँ में अमूमन बी12 की कमी पाई जाती हैl बी 12 की गोली व इंजेक्शन के अतिरिक्त दूध ,दही,  टोफू , कांजी वडा, जलेबी,इमरती ,इडली ,डोसा ,खमण , राब ,बासी रोटी व खमीरी कृत आहार भी हैl इन सब में से चावल का ओलिया अच्छा विकल्प हैl

Rice curd cure Vitamin B 12 deficiency

ओलिया बनाने की विधि:
एक व्यक्ति के लिए निम्न मात्रा ले l
सांय एक मुट्ठी चावल पकाए, उसमे से मांड नहीं निकाले l चावल में थोडा सा पानी ज्यादा डालेl फिर उसे ठंडा कर ले l फिर उसमे एक चुटकी पीसी हुई राइ, एक चुटकी सेंधा नमक ,8 चम्मच दही व 15 किशमिश डाले. रात भर उसे रखे रहे l इसे फ्रीज में नहीं रखेl प्रातः यह विटामिन 12युक्त ओलिया तैयार हैl इसे स्वादानुसार दही व शक्कर डाल कर नाश्ते में या लंच में ले ले l
महीने भर के बाद बी 12 की जाँच पुनः करा ले lउक्तओलिया वातनाशक एवं पाचन में सहयोगी हैl

 

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प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने व स्वस्थ रहने हेतु विटामिन डी अति आवश्यक है

मैग्नीशियम की कमी दूर कर अधिकांश रोगों को भगाए

नाम को सार्थक करती डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?”

जो व्यक्ति दवाईया  लेता है,उसे दो बार ठीक होना पड़ता है,एक बीमारी के असर से और दूसरा दवाई के असर से l

–  विलीयम ओस्लर

 

यह मेडीकल भ्रष्टाचार पर भारत की पहली पुस्तक हैl इसमें बताया गया है कि दवाइयों  के बिना भी कैसे ठीक हो सकते है?

डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?”

आज हमारी बीमारी  बड़ी समस्या है लेकिन वही डॉक्टर व दवा कंपनियों के लिए एक व्यापार का अवसर हैl उनके लिए यह वरदान है,समस्या तो हमारी हैl वे इसे  सही भुनाते हैl हम अपनी जीवन शैली बिगाड़ कर यह मोका उनको परोसते हैl हम अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी नहीं लेकर उनकी शरण में जाते है इसमें उनकी कोई गलती नहीं हैl  जल्दबाजी  करते हुए ,अव्यवस्थित हम जीते है,रसायन युक्त पक्व आहार लेकर पेट खराब करते हैl

कोशिकाओं के अंदर की दोषयुक्त रासायनिक प्रतिक्रियाओं  को दवाओ से ठीक करने की कोशिश ठीक वैसी ही होगी जैसे कि आपके घर में मच्छर हो और आप उसे मारने के लिये मिसाइल या रोकेट लांचर का इस्तेमाल करें l

क्या होस्पिटल के डॉक्टरो व कर्मचारियों  से भूले नहीं होती है?

क्या अस्पताल रोगमुक्ति के केंद्र है या यमराज के घर है?

इस तरह के अनेक प्रश्नों के उत्तर इस पुस्तक में दिए हुएं हैl  वास्तव में इसमें स्वास्थ्य उधोग का  वह सच  बताया हुआ है जो आपकी ज़िन्दगी बदल  देगा l

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रोग मुक्त होने व विष मुक्त होने:ऑयल पुलिंग

मुहं में तेल का कुल्ला करने से शरीर के टोक्सिंस बाहर निकल जाते हैंl यह एक आयुर्वेदिक विधि है जिसे विज्ञान भी स्वीकारता हैंl डॉ .कराच जिन्होंने आयल-पुलिंग पर एक विस्तृत शोध किया है उन्होंने पाया है कि आयल-पुलिंग के बाद निकले एक बूंद थूक में जीवाणुओं के लगभग 500 प्रजातियाँ बाहर आ जाती हैं ,अर्थात शरीर से जीवाणुओं को बाहर करने में आयल-पुलिंग थेरेपी बड़ा ही कारगर होती है lब्रुश फाईफ ने “Oil Pulling Therapy: Detoxifying and Healing the body through Oral Cleansing” नाम से एक पुस्तक लिखी है जिसमे इसके लाभ बताएं हैl

एक चम्मच सुरजमुखी /नारियल /तिल्ली का तेल मुहं में भर कर १५ मिनट तक घुमाएँl इस तेल की एक भी बूंद निगलनी नहीं हैlप्रयोग के आधा घंटा पूर्व व आधा घंटा बाद तक कुछ लेना नहीं हैl आमतौर पर फायदे के लिए आॅयल पुलिंग तकनीक को कम से कम लगातार चालीस से पचास दिनों तक प्रयोग में लाये जाने के आवश्यकता होती हैl

आयल-पुलिंग के लाभ :-

*यह तकनीक एलर्जी को दूर करने में कारगर है !
*दमे के रोगीयों में भी इसे लाभकारी पाया गया है !
* उच्चरक्तचाप के रोगियों में भी इसे फायदेमंद देखा गया है !
*कब्ज ,माइग्रेन एवं इन्सोमनीया जैसी अवस्था में भी इस तकनीक का प्रयोग लाभकारी है l
* मसूड़ों और दाँतों से समबन्धित समस्याओं में इस तकनीक के तत्काल फायदे को महसूस किया जा सकता हैl

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