Art of Living · Bloging · Life-Management · Self-Healing · Stress Management · success · Uncategorized

थायराइड की गोली निरन्तर लेने से उसके घातक साइड इफेक्ट

एलोपैथि में थाइरोइड ग्रंथी ठीक  नहीं की जाती है बल्कि इस रोग को  मैनेज किया जाता हैl रोग के साथ जीना सिखाया  जाता हैl स्वयं थायराइड ग्रंथी नियमित तैयार हार्मोन मिलते रहने से निष्क्रिय हो जाती हैl

थायराइड ग्रंथी एक महत्पूर्ण यदि उचित मात्रा में गोली न ले तो थकान,सरदर्द ,चिडचिडाहट ,पसीना आना ,धडकनों में अनियमितता, अनिंद्रा आदि हो सकते  हैl  अथार्त अपने डॉक्टर  से डोस  समय समय पर तय करा लेंl

थायराइड की गोली उचित मात्रा में  नियमित लेने से  भी कैल्शियम की कमी हो जाती है,फलस्वरूप धीरे धीरे हड्डीया कमजोर होने से ओस्टीपोरोसिस हो जाता हैl  इससे बदन में दर्द रहने लगता हैl कैल्शियम की कमी आगे चल कर गुर्दो को भी ख़राब करने लगती हैl  नियमित थाइरोइड की गोली लेते रहने से मूड  खराब होना, सरदर्द ,पसीना आना , धडकनों में अनियमितता, दस्त लगना  व हाथों में कम्पन्न भी हो सकते हैंl  लम्बे समय तक गोली लेने पर ह्रदय, अग्नाशय व जिगर  खराब हो सकते हैl

 

Related Posts:

थायराइड एवं गले का संक्रमण भगाने उज्जायी प्राणायाम करें

रिलैक्स होने तनाव भगाने हेतु ध्यान करें ( योग निद्रा – गौरवा जी के निर्देशों की CD फ्री डाउनलोड )

लिखने में बाँधाए दूर कर सफल लेखक बने

Common Side Effects of Armour Thyroid (Thyroid tablets) Drug Center …

Advertisements
Art of Living · Articles · Life-Management · Meditation · Self-Healing · Spirituality · success

वजन घटाने हेतु सूर्य मुद्रा लगाएँ

जो लोग मोटापा और मधुमेह जैसी समस्याओ से ग्रसित है उनके लिए यह योग मुद्रा बेहद ही फायदेमंद है|

विधि:-

  • सूर्य मुद्रा करने के लिए सबसे पहले तो सिद्धासन,पदमासन या सुखासन में बैठ जाएँ ।
  • अब दोनों हाँथ घुटनों पर रख लें और हथेलियाँ उपर की तरफ रहें|
  • अब सबसे पहले अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ में लगा लें एवं उपर से अंगूठे से दबा लें|
  • इस वक्त आपकी बाकी बची हुई तीनों उंगलियों को बिल्कुल सीधी रहने दे|

 

 

लाभ:-

  1. सूर्य मुद्रा को दिन में दो बार 15 मिनट करने से कोलेस्ट्राल घटता है|
  2. शरीर की सूजन दूर करने में भी यह मुद्रा लाभप्रद है|
  3. इसे करने से बलगम, खांसी, पुराना जुकाम, नजला, सांस का रोग, ज्यादा ठंड लगना तथा निमोनिया आदि रोग दूर हो जाते हैंl
  4. इसके नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव दूर होता है और भय, शोक खत्म हो जाते है|

5. इसे  नियमित करने से व्यक्ति में अंतर्ज्ञान जाग्रत होता है|

6 .इस मुद्रा के अभ्यास से पाचन प्रणाली ठीक होती है किन्तु यदि आपको एसिडिटी और अम्लपित्त की तकलीफ है तो यह मुद्रा ना करे|

 

सावधानियां:-

  • यदि आपका शरीर बहुत अधिक कमजोर है तो आपकोसूर्य मुद्रा नही करनी चाहिए|
  • सूर्य मुद्रा करने से शरीर में गर्मी बढ़ती है इसलिए गर्मियों में इस मुद्रा करने से पहले एक गिलास पानी पी लेना चाहिए।

Related posts:

असाध्य रोगों का सामना कैसे करेंः उक्त पुस्तिका फ़्री डाउनलोड करें

रोग दूर करने शरीर की आन्तरिक फार्मेसी को जगाएँ

जीवन एक रहस्य हैः इन्द्रियों द्वारा उसे नहीं जान सकते

Surya Mudra for weight loss, सूर्य मुद्रा | तेज़ी से घटाना 

 

Art of Living · Articles · Life-Management · Personality · Self-Healing · Spirituality · Uncategorized

थायराइड एवं गले का संक्रमण भगाने उज्जायी प्राणायाम करें

संस्कृत में उज्जायी का अर्थ है विजयी-‘उज्जी’ अर्थात जीतना। उज्जायी प्राणायाम
विधि:
इसके लिए कमर को सीधा रखते हुए आराम से बैठ जाएंए अब अपने ध्यान को सांसों पर ले आएं और सांस की गति पर ध्यान लाते हुएए अधिक से अधिक सांस बाहर निकाल दें। अब गले की मांशपेशियों को टाइट कर लें और धीरे.धीरे नाक से सांस भरना शुरू करेंए सांस भरते समय गले से सांस के घर्षण की आवाज़ करें।
सांस भरते जाएंए आवाज़ होती जाए। इस प्रकार आवाज़ के साथ पूरा सांस भर लें। अब सांस भरने के बाद कुछ सेकेण्ड सांस अंदर रोकें।इस समय जालंधर बंध लगाएस इसके बाद सीधे हाथ की प्राणायाम मुद्रा बनाकर नासिका पर ले जाएं और दाईं नासारंध्र को बंद कर बाईं नासारंध्र से धीरे.धीरे सांस बाहर निकाल दें। इस प्रकार 12.15 बार इसका अभ्यास कर लें।
लाभ:
शारीरिकः प्राणायाम के सभी सामान्य लाभों के अतिरिक्त यह कंठ से कफ दोष को मिटाता है और जठरा ग्नि को उद्यीप्त करता है। इससे नाड़ी और धातुदोष भी दूर होते है। यह कंठच्छद की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे खर्राटों की समस्या दूर हो जाती है। आवाज भी साफ और शुद्ध हो जाती है।
चिकित्सीयः उज्जायी प्राणायाम से गलतुण्डिका, गला खराब, पुरानी सर्दी और श्वसनी दमा को बहुत आराम मिलता है। इससे अतिसंवेदनशील गला, खांसी एवं हिचकी आदि में भी मदद मिलती है। चिन्तित रहने वाले रोगी यदि इस प्राणायाम को करें तो उनका चिंता-स्तर कम होता चला जायेगा।
आध्यात्मिकः कंठ विशुद्धि चक्र का स्थान है। इस जगह ध्यान का केन्द्रीकरण और जागरूकता आध्यात्मिक विकास का आरम्भ है।
उज्जायी एक आधारभूत प्राणायाम है और अन्य अनेक प्राणायामों के साथ इसका उपयोग किया जा सकता है।

Related posts:

Ujjai Pranayam – Detailed Explanation by Swami Ramdev

बीमारी का नहीं, बीमार का इलाज होना चाहिए

थकान मिटाने हेतु हर्बल ऊर्जा पेय घर पर बनाएं

 

Articles · Life-Management · Meditation · Self-Healing

योग-प्राणायाम द्वारा रोग मुक्त हो

योग विज्ञान सम्पूर्ण जीवन कला सीखाता है । इसलिए दुःखों से सदा सदा के लिए मुक्त करने में सक्षम है । यह मात्र सिद्धान्त नहीं है । इसीलिए योग बड़ा महत्वपूर्ण है।
योग शरीर के जोड़ों की जड़ता को तोड़ते है। इनमें जमे विषाक्त द्रव्यों को निकालते है। जोड़ो को घुमाने से स्फूर्ति पैदा होती है व जोड़ बेहतर तरीकेे काम करने लगते है। शरीर के सभी संधियों व घूमावों की जड़ता को तोड़ते है। जोड़ों में लोच बढ़ाते है। मांसपेशियों के खींचाव को कम कर उन्हें नरम करते है। सूक्ष्म व्यायाम से जोड़ो को बल मिलता है। शरीर में व्याप्त अकड़न-जकड़न कम होती है। तन में व्याप्त जड़ता मिटती है। शरीर हल्का होता है व जोश बढ़ता है। इस तरह के संचालन से अंग स्वस्थ होते है। अन्दरुनी अवयवों को सूक्ष्मता से संतुलित करते है, इसतरह इनसे रोग ठीक हो जाते हैै।
नियमित प्राणायाम करने का परिणाम मानसिक स्थिति पर होता है और इससे हमारा नाडीसंस्थान भी प्रभावित होता है जिसके फलस्वरूप श्वसन भी बदल जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि हमने हमारे श्वसन क्रिया को योग्य तरीके से बदल दिया और नियमित पालन किया तो हम अपनी भावनाओं पर एवं मन पर निश्चित रूप से नियंत्रण कर सकेगें। इस तरह रोगमुक्त रह सकते हैl

Related Posts:

जब कठिन आसन व प्राणायाम न कर सको तो सूक्ष्म व्यायाम करें

गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन का परिचय

जवारे का रसः बीमारी में अमृत एवं प्राकृतिक प्रतिरोधक शक्ति जगाने हेतु

रोग मुक्त होने व विष मुक्त होने:ऑयल पुलिंग

Uncategorized

रोगमुक्त होने अपने भीतरी डॉक्टर को जगाएं

हम सब के भीतर चिकित्सा करने की शक्ति मोजूद  हैंl रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर का वह भीतरी डॉक्टर है जो कई बीमारियों से चुपचाप लड़कर उन्हें हरा देता है।

इस शक्ति को जगाने के निम्न तरीके है:

power of inner healing

1 पोषक आहार द्वारा

संतुलित भोजन के साथ निम्न पोषक आहार भी ले l

इम्यूनिटी के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

विटमिन डी
आधा घंटा  प्रकाश में बैठे ,विटमिन डी से कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है।5/7स्ट्रॉङ्ग इम्यूनिटी के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

लहसुन
कच्चा लहसुन खाना भी फायदेमंद रहेगा। इसमें एलिसिन, जिंक, सल्फर, सेलेनियम और विटमिन ए व ई पाए जाते हैं, जो इम्यून पावर बढ़ाने में मददगार हैं।Helनिटी के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

खट्टे फल
विटमिन सी के सेवन से संक्रामक बीमारियों के होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। नींबू और आंवला इसके सबसे अच्छे स्त्रोत हैं।7/7स्ट्रॉङ्ग इम्यूनिटी के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

दही
दही के सेवन से भी इम्यून पावर बढ़ती है। इसके साथ ही यह पाचन तंत्र को भी बेहतर रखने में मददगार है।

ग्रीन टी 
ये इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद होती है लेकिन इनका सेवन संतुलित होना चाहिए। चाय या कॉफी की ज्यादा मात्रा सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है।4/7स्ट्रॉङ्ग

2 योग-प्राणायाम द्वारा

(to be continued……………..) Related Posts:

प्राणिक हीलिंग क्या है व इससे उपचार कैसे होता है ?

प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने व स्वस्थ रहने हेतु विटामिन डी अति आवश्यक है

स्वस्थ रहने हेतु जम कर ताली बजाए

नाम को सार्थक करती डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?”

Art of Living · Articles · Life-Management · Personality · Self-Healing · Stress Management · success · Uncategorized

स्वस्थ रहने के 12 सूत्र: जीवन शैली बदल कर रोग मुक्त रहें

हम सपरिवार रोग मुक्त रहें इस हेतु कार्य योजना

 

हमें अपनी जीवन शैली इस तरह की बनानी हैं क़ि हम बीमार ही न हो

Art of Living · Articles · Life-Management · Self-Healing · Stress Management

रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने हेतु नियमित गिलोय का सेवन करें

 

गिलोय को आयुर्वेद में अमृता भी कहा जाता है क्योंकि यह त्रिदोष नाशक हैl नीम पर चढी हुई गिलोय उसी का गुण अवशोषित कर लेती है ,इस कारण आयुर्वेद में वही गिलोय श्रेष्ठ मानी गई है जिसकी बेल नीम पर चढी हुई हो ।

कैंसर की बीमारी में 6 से 8 इंच की इसकी डंडी लें इसमें wheat grass का जूस और 5-7 पत्ते तुलसी के और 4-5 पत्ते नीम के डालकर सबको कूटकर काढ़ा बना लें।

मधुमेह ,बुखार व  वात व्याधि में यह बहुत गुणकारी हैl

गिलोय में एंटी ओक्सिडेंट गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते है | गिलोय के सेवन से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है , जिससे व्यक्ति जल्दी बीमार नहीं होता एवं लम्बे समय तक स्वस्थ रहता है | गिलोय के रस का नियमित सेवन करने से शरीर के गुर्दे और जिगर स्वस्थ रहता है | शरीर में मूत्र सम्बन्धी विकारो में भी गिलोय अच्छा परिणाम देती है  | नियमित सेवन करने से शरीर बीमारियों से बच सकता है |

 

सम्बन्धीत पोस्ट्स:

गिलोय रामबाण इलाज है

गिलोय की पहचान, गिलोय के फायदे और नुकसान

स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचाव हेतु आयुर्वेदिक पोटली को सूंघे एवं प्राणायाम करे

जोर से हंसीए , तनाव स्वत भाग जायेंगे