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प्रेरक स्वास्थ्य सम्बन्धी कैपसूल

रोगी आदमी के लिए प्रेम का एक शब्द सौ डाक्टरों से बढ़कर है। -श्री ब्रह्यचैतन्य

प्रेरक स्वास्थ्य सम्बन्धी कैपसूलदवा से कहीं ज्यादा लाभदायक अपनों का स्नेह होता है। -आर. के शर्मा

हमारा शरीर दरअसल हमारे विचारों का परिणाम है। हम चिकित्सा विज्ञान में यह समझना शुरु कर रहे हैं कि विचारों और भावनाओं की प्रकृति हमारी शारीरिक स्थिति, तंत्र व क्रियाओं को निर्धारित करती है।
-डाॅ. जाॅन हेजलिन

मान लीजिए आपको कोई बीमारी है। अब अगर आप उस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और लोगों से उसके बारे में बात कर रहे हैं,तो आप अधिक रोगी कोशिकाएँ उत्पन्न कर रहे हैं। पूर्णतः स्वस्थ शरीर की तस्वीर देखें। बीमारी का इलाज डाॅक्टर पर छोड़ दें। -बाॅब प्राॅक्टर
मैं मानती हूँ कि हर व्यक्ति, जिनमें मैं भी शामिल हूँ, अपने जीवन में हर अच्छी या बुरी चीज के लिए स्वयं जिम्मेदार है। -लुइस एल. हे

ईश्वर ठीक करता है और डाॅक्टर फीस लेता है। -बेन्जामिन फ्रेंकलिन

डाॅक्टरों की मृत्यु की भविष्यवाणी को मानव आत्मा की दृढ़ इच्छा शक्ति ने झूठला दिया है।
-आर एम लाला

कैंसर दुस्साध्य है असाध्य नहीं है।

मृत्यु की महामारी मंे खड़ा जीवन।

आत्मबोध ही सबसे बड़ा स्वास्थ्य।

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निरोग होने में मददगार स्वास्थ्य सम्बन्धी कहावतें

आरोग्यधाम (एस. व्यासा) बैंगलोर ,असाध्य रोगों की सर्वांगीण चिकित्सा हेतु श्रेष्ठ जगह

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प्रेरक स्वास्थ्य सम्बन्धी अनमोल वचन (कैपसूल)

  • हमारे आहार एवं विचार का दपर्ण है-हमारा शरीर।                                    -महर्षिं चरक
  • रोगी होकर औषध-सेवन करने मंे जितनी जागरुकता दिखाते है, यदि आप उसका दशांश भी स्वस्थ रहने के प्रति जागरूक बन जाए तो यह निश्चित है कि रोग से पीडि़त न होना पड़ेगा।                                                 -आचार्य बालकृष्ण
  • बिना मन को आरोग्य किए शरीर को अच्छा करने का प्रयत्न करते हैं, जबकि मन और शरीर एक ही हैं। इसीलिए उनकी पृथक्-पृथक् चिकित्सा नहीं होनी चाहिए।                                                                        -प्लेटो
  • कैंसर जैसा प्राणघातक रोग भी ’बाहरी हमला न होकर आन्तरिक विघटन की स्थिति हैं’।  
  •                                                                                                                                                   -कार्ल सिमन्टन
  • कभी दूसरों से मत कहो कि तुम बीमार हो, न कभी बीमार ही बनो। बीमारी एक ऐसी वस्तु है ,जिसे पनपते ही रोकने का प्रयास करना चाहिए। – बुलवर लिटन बीमार होने पर भी बीमारी के अस्तित्व में विश्वास मत करो। इस प्रकार स्वागत न पाकर बीमारी रूपी अतिथि भाग जायेगा।                                                                                                     -योगी कथामृत
  • आप अणुओं और परमाणुओं की प्रवाहमान नदी हैं, जिन्हें ब्रह्यांड के प्रत्येक कोने से एकत्रित किया गया है। आप ऊर्जा के ऐसे भंडार हैं जिसकी लहरें एकीकृत क्षेत्र के कोनों तक विस्तृत होती है। आप बुद्धि के ऐसे भंडार हैं जो कभी रिक्त नहीं होगा, क्योंकि प्रकृति कभी रिक्त नहीं होगी।                                                                                                                                   –   दीपक चोपड़ा             
  • यदि मनुष्य चाहे तो अपनी चिकित्सा स्वयं कर सकता है और बहुत जल्दी सफल भी हो सकता है।      -शेक्सपीयर 
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लक्ष्य एवं सफलता पर विवेकानन्द के प्रेरक अनमोल वचन

  • लक्ष्य को ही अपना जीवन-कार्य समझो। हर समय उसका चिन्तन करो, उसी का स्वप्न देखो और उसी के सहारे जीवित रहो।
  • अपने सामने एक ही साध्य रखना चाहिए। उस साध्य के सिद्ध होने तक दूसरी किसी बात की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। रात-दिन, सपने तक में-उसी की धुन रहे, तभी सफलता मिलती है।
  • भय से ही दुःख आते हैं, भय से ही मृत्यु होती है और भय से ही बुराइयां उत्पन्न होती हैं।
  • इस जीवन संसार में भूलों का गर्द-गुबार उठेगा ही। जो इतने नाजुक हैं कि इस गर्द-गुबार को सहन नहीं कर सकते, वे पंक्ति के बाहर निकलकर खड़े हो जाएं।
  • अशुभ की जड़ इस भ्रम में है कि हम देहमात्र हैं। यदि कोई मूलभूत या आदि पाप है तो वह यही है।
  • मन लाड़ले बच्चे के समान हेै। जेेैसे लाड़ला बच्चा सदैव अतृप्त रहता है, उसी तरह हमारा मन भी अतृप्त रहता है। अतएव मन का लाड़ कम करके उसे दबाकर रखना चाहिए।
  • न तो कष्टों का निमन्त्रण दो और न उसमें भागो। जो आता है, उसे झेलो। किसी चीज से प्रभावित न होना ही मुक्ति है।
  • विचार ही हमारे मुख्य प्रेरणा स्रोत होते हैं। मस्तिष्क को उच्चतम विचारों से भर दो। प्रतिदिन उनका श्रवण करो, प्रति मास उनका चिन्तन करो।
  • विश्व मंे केवल एक आत्मतत्त्व है, सब-कुछ उसी की अभिव्यक्तियां हैं।
  • जिसे स्वयं पर विश्वास नहीं, उसे ईश्वर मंे विश्वास नहीं हो सकता
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विवेकानन्द के प्रेरक अनमोल वचन

  • अन्तःकरण की परिपूर्णता में से ही वाणी मुखरित होती है और अन्तःकरण की परिपूर्णता के पश्चात् ही हाथ भी काम करते है।
  • बिना अनुभव के कोर शाब्दिक ज्ञान अच्छा है।
  • पवित्र और दृढ़ अभिलाषा सर्वशक्तिमान है।
  • यदि तुम्हारा अहंकार चला गया है तो किसी भी धर्म की पुस्तक की एक पंक्ति भी पढ़े बिना व किसी भी देवालय में पैर रखे बिना, तुम जहाँ बैठे हो, वहीं मोक्ष प्राप्त हो जाएगा।
  • अग्नि मंे घी की आहुति देने की अपेक्षा अपने अहंकार की आहुति दो।
  • मनुष्य ही परमात्मा का सर्वोच्च साक्षात् मन्दिर है; इसलिए साकार देवता की पूजा करो।
  • भय ही पतन और पाप का निश्चित कारण है।
  • हमारा उद्देश्य संसार में भलाई करना होना चाहिए, अपने गुणों की प्रशंसा करना नहीं।
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खलील जिब्रान के प्रेरक अनमोल वचन

  • अव्यक्त से व्यक्त की रचना, कला का ही कार्य है।
  • कितना अंधा है वह व्यक्ति, जो धन से दूसरों का प्रेम खरीदना चाहता है।
  • जो प्रेम अपने को नित्य नवीन नहीं रखता, वह पहले आदत का रूप धारण कर लेता है, और फिर दासता में परिवर्तित हो जाता है।
  • प्रेम और संदेह दोनों एक साथ एक ह्नदय में नहीं रह सकते।
  • खूबसूरती चेहरे पर नहीं दिल में होती है।
  • जो मनुष्य नारी को क्षमा कर सकता, उसे उसके महान् गुणों का उपयोग करने का कभी अवसर प्राप्त न होगा।
  • मित्रता अवसरवादिता नहीं है, वह तो सदा एक मधुर उत्तरदायित्व है।
  • अपराध या तो आवश्यकता का दूसरा नाम है या वह बीमारी का एक पक्ष।
  • कोई अभिलाषा यहां अपूर्ण नहीं रहती।
  • सिर्फ गूंगे ही बातूनों से ईष्र्या करते हैं।
  • कविता वह मनीषा है, तो ह्नदय का आह्नादित कर देती है।
  • जब जिन्दगी को अपने गीत सुनाने के लिए गायक नहीं मिलता, उसे वह अपने मन के विचार सुनाने के लिए, दार्शनिक पैदा कर देती है।
  • विचित्र बात है कि सुख की अभिलाषा मेरे दुख का एक अंश है।
  • अमीर और गरीब का फर्क कितना नग्ण्य है। एक ही दिन की भूख और एक ही घंटे की प्यास दोनों को समान बना देती है।
  • जब से मुझे पता चला है कि मखमल के गद्दे पर सोनेवालों के सपने नंगी जमीन पर सोनेवालों के सपने से मधुर नहीं होते, तब से मुझे न्याय (प्रभु के न्याय) मंे दृढ़ श्रद्धा हो गई है।
  • वस्तुतः महान पुरुष वही है जो न तो किसी का शासन मानता है ओैर न किसी पर शासन करता है।
  • इच्छाओं का संघर्ष यह प्रकट करता है कि जीवन व्यवस्थित होना चाहता है।

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हेलन केलर के प्रेरक अनमोल वचन

विवेकानन्द के प्रेरक अनमोल वचन

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जिसने मरना सीख लिया जीने का अधिकार उसी को

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हेलन केलर के प्रेरक अनमोल वचन

हेलेन केलर अन्धी व बहरी होकर बहुत सफल जीवन जीती है एक दर्जन से अधिक पुस्तके लिखी एवं सारी दुनिया में प्रेरक गुरू के रूप में जानी जाती रही । जिसे 3 वर्ष एक शब्द सीखने में लगते हैं। वह 2बार हवाई जहाज उडाती हैं एवं पूरे विश्व में मानवता पर वार्ता के लिए बुलाई जाती हैं।उनके प्रेरक वचन:

  • आत्म विश्वास–    मैं जिसे खोज रही हूँ वह बाहर नहीं, मेरे भीतर है।
  • महत्वाकांक्षा-जिसका आकाश में उड़ने का इरादा हो वह  रेंगने के लिए कभी सहमत नहीं होता है।

    Helen Keller
  • जीवन–  यदि जीवन में सिर्फ खुशियां ही होती तो हम बहादुरी और धैर्य को जीवन में कभी नहीं सीख पाते।
  • –  मैं जीवन की अमरता में विश्वास करती हूँ क्योंकि मेरी इच्छायें कभी समाप्त नहीं होती।
  • विश्वास -यकीन करें, कभी कोई भी निराशावादी तारों को नहीं खोज पाता, न ही कोई अनखोजी   जगहों पर जा पाता और न ही कोई मानव नया स्वर्ग खोज पाता।
  • – ज्ञान , प्रेम, प्रकाश एवं लक्ष्य/सपना है।
  • प्रेम–  जीवन में सबसे सुन्दर व सर्वोंत्तम चीजें जो है वो दिखती नहीं है, न ही उन्हें छुआ जा सकता है। उसे सिर्फ ह्नदय में महसूस करना पड़ता है।
  • –  यह आश्चर्य है कि लोग बहुत सारा अच्छा समय दुर्जनों से लड़ने में बीता देते है। यदि ये लोग इसी समय और ऊर्जा को अपनो से प्रेम करने में लगाए तो दुर्जनों का अन्त स्वतः हो जायेगा।
  • प्रसन्न्ता–   जब आप प्रसन्न नहीं हो तो भी जीवन में करने के लिए बहुत कुछ है। जब तक आप दूसरों का दर्द कम कर सकते हो तब तक जीवन बेकार नहीं है।
  • -यद्यपि संसार दुःखों से भरा हुआ है लेकिन उसको जीतने के उपाय भी बहुत है।
  •    जीवन में सबसे दुर्भाग्यशाली वह है जिसके पास आँखें तो है लेकिन दृष्टिकोण  (वीजन) नहीं  है।
  • ऐकता – अकेले हम थोड़ा कर सकते है लेकिन मिल कर बहुत कुछ कर सकते है।

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मैंरे आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत :डाॅ. स्टीफन हाॅकिंगमेरी आदर्श प्रेरणापुंज

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आत्म-विश्वास, सफलता और विवेकानन्द

आत्म-विश्वास, सफलता और विवेकानन्द के अनमोल वचन

  • जिसमें आत्म-विश्वास नहीं है, उसमें अन्य चीजों के प्रति विश्वास कैसे उत्पन्न हो सकता है?
  • कमजोरी का इलाज कमजोरी की चिन्ता करना नहीं, बल्कि शक्ति का विचार करना है। कमजोरी कभी न हटने वाला बोझ और यंत्रणा है, कमजोरी ही मृत्यु है।
  • पुराने धर्म ने उसे नास्तिक कहते थे जो ईश्वर मंे विश्वास नहीं करता था, किन्तु नया धर्म उसे नास्तिक कहता है, जिसे स्वयं पर विश्वास नहीं है।
  • मन की दुर्बलता से अधिक भंयकर पाप और कोई नहीं है।
  • मृत अतीत को दफना दो। अनन्त भविष्य तुम्हारे  सामने है ओैर स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कृति तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है।
  • कोई भी कार्य करना कठिन नहीं होता, सिर्फ उसे साधने के लिए कठोर परिश्रम की आवश्यकता होती है। मेहनत द्वारा किसी भी कार्य मंे  सफलता पाई जा सकती है।
  • गीता का पाठ करने की अपेक्षा व्यायाम करने से तुम स्वर्ग के अधिक समीप पहुँच सकोगे।यह संसार एक व्यायामशाला है जहाँ हम अपने-आपको बलवान बनाने के लिए आते हैं।