क्या ग्रीन टी स्वास्थ्य के लिए अच्छी है?

ग्रीन टी एक प्रकार की चाय  ही होती है, जो कैमेलिया साइनेन्सिस   नामक पौधे की पत्तियों से बनायी जाती है। यह  मात्र प्रोसेस्सड   की हुई नहीं होती हैl

अध्ययनों के अनुसार दांतों के लिए भी ग्रीन-टी काफी लाभदायक है। जीवाणुविषाणु और गले के संक्रमण से भी यह बचाव करती है। ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं, जो दांतों को केविटी से बचाते हैं। इसके अलावा कैंसर से बचाव, ब्लैडर, कोलन, इसोफेगल, पैनक्रियाज, रेक्टम और पेट के कैंसर से ग्रीन टी काफी बचाव करती है। इसमें उपस्थित तत्व ऐसी कोशिकाओं को कम या न के बराबर पनपने देते हैं। इससे खून के थक्के जमने की समस्या भी कम होती एंटी इंफ्लेमेटरी होने के कारण इसमें दर्द को कम करने की क्षमता होती है। इसमें उपस्थित कुछ एंटी-ऑक्सीडेंट्स ऑर्थराइटिस के खतरे को कम भी करते हैं। ग्रीन टी यकृत की दो तरह से सुरक्षा करती है। पहले तो यह लीवर की कोशिकाओं की सुरक्षा करती है और दूसरे प्रतिरोधी प्रणाली को भी मजबूत बनाती है। रात को सोते वक्त और भूख लगने पर कैफीन नहीं पीना चाहिये। रात को पीने से यह भूख बढ़ाता है और नींद में समस्या आती है। जबकि ग्रीन टी रात में भी पी सकते हैं, क्योंकि इसमें सिर्फ कैफीन की मात्रा कम होती है।

एक दिन में दो कप से ज्यादा ग्रीन टी पीना नुकसानदेह हो सकता है. कई दूसरे पेय पदार्थों की तरह ग्रीन टी में भी कैफीन पाया जाता है जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. बहुत अधि‍क मात्रा में ग्रीन टी पीने से सिर दर्द, पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी, डायरिया और घबराहट की शिकायत हो सकती है.

गर्भवती महिलाओं को ग्रीन टी नहीं पीने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा बढ़ जाता हैl

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साधना में बाधा : पिंड में असंतुलन (Planetary Imbalances)

स्वस्थ शरीर साधना हेतु जरूरी हैlइसके अभाव में अंतर्यात्रा नहीं की जा सकती हैl  शरीर को स्वस्थ रखने हेतु सही विचारों का होना जरूरी हैl इस हेतु व्यक्तिमें नो दोषों का समाधान करना चाहिए l
1 वात दोष
2 पित्त दोष
3 कफ दोष
4 जोडों में दर्द
५ सरदर्द
6 दस्त
7 कब्ज
8 मूत्र  आने की आवृति में गडबड

9 स्नायविक असंतुलन

एक साधक को अपनी विचार प्रक्रीया को बदलते हुए उपरोक्त दोषों का समाधान आयुर्वेद, आहार  व योगिक  प्रक्रियाओ को अपना कर साधना करनी चाहिए l दोष अनुरूप समाधान  आगे  कभी बताया जायेगा l

प्रात: शहद व लहसुन ले कर मोटापा, कोलेस्ट्रोल घटाएं व रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाए

शहद और लहसुन दोनों ही ऐसी चीजें हैं जिनका इस्तेमाल करने से हमारे शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। एक तरफ जहां लहसुन में एलिसिन और फाइबर शामिल होता है जोकि हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है।

  1. शहदऔरलहसुनकोमिलाकरइसकासेवनकरनेसेहमारेशरीरमेंमौजूदअतिरिक्तचर्बीकमहोजातीहै। इसीकेसाथमोटापेसेभीआपकोछुटकारामिलताहै।
  2. लहसुन और शहद इम्यूनिटी बढ़ाए -लहसुन और शहद के मेल से इस घोल की शक्ति बढ जाती है और फिर यह इम्यून सिस्टम को मजबूत कर देता है. इम्यून सिस्टम मजबूत होने से शरीर मौसम की मार से बचा रहता है और उसे कोई बीमारी नहीं होती.
  3.  लहसुन और शहद दिल की सुरक्षा करे -इस मिश्रण को खाने से हृदय तक जाने वाली धमनियों में जमा वसा निकल जाता है, जिससे खून का प्रवाह ठीक प्रकार से हृदय तक पहुंच पाता है। इससे हृदय की सुरक्षा होती है।
  1.  लहसुन और शहद फंगल इंफेक्‍शन से बचाए-फंगल इंफेक्‍शन, शरीर के कई भागों पर हमला करते हैं, लेकिन एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरा यह मिश्रण बैक्‍टीरिया को खतम कर के शरीर को बचाता है।इससे जुकाम व गले की खराश ठीक हो जाते है
  1.  लहसुन और शहद डीटॉक्‍स करे-यह एक प्राकृतिक डीटॉक्‍स मिश्रण है, जिसे खाने से शरीर से गंदगी और दूषित पदार्थ बाहर निकलता है।

शवासन सबसे कठिन व सबसे महत्वपूर्ण आसन क्यों व कैसे है?

 

हमारा जीवन तनावग्रस्त होने  से हमारे शरीर व मन खीचें हुए रहते हैl  शवासन में इन दोनों को शिथिल कर विश्राम करते हैl  मन व तन को शिथिल करना बड़ा कठिन है इसलिए शवासन कठिन आसन हैl यह महत्वपूर्ण भी इसीलिए है चुकि इस आसन से जीवन के तनाव कम होते हैl  श्वसन को मंद करने से शांति प्राप्त होती हैl शरीरके एक एक अंग पर ध्यान ले जा कर उसे  शिथिल करना सम्भव है क्योंकि इस निर्देश में  आवेश यानि कोई पूर्वाग्रह नही होता हैl   इससे मांसपेशीया  व आन्तरिक अंग शिथल होते  हैl इसमें जितनी सजगता बढ़ाते है उतनी ही विश्राम की गहराई बढती  जाती हैl शवासन एक कला ही नही एक विज्ञानं भी हैl

दर्द निवारण हेतु ग्वासा (guasa)थेरेपी/ पंचगव्य सेल थेरेपी

यह एक चीनी एकुप्रेसर की तरह की वैकल्पिक चिकित्सा विधि है जिसमे त्वचा को विशेष ब्रश से रगडा जाता हैlइससे शरीर में रक्त, स्नायु व लिम्फ कोशिकाओ में डीटोक्सीफिकेशन होता हैl इसलिए इसे सेल थेरेपी भी कहते हैl सभी प्रकार के दर्द निवारण में यह बहुत कारगर हैl शरीर में अकडन दूर होती हैl
यह रुके हुए प्राण को प्रवाहित कर देता है जिससे व्यक्ति स्वस्थ हो जाता हैl
उक्त थेरेपि संधियों में दर्द, अस्थमा ,लकवा , कफ , बुखार ,एलर्जी ,सुजन में लाभदेय हैl
इस चिकित्सा हेतु हीलर डॉ शंकर गहलोत,शिवगंज( ०९९२९२४७८९४) से सम्पर्क कर सकते हैlस्वास्थ्य सेतु में इनका शिविर  होते हैl