पटकथा लेखन एक कला :उसमें पारंगत कैसे हो ?

मनोहर श्याम जोषी की प्रसिद्ध कृति: पटकथा लेखन एक परिचय


यह हिन्दी में पटकथा लेखन पर सर्वश्रेष्ठ कृति है। इसमें पटकथा के सभी अंगोे का विस्तृत उदारहण सहित वर्णन है। पटकथा लिखने से पूर्व इसको पढ़ना बहुत जरुरी है। इसमें फिल्म की पटकथा एवं टीवी धारावाहिको की पटकथा पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। फिल्म मेकिंग, फिल्म सम्पादन,संवाद लेखन, कैमरा टेकनिक एवं षाॅट की जानकारी है। जो फिल्म लेखन के लिए जरुरी है। इसमें 23 पाठ है।
आईडिया, प्रिमाईस, वन मिनट सिनोप्सीस, टू मिनट मूवी, ट्रीटमेन्ट,(आम्बियांस और हाइलाइट्स), स्टेप आउट लाईन,, फिल्म के तीन अंग-सेटअप, टकराहट,चरमोत्कर्ष और समाधान, प्लाॅट पाॅइंट, षूटिंग स्क्रीप्ट ,एक्शन पाॅइंट को विस्तार से समझाया गया है।
मनोहर ष्याम जोषी हिन्दी के जाने माने रचनाकार है। वैसे भारत में टीवी धारावाहिकों के आप जन्मदाता है। कुरु-कुरु स्वाहा, कक्काजी कहिन आदि प्रसिद्ध उपन्यास लिखे है। हम लोग एवं बुनियाद जिसे प्रसिद्ध धारावाहिक आपने ही लिखे थे। है राम, अप्पू राजा, पापा कहते है आदि फिल्मों की पटकथाएं आपने लिखी है।
प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन , नई देल्ही
मूल्य : रू 75

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क्या आप कृष्ण से कम भाग्यशाली है!

योगेश्वर कृष्ण

आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर है! इसमें हॅसने की जरुरत नहीं है।

इसके लिए श्री कृष्ण के जीवन से अपने जीवन की परिस्थिति की तुलना करने की जरुरत है।

हमारे में से किसे का जन्म जेल में नहीे हुआ। जबकि योगेश्वर कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था। उनके मां बाप दोनों राजा होकर कंस के वहाँ बन्दी थे। आपके मां बाप आपके जन्म के समय बन्दी तो न थे।

किसी ने तुम्हें स्तनों पर जहर लगाकर दूध तो न पिलाया ? जबकि पूतना ने कृष्ण को मारने के लिए यह किया था। मां बाप के होते हुए कृष्ण यशोदा केे पास पले।हमारे मे से अधिकतर लोगों का पालन पोषण तो हमारी मां ने ही किया है।

बचपन में उन्हें गाय चराने भेजा गया। मुख्यतः हममे से किसी को भी जानवरों को चराने के लिए तो नहीं भेजा गया।

कम से कम आपके मामा आपको मारना तो नहीं चाहते थे ?

कृष्ण को उनकी प्रेमिका राधा बिछुड़ने के बाद शेष जीवन में फिर कभी ना मिली।

राजा होकर महाभारत के युद्ध में अर्जुन का रथ संचालन करना पड़ा। आज की भाषा में कहे तो वाहन चालक की भूमिका निभानी पड़ी। फिर चिन्ता की क्या बात है।

हुई न आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर ।इसे सदैव यद् रखे l

विपरीत परिस्थितियों के होते हुए महान् कार्य किये। यदि अपनी आत्म छवि एवं आत्म विश्वास है तो आप भी अपना सोचा प्राप्त कर सकते है। आपकी आत्म छवि ही आपको सफलता व सुख दिला सकती है।

कृतज्ञता को महसूस कर जीवन बदले,आनन्दित हो

धन्यवाद देना कृतज्ञता ज्ञापन है। कृतज्ञता प्रकट करना विनम्रता व मानवता है। यह बहुत बड़ी नैतिकता है। कृतज्ञता व्यक्त करने से हम बदलते है, हमें खुशी मिलती है।दूसरे का ऐहसान मानते है। यह दूसरे के योगदान को स्वीकारना है। इससे सम्बन्ध मजबूत बनते है।अस्तित्व के प्रति आभार व्यक्त करने से प्राप्ति बढ़ती है। कृतज्ञ होने पर  अस्तित्व दुगुना देता है।ऐसे में यह एक आन्नददायक कृत्य बन जाता है। वाल्मिकी रामायण में लिखा है कि परमात्मा ने जो कुछ दिया है उसके लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करो। लेसिंग ने लिखा है कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता- पूर्ण भावना स्वयं ही एक प्रार्थना है। कृतज्ञता की शक्ति को पहचानिए।कृतज्ञता रूपान्तरण का बड़ा टूल हैl  Related Posts:

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धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे

जीवन एक अनुपम उपहार है

 

दिवाली की शुभकामनाएं

हम  चाहे लाख दिये और
मोमबत्तीया जलाऐ इनसे
हमारे  जीवन में रोशनी
होने वाली नही।

असली दिवाली तो उस दिन
ही समझना जिस दिन हमारे
भीतर का दिया जले।

उससे पहले तो सब अंधकार
ही है ।

और राम के घर लौटने
से हमारा  क्या लेना देना,
बात तो उस दिन बनेगी
जब हम अपने
भीतर लौटोगे

तभी  होगी असली दिवाली l

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सभी दवाओं के साईड इफेक्ट होते हैlउच्च रक्तचाप की गोली निरंतर लेते रहने से घातक  दुष्प्रभाव होते हैl प्रत्येक रोगी में साईंड इफेक्ट अलग अलग होते हैl एक ही दवा के प्रभाव भिन्न भिन्न रोगी में  अलग अलग  हो सकते हैl

उच्च रक्तचाप की गोली के लेते रहने से जी घबराना ,उलटी होना , कफ बनना  व थकान बढ़ जाती हैl कुछ लोगो को कब्ज ,दस्त लगना ,वजन बढना या घटना,सरदर्द व सेक्स में रूचि का घटना भी शामिल हैl ऐ सी इ इन्हिबिटोर्स के लेने से कफ बढ़ता हैl डाईयुरेटिकस लेने से पेशाब की आवृति बढ़ जाती हैl

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