कैंसर का उपचार नहीं है लेकिन इसे होने से निश्चित रोक सकते है

तम्बाकू,रिफाइंड तेल व गहन अवसाद न हो तो भी कैंसर न हो इस हेतु निम्न कार्य करें :-

1 नियमित विटामिन डी ५००० IU विटामिन K2 के साथ ले– यह आपकी प्रतिरोध क्षमता बढ़ाएगाl

विटामिन डी  की कमी होने पर शरीर में निम्न रोग हो सकते है-उच्च रक्तचाप एवं ह्रदय सम्बन्धित सभी रोग ,अवसाद ,हड्डियों का निर्माण  सही तरीके से नहीं होना ,प्रतिरोध क्षमता का घटना  आदि.

गोली न लेना चाहे तो प्रतिदिन आधा घंटा धुप में बैठेl

2 मेग्निसियम ४०० mg प्रतिदिन ले-एक शोध में जिन चूहों में मैग्नीशियम की कमी थी उन्हें कैन्सर अधिक हुआ l इससे स्पस्ट होता है की मेग्नीसियम कैंसर रोधी तत्व है l घुटनों में दर्द,   उच्च रक्तचाप , मधुमेह ,शरीर में दर्द ,  मांसपेशियों में खिचाव,ऐठन,शुन्यता, झनझनाहट का कारण मैग्नीशियम की कमी हैl रक्त नलिकाओं एवं स्न्नायुओं में दर्द  एवं असुविधा का कारण भी इसकी कमी हैl

ज्यादातर सभी खाद्य पदार्थों में मैग्नीशियम आसानी से उपलब्ध  होता हैl  साबुत अनाज, फल,गहन हरी पत्तेदार सब्जियां,नट्स,फलियां सेम जैसे शाकाहारी स्रोतों में  खूब होता  हैं l मटर,  टोफू, सोयाबीन का आटा, बादाम, काजू, केला ,कद्दू, अखरोट और पूरे अपरिष्कृत अनाज भी मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।लेकिन यह बहुत कम मात्रा में मिलता हैl इसलिए इसे अलग से लेने की जरूरत हैl

 

3 ओमेगा 3 प्रतिदिन ५०० mg ले या ३० -५० ग्राम अलसी खाएंl या कोल्ड प्रेस्सेड अलसी का आयल 2 चम्मच रोज ले  तो कैंसर  होने की सम्भावना कम है l

साथ ही नाडी शोधन प्राणायाम करने से कैंसर होने की सम्भावना नहीं के बराबर हैl

 

वजन घटाने व कार्य क्षमता बढ़ाने का शर्तिया घरेलू नुस्खा

अपनी कार्य क्षमता बढ़ा कर सफल होने, स्फूर्ति वान होने व चर्बी घटा कर तन्दरूस्त होने का यह आजमाया हुआ नुस्खा है। अनेक लोगों ने इसका प्रयोग कर सफलता पाई है।
नुस्खा निम्न प्रकार है:

मिश्रण: 50 ग्राम मेथी$ 20 ग्राम अजवाइन$10 ग्राम काली जीरी

बनाने की विधिः- मेथी, अजवाइन तथा काली जीरी को इस मात्रा में खरीद कर साफ कर लें। तत्पश्चात् प्रत्येक वस्तु को धीमी आंच में तवे के उपर हल्का सेकें। सेकने के बाद प्रत्येक को मिक्सर-ग्राइंडर मंे पीसकर पाउडर बनालें। तीनों के पाउडर को मिला कर पारदर्शक डिब्बे में भर लेवें। आपकी अमूल्य दवाई तैयार है।

काली जीरी व कालाजीरा अलग अलग होते हैl

दवाई लेने की विधिः– तैयार दवाई को रात्रि को खाना खाने के बाद सोते समय 1 चम्मच गर्म पानी के साथ लेवें। याद रखें इसे गर्म पानी के साथ ही लेना है। इस दवाई को रोज लेने से शरीर के किसी भी कोने मंे अनावश्यक चर्बी/ गंदा मैल मल मुत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है, तथा शरीर सुन्दर स्वरूपमान बन जाता है। मरीज को दवाई 30 दिन से 90 दिन तक लेनी होगी।
लाभः– इस दवाई को लेने से न केवल शरीर मंे अनावश्यक चर्बी दूर हो जाती है बल्किः-

शरीर में रक्त का परिसंचरण तीव्र होता है। ह्नदय रोग से बचाव होता है तथा कोलेस्ट्रोल घटता है।
पुरानी कब्जी से होेने वाले रोग दूर होते है। पाचन शक्ति बढ़ती है।
गठिया वादी हमेशा के लिए समाप्त होती है।
दांत मजबूत बनते है। हडिंया मजबूत होगी।
आॅख का तेज बढ़ता है कानों से सम्बन्धित रोग व बहरापन दूर होता है।
शरीर में अनावश्यक कफ नहीं बनता है।
कार्य क्षमता बढ़ती है, शरीर स्फूर्तिवान बनता है। घोड़े के समान तीव्र चाल बनती है।
चर्म रोग दूर होते है, शरीर की त्वचा की सलवटें दूर होती है, टमाटर जैसी लालिमा लिये शरीर क्रांति-ओज मय बनता है।
स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा कदम आयु भी बढ़ती है, यौवन चिरकाल तक बना रहता है।
पहले ली गई एलोपेथिक दवाईयां के साइड इफेक्ट को कम करती है।
इस दवा को लेने से शुगर (डायबिटिज) नियंत्रित रहती है।
बालों की वृद्धि तेजी से होती है।
शरीर सुडौल, रोग मुक्त बनता है।
स्वामी रामदेवजी के योग करने से दवाई का जल्दी लाभ होता है।
परहेजः– 1. इस दवाई को लेने के बाद रात्रि मंे कोई दूसरी खाद्य-सामग्री नहीं खाएं।

2. यदि कोई व्यक्ति धुम्रपान करता है, तम्बाकू-गुटखा खाता या मांसाहार करता है तो उसे यह चीजे छोड़ने पर ही दवा फायदा पहुचाएंगी।

3. शाम का भोजन करने के कम-से-कम दो घण्टे बाद दवाई लें।

कलौंजी-एक रामबांण दवा, उसका सेवन किस रोग में व कैसे करें?

खुदा ने क्या खूब ये कलौंजी बनाई है।
जो मौत के सिवा हर मर्ज की दवाई है।

कलौंजी को विभिन्न बीमारियों में इस प्रकार प्रयोग किया जाता है।

1-कैंसरः- कैंसर के उपचार में कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें। लहसुन भी खुब खाएं। 2 किलो गैंहू और 1 किलो जौ के मिश्रित आटे की रोटी 40 दिन तक खिलाएं। आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें।

2-खांसी व दमाः- छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन बड़ी चम्मच तेल रोज पीयें और पानी में तेल डाल कर उसकी भाप लें।

3-डायबिटीजः- एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीस कर चूर्ण बना लें। आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें।

4-हृदय रोग, ब्लड प्रेशर और हृदय की धमनियों का अवरोधः- जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें, रोज सुबह लहसुन की दो कलियां नाश्ते के पहले लें और तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें। यह उपचार एक महीनें तक लें।

5-कमर दर्द और आर्थाइटिसः- हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें। 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा।

6-अम्लता और आमाशय शोथः- एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल एक कप दूध में मिलाकर रोज पांच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफें दूर हो जाती है।

7-बाल झड़नाः- बालों में नीबू का रस अच्छी तरह लगाये, 15 मिनट बाद बालों को शेम्पू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें, सूखे बालों में कलौंजी का तेल लगायें एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बन्द हो जायेगा।

8-दस्त या पैचिशः-एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लें दस्त ठीक हो जायेगा।

9रूसीः- 10 ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल और 30 ग्राम पिसी मेंहन्दी को मिला कर गर्म करें। ठंडा होने पर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धो कर शैम्पू कर लें।

10-मानसिक तनावः- एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं।

11-स्त्री गुप्त रोगः- स्त्रियों के रोगों जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता व रक्त स्त्राव आदि के लिए कलौंजी गुणकारी है। थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो ग्लास पानी में डाल कर उबालें, आधा चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर दिन में दो बार पियें। बैंगन, आचार, अंडा और मछली से परहेज रखें।

12-पुरूष गुप्त रोगः- स्वप्नदोष, स्थंभन दोष, पुरुषहीनता आदि रोगों में एक कप सेब के रस में आधी छोटी चम्मच तेल मिला कर दिन में दो बार 21 दिन तक पियें। थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज मलें। तेज मसालेदार चीजों से परहेज करें।

स्टेरॉइड लेने के 8 साइड इफेक्ट

स्टेराइड के इस्तेमाल के कई गंभीर साइड इफेक्ट हैं।

  •  इससे मौत तक हो सकती है।
  • यह आदमी को पूरी तरह से नपुंसक बना सकता है।
  • यह चेहरे को मुंहासों से भर सकता है
  • और आपको बेहद गुस्सैल भी बना सकता है।
  • इससे लेनेवाले का हार्मोन संतुलन बिगड़ता हैl
  • कार्डियो सिस्टम खराब होता हैl
  • हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैl
  • लीवर,गुर्दे ख़राब हो जाते  हैl

शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां इसके नुकसान पहुंचाने की संभावना नहीं हो। इसलिए कभी कोई डॉक्टर गम्भीर रोग के सिवाय इसे लेने की सलाह  नहीं देता। इसीलिए दुनियाभर में इसकी खुली बिक्री पर बैन लगा हुआ हैl स्टेरॉइड कोई नशा नहीं होता मगर यह लत भी बन जाता है। अगर आपने एक बार इसे लिया तो आप इसे दोबारा लेंगे। जो नतीजे कोई डाइट या कोई दवा नहीं दे पाती वो स्टेरॉइड दे देता है, इसलिए लोग बार बार इसका इस्तेमाल करते हैं जो की बहुत घातक है।

रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने हेतु नियमित गिलोय का सेवन करें

 

गिलोय को आयुर्वेद में अमृता भी कहा जाता है क्योंकि यह त्रिदोष नाशक हैl नीम पर चढी हुई गिलोय उसी का गुण अवशोषित कर लेती है ,इस कारण आयुर्वेद में वही गिलोय श्रेष्ठ मानी गई है जिसकी बेल नीम पर चढी हुई हो ।

कैंसर की बीमारी में 6 से 8 इंच की इसकी डंडी लें इसमें wheat grass का जूस और 5-7 पत्ते तुलसी के और 4-5 पत्ते नीम के डालकर सबको कूटकर काढ़ा बना लें।

मधुमेह ,बुखार व  वात व्याधि में यह बहुत गुणकारी हैl

गिलोय में एंटी ओक्सिडेंट गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते है | गिलोय के सेवन से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है , जिससे व्यक्ति जल्दी बीमार नहीं होता एवं लम्बे समय तक स्वस्थ रहता है | गिलोय के रस का नियमित सेवन करने से शरीर के गुर्दे और जिगर स्वस्थ रहता है | शरीर में मूत्र सम्बन्धी विकारो में भी गिलोय अच्छा परिणाम देती है  | नियमित सेवन करने से शरीर बीमारियों से बच सकता है |

 

सम्बन्धीत पोस्ट्स:

गिलोय रामबाण इलाज है

गिलोय की पहचान, गिलोय के फायदे और नुकसान

स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचाव हेतु आयुर्वेदिक पोटली को सूंघे एवं प्राणायाम करे

जोर से हंसीए , तनाव स्वत भाग जायेंगे