Art of Living · Articles · Life-Management · Meditation · Self-Healing · success

हाई बी पी की गोली निरन्तर लेने के साईड इफेक्ट

 

सभी दवाओं के साईड इफेक्ट होते हैlउच्च रक्तचाप की गोली निरंतर लेते रहने से घातक  दुष्प्रभाव होते हैl प्रत्येक रोगी में साईंड इफेक्ट अलग अलग होते हैl एक ही दवा के प्रभाव भिन्न भिन्न रोगी में  अलग अलग  हो सकते हैl

उच्च रक्तचाप की गोली के लेते रहने से जी घबराना ,उलटी होना , कफ बनना  व थकान बढ़ जाती हैl कुछ लोगो को कब्ज ,दस्त लगना ,वजन बढना या घटना,सरदर्द व सेक्स में रूचि का घटना भी शामिल हैl ऐ सी इ इन्हिबिटोर्स के लेने से कफ बढ़ता हैl डाईयुरेटिकस लेने से पेशाब की आवृति बढ़ जाती हैl

Related Posts:

थायराइड की गोली निरन्तर लेने से उसके घातक साइड इफेक्ट

Side-effects of blood pressure medications

असाध्य रोगों का सामना कैसे करेंः उक्त पुस्तिका डाउनलोड करें

जीवन में संतोष कैसे प्राप्त करे

स्वस्थ होने में साझेदारीः आत्मचिकित्सक बनें

Advertisements
Art of Living · Articles · Life-Management · Personality · Self-Healing · success · Uncategorized

विटामिन बी 12 की कमी को पूरा करने चावल का मीठा ओलिया खाएँ

शाकाहारी मित्रोँ में अमूमन बी12 की कमी पाई जाती हैl बी 12 की गोली व इंजेक्शन के अतिरिक्त दूध ,दही व खमीरी कृत आहार भी हैl इन सब में से चावल का ओलिया अच्छा विकल्प हैl

Rice curd cure Vitamin B 12 deficiency

ओलिया बनाने की विधि:
एक व्यक्ति के लिए निम्न मात्रा ले l
सांय एक मुट्ठी चावल पकाए, उसमे से मांड नहीं निकाले l चावल में थोडा सा पानी ज्यादा डालेl फिर उसे ठंडा कर ले l फिर उसमे एक चुटकी पीसी हुई राइ, एक चुटकी सेंधा नमक ,8 चम्मच दही व 15 किशमिश डाले. रात भर उसे रखे रहे l इसे फ्रीज में नहीं रखेl प्रातः यह विटामिन 12युक्त ओलिया तैयार हैl इसे स्वादानुसार दही व शक्कर डाल कर नाश्ते में या लंच में ले ले l
महीने भर के बाद बी 12 की जाँच पुनः करा ले lउक्तओलिया वातनाशक एवं पाचन में सहयोगी हैl

 

Related Posts:

शाकाहारी तरीके से घर पर विटामिन B-12 बनाने की विधि , How to make vitamin B12 at home

ऊर्जावान बने रहने व वजन घटाने सूर्य नमस्कार करें

प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने व स्वस्थ रहने हेतु विटामिन डी अति आवश्यक है

मैग्नीशियम की कमी दूर कर अधिकांश रोगों को भगाए

Art of Living · Articles · Life-Management · Meditation · Self-Healing

खोए हुए हम खुद है और खोज रहे है भगवान को,सोए हुए हम खुद है और जगा रहे भगवान को

 हमें  अपना तो कुछ  पता नहीं और परमात्मा का पता करना चाहते है,यही विडम्बना हैl सामने पड़े पत्थर को जानते नहीं और विराट में समाये प्रभु को पाने चले हैl  प्रार्थना की जरूरत हमें है,उससे हमारे भीतर शक्ति जगती हैl परमात्मा को हमारी प्रार्थना की आवश्यकता नहीं है l परमात्मा हमारे भीतर है,किसी मूर्ति में छिपा हुआ नहीं हैl खुद को तराशने की आवश्यकता हैl मूर्ति  पूजा उसमे सहायक हो सकती है यदि पूजा समझ के की जाय l

 

 

 

कर्म कांड में डूबा हुआ व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त नहीं कर सकता हैlअपने को स्वीकार कर इस क्षण जीने में ही उपलब्धी हैl वर्तमान में जीना ही परम जीवन को पाना है,परमात्मा को उपलब्ध होना हैl  जीवन अन्यत्र  कहीं नहीं ,जीवन अभी और यही हैl

Related Posts:

समस्या अन्दर है, बाहर नहीं, सुलझाए भी अंदर से

अन्तर्यात्रा, होश बढ़ाने में नादानुसंधान सहायक है

स्वस्थ रहने हेतु जम कर ताली बजाए

ऊर्जावान बने रहने व वजन घटाने सूर्य नमस्कार करें

 

Art of Living · Articles · Life-Management · Personality · Self-Healing · Spirituality · Stress Management · Uncategorized

मीठा खाने की आदत अफीम खाने से ज्यादा नशीली व हानिकारक

शक्कर एक तरह का जहर है जो कि मूख्यतः मोटापे, हृदयरोग,सभी तरह के दर्द व कैंसर का कारण है । भारतीय मनीषा ने भी इसे सफेद जहर बताया है । डाॅ0 मेराकोला ने इसके विरूद्ध बहुत कुछ लिखा है । डाॅ0 बिल मिसनर ने इसे प्राणघातक शक्कर-चम्मच से आत्महत्या बताया है । डाॅ0 लस्टींग ने अपनी वेब साईट डाॅक्टर में इसे विष कहा है । रे कुर्जवले इस सदी के एडिसन जो कि 10 वर्ष अतिरिक्त जीने अपने वार्षिक भोजन पर 70 लाख रूपया खर्च करते हैं ने अपने आहार में अतिरिक्त चीनी लेना बन्द कर दी है ।

अधिक शक्कर से वजन व फेट दोनों बढ़ते हैं । डाॅ0 एरान कैरोल तो स्वीटनर से भी चीनी को ज्यादा नुकसानदेह बताते हैं । चीनी खाने पर उसकी आदत नशीले पदार्थ की तरह बनती है । प्राकृतिक शर्करा जो फल व अनाज में तो उचित है । sugar is poision
हम जो चीनी बाहर से भोजन बनाने में प्रयोग करते हैं वह विष का कार्य करती है । यह शरीर के लिए घातक है । डिब्बाबन्द व प्रोसेस्ड फूड में चीनी ज्यादा होती है उससे बचे । अर्थात् पेय पदार्थ व मिठाईयांे के सेवन में संयम बरतना ही बेहतर है।

चीनी के विकल्प
आप जितनी कम चीनी खाएंगे, उतने ही स्वस्थ रहेंगे। मधुमेह पीडि़तों को चीनी का कम सेवन करना चाहिए। प्राकृतिक मिठास जैसे फल, अंजीर का सेवन करें। स्वस्थ लोग चीनी की बजाय गुड़, शहद, खजूर व फलों का सेवन करें। इससे चीनी की तुलना में खून में शुगर का स्तर कम तेजी से बढ़ता है। शहद चीनी का बेहतर व पोषक विकल्प है।
चीनी के कृत्रिम विकल्पों में स्टेविया,  प्रमुख हैं। स्टेविया सामान्य चीनी से 300 गुना अधिक मीठी है, पर इसके सेवन से खून में शर्करा का स्तर अधिक नहीं बढ़ता।
Related Posts:

 

Articles · Life-Management · Personality · Self-Healing · Stress Management

प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने व स्वस्थ रहने हेतु विटामिन डी अति आवश्यक है

विटामिन डी प्रतिरोध शक्ति बढ़ाता हैl अथार्त बीमारीयों से निपटने व स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक हैl विटामिन-डी शरीर के विकास, हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। धूप के संपर्क में आने पर त्वचा इसका निर्माण करने लगती है। हालांकि यह विटामिन खाने की कुछ चीज़ों से भी प्राप्त होता है,लेकिन इनमें यह बहुत ही कम मात्रा में होता है।  विटामिन डी वसा-घुलनशील विटामिन होता है जो शरीर को कैल्सियम सोखने में मदद करता है।

वयस्कों में विटामिन-डी की कमी के लक्षण

– दर्द या तेज दर्द

– कमजोरी एवं थकान

-ओस्टियोपोरोशिस-  घुटनों , पसलियों और पैरों आदि की हड्डियों में दर्द,

– कार्डियोवेस्क्युलर रोग

– याददाश्त कमजोर होना

विटामिनडी मधुमेउच्च रक्तचाप, ग्लुकोल इनटॉलरेंस और मल्टिपल स्क्लेरोसिस आदि बीमारियों से बचाव और इलाज में महत्वपूर्ण हो सकता है। मोटापा : रक्त में मौजूद विटामिन-डी को फैट की कोशिकाएं अवशोषित कर लेती हैं, जिससे शरीर को इसका फायदा नहीं मिल पाता है।
इसके मुख्य स्रोतों में अंडे का पीला भाग, मछली के तेल, विटामिन डी युक्त दूध और मक्खन होते हैं। इनके अलावा मुख्य स्रोत धूप सेंकना होता है।आज के समय में तो विटामिन डी की गोली लेना ही उपयुक्त हैl

Related Posts:

मैग्नीशियम की कमी दूर कर अधिकांश रोगों को भगाए

विश्राम क्यों जरूरी : विश्राम न कर पाने के दुष्परिणाम

चीनी तम्बाकु से तीन गुना अधिक हानिकारक

http://www.taked3.com

Art of Living · Bloging · Life-Management · Meditation · Personality · Self-Healing · Spirituality · Stress Management

रोग मुक्त होने व विष मुक्त होने:ऑयल पुलिंग

मुहं में तेल का कुल्ला करने से शरीर के टोक्सिंस बाहर निकल जाते हैंl यह एक आयुर्वेदिक विधि है जिसे विज्ञान भी स्वीकारता हैंl डॉ .कराच जिन्होंने आयल-पुलिंग पर एक विस्तृत शोध किया है उन्होंने पाया है कि आयल-पुलिंग के बाद निकले एक बूंद थूक में जीवाणुओं के लगभग 500 प्रजातियाँ बाहर आ जाती हैं ,अर्थात शरीर से जीवाणुओं को बाहर करने में आयल-पुलिंग थेरेपी बड़ा ही कारगर होती है lब्रुश फाईफ ने “Oil Pulling Therapy: Detoxifying and Healing the body through Oral Cleansing” नाम से एक पुस्तक लिखी है जिसमे इसके लाभ बताएं हैl

एक चम्मच सुरजमुखी /नारियल /तिल्ली का तेल मुहं में भर कर १५ मिनट तक घुमाएँl इस तेल की एक भी बूंद निगलनी नहीं हैlप्रयोग के आधा घंटा पूर्व व आधा घंटा बाद तक कुछ लेना नहीं हैl आमतौर पर फायदे के लिए आॅयल पुलिंग तकनीक को कम से कम लगातार चालीस से पचास दिनों तक प्रयोग में लाये जाने के आवश्यकता होती हैl

आयल-पुलिंग के लाभ :-

*यह तकनीक एलर्जी को दूर करने में कारगर है !
*दमे के रोगीयों में भी इसे लाभकारी पाया गया है !
* उच्चरक्तचाप के रोगियों में भी इसे फायदेमंद देखा गया है !
*कब्ज ,माइग्रेन एवं इन्सोमनीया जैसी अवस्था में भी इस तकनीक का प्रयोग लाभकारी है l
* मसूड़ों और दाँतों से समबन्धित समस्याओं में इस तकनीक के तत्काल फायदे को महसूस किया जा सकता हैl

Related posts:

स्वास्थ्य सेतु क्या है ?

हमारी जीवन शैली रोगों की जनक हैं –स्वास्थ्य-सेतु

स्वयं को जगाने हेतु ओम साधना करें

विश्राम क्यों जरूरी : विश्राम न कर पाने के दुष्परिणाम

Art of Living · Articles · Life-Management · Personality · Self-Healing · Stress Management

शौच करने का सही तरीका ताकि बवासीर,लकवा व दांतों के रोग ना हो

विधिपूर्वक शौच करने से दातों के रोग नहीं होते हैl  उषःपान(प्रातः जल सेवन) के बाद कुछ देर घुमने से मलत्याग सरलता से होता हैl

विधि:

भारतीयशैली के टॉयलेट का उपयोग करें l  शौच  हेतु  उकड़ू आसन में बैठेl  पश्चिमी शैली की टॉयलेट के प्रयोग में मलद्वार पूरा नहीं खुलता है नहीं पेट पर दबाव पड़ता हैlशौच करने का सही तरीका

दोनों हाथ ठुड्डी को पकडे रहे व दांत भींच कर रखे l  शौच या पेशाब के समय दांतों के जबड़ों को आपस में दबाकर रखने से दांत मजबूत रहते हैं।

मल छोड़ते वक्त दांतों को और भींचे और श्वास फेकेंl

शौच करते वक्त मुहं बंद रखे l  तत्समय पढ़ना – बोलना उचित नहीं हैl

सहजता से मलत्याग न होने पर कुछ लोग जोर लगाकर शौच करते हैं किंतु ऐसा करना ठीक नहीं हैl

मल आपके स्वास्थ्य को दर्शाता है, बहुत सूखा या पतला, दुर्गन्धयुक्त, चिपचिपा, रक्त या  सफ़ेद झाग युक्त मल रोग को दर्शाता हैl

 

इजरायली शोधकर्ता डॉ. बेरको सिकिरोव ने अपने शोध के निष्कर्ष में पाया कि सिटिंग मेथड कब्जियत का करण बनती है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्यागने के लिए लगभग तीन गुना अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिसके कारण चक्कर और हृदयतंत्र की गड़बड़ियों के कारण लोग मर जाते हैं।

Related Posts:

आहार चिकित्सा द्वारा कैंसर का इलाज : बुडविज का आहार-विहार

ओम जपने से भीतरी संतुलन बढ़ता

मानव देह का मूल्य

जोर से हंसीए , तनाव स्वत भाग जायेंगे