मुझे चमत्कारिक रूप से अवचेतन मन से मदद कैसे मिली

मैंने अपने अवचेतन मन का उपयोग अनजाने में ही सन् 1978 में किया । जब मैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ता था।  मेरी बचपन में मँगनी हो गई थी। मेरा परिवार शादी करने हेतु मुझ पर दबाव डाल रहा था।  मेरी माँ को उच्च रक्तचाप था।  पिताजी सामाजिक दबावों से व्यथित थे।  इन्हीं कारणों से, मैंने अपने माता-पिता से बात नहीं की।  साथ ही मुझे वह लड़की भी पसन्द नहीं थी।  मैं आई.ए.एस. की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परन्तु मैं इस अनिर्णय की स्थिति से परेशान था।subconscious mind
उस समय मैं अवचेतन मन की शक्ति से परिचित नहीं था।  पर मैंने निश्चय किया कि, “ मैं, एक महीने में निर्णय कर लूँगा कि मुझे विवाह करना है या नहीं।”  कई दिनों तक सोने से पहले बिस्तर में पड़े़-पडे़ मैं स्वयं से पूछता, “क्या मुझे इस लड़की से विवाह करना चाहिये ?” अचानक 31 मार्च, 1978 की रात्रि को, जब मैं नींद में था मुझे एक तेज प्रकाश का आभास मेरे कमरे में हुआ।  एवं साथ ही मैंने एक आवाज सुनी, इस लड़की से शादी कर लो, भविष्य में इससे तुम्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं आयेगी।
आज मैं समझ पाया हूँ कि यह निर्णय मेरे अवचेतन मन से आया था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि उस लड़की से विवाह का प्रस्ताव मेरे अवचेतन की शक्ति से प्रभावित था। और वह निर्णय मेरे जीवन में सफल एवं सकारात्मक रूप में उचित सिद्ध हुआ है।

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डाइबीटीज का स्थाई देशी इलाज

निम्न सात चीजो को अलग अलग कूट पिस कर चूर्ण बन ले lसुबह खाली पेट व सोने से पहले एक चम्मच रोजाना लेl मधुमेह  समय समय पर चेक कराते रहेl
सुखा करेला ———–५०ग्राम
गुडमार       – ———-५०ग्राम
निम्बोली        ———–५०ग्राम
जामुन गुठली ———–५०ग्राम
मेथी           –   ———-५०ग्राम
तेजपत्ता         ———–५०ग्राम
बेलपत्र        ———–2५०ग्राम

इससे मधुमेह  हमेशा के लिए समाप्त हो जाता हैl

सुपर फ़ूड किसे कहते है?

जैसेजैसे सामान्य भोज्यपदार्थों के विशिष्ट गुण पता लगने लगे हैं, वैसेवैसे कुछ विशेषज्ञ उन्हें सुपर की श्रेणी में रखने लगे हैं. इन पदार्थों को सुपरफूड इसलिए कहा जाने लगा है, क्योंकि जरूरी पोषक तत्त्वों के अलावा उन में ऐंटीऔक्सीडैंट होते हैं, जो हमें जवां बनाए रखते हैं और कैंसर जैसे गंभीर रोगों से बचाते हैं. उन में हैल्दी फैट होते हैं ताकि हृदयरोग से बचाव हो सके. उन में फाइबर होते हैं ताकि डायबिटीज और पेट की गड़बड़ी परेशान न करे. उन में फाइटोकैमिकल्स होते हैं, जो हमें रोग नहीं लगने देते.

अलसी ,ब्राउन राईस , दूध=दही ,बिन्स , ग्रीन टी  कुछ प्रमुख सुपरफूड हैं.

त्रिफला एक अमृत रसायन : कायाकल्प करें व गम्भीर रोग दूर करें

त्रिफला के सेवन से अपने शरीर का कायाकल्प कर जीवन भर स्वस्थ रहा जा सकता है | इस त्रिफला चूर्ण जिसे आयुर्वेद रसायन भी मानता है के सेवेन से  शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है | बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की | क्योंकि त्रिफला का 12 वर्षों तक नियमित सेवन हमारे  शरीर का कायाकल्प होता  है |उक्त चूर्ण में हरड,बहेडा व आंवला 1:2:4 की मात्रा होती हैंl

सेवन विधि –

सुबह खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें | इस नियम का कठोरता से पालन करें |
यह तो हुई साधारण विधि पर आप कायाकल्प के लिए नियमित इसका  प्रयोग  कर रहे है तो इसे विभिन्न ऋतुओं के अनुसार इसके साथ गुड़, सैंधा नमक आदि विभिन्न वस्तुएं मिलाकर निम्नानुसार  ले |
अपनी उम्र जितना रत्ती लेना हैl

 ऋतु मास मिलाये जाने वाली वस्तु का नाम मिलाये जाने वाले द्रव्यों का
अनुमानित अनुपात
ग्रीष्म ऋतु  ज्येष्ठ , आषाढ़

 

गुड़ 1/4  भाग
वर्षा ऋतु

 

सावन और भादो

 

सेंधा नमक 1/8 भाग
शरद ऋतु

 

अशिवनी और कार्तिक

 

देशी खांड के
साथ
1/6 भाग
हेमन्त रितु

 

अगहन और पौष

 

सौंठ का
चूर्ण के साथ
1/6 भाग
शिशिर ऋतू

 

 माघ, फागुन,

 

पिप्पली
चूर्ण के साथ
1/8 भाग
बसंत ऋतू

 

 चेत्र , वैसाख

 

शहद के साथ चाटा जा सके
इतनी मात्रा में

इस तरह इसका सेवन करने से एक वर्ष के भीतर शरीर की सुस्ती दूर होगी , दो वर्ष सेवन से सभी रोगों का नाश होगा , तीसरे वर्ष तक सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी , चार वर्ष तक सेवन से चेहरे का सोंदर्य निखरेगा , पांच वर्ष तक सेवन के बाद बुद्धि का अभूतपूर्व विकास होगा ,छ: वर्ष सेवन के बाद बल बढेगा , सातवें वर्ष में सफ़ेद बाल काले होने शुरू हो जायेंगे और आठ वर्ष सेवन के बाद शरीर युवाशक्ति सा परिपूर्ण लगेगा |

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वजन घटाने हेतु सूर्य मुद्रा लगाएँ

जो लोग मोटापा और मधुमेह जैसी समस्याओ से ग्रसित है उनके लिए यह योग मुद्रा बेहद ही फायदेमंद है|

विधि:-

  • सूर्य मुद्रा करने के लिए सबसे पहले तो सिद्धासन,पदमासन या सुखासन में बैठ जाएँ ।
  • अब दोनों हाँथ घुटनों पर रख लें और हथेलियाँ उपर की तरफ रहें|
  • अब सबसे पहले अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ में लगा लें एवं उपर से अंगूठे से दबा लें|
  • इस वक्त आपकी बाकी बची हुई तीनों उंगलियों को बिल्कुल सीधी रहने दे|

 

 

लाभ:-

  1. सूर्य मुद्रा को दिन में दो बार 15 मिनट करने से कोलेस्ट्राल घटता है|
  2. शरीर की सूजन दूर करने में भी यह मुद्रा लाभप्रद है|
  3. इसे करने से बलगम, खांसी, पुराना जुकाम, नजला, सांस का रोग, ज्यादा ठंड लगना तथा निमोनिया आदि रोग दूर हो जाते हैंl
  4. इसके नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव दूर होता है और भय, शोक खत्म हो जाते है|

5. इसे  नियमित करने से व्यक्ति में अंतर्ज्ञान जाग्रत होता है|

6 .इस मुद्रा के अभ्यास से पाचन प्रणाली ठीक होती है किन्तु यदि आपको एसिडिटी और अम्लपित्त की तकलीफ है तो यह मुद्रा ना करे|

 

सावधानियां:-

  • यदि आपका शरीर बहुत अधिक कमजोर है तो आपकोसूर्य मुद्रा नही करनी चाहिए|
  • सूर्य मुद्रा करने से शरीर में गर्मी बढ़ती है इसलिए गर्मियों में इस मुद्रा करने से पहले एक गिलास पानी पी लेना चाहिए।

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