मुद्राओं का महत्त्व आसन व प्राणायाम से अधिक: भिन्न भिन्न मुद्राए कर भगाए रोग

योग में मुद्राओं का महत्त्व आसन व प्राणायाम से अधिक हैl इसे करने से ना केवल शारारिक बल्कि मानसिक लाभ भी मिलते है| इन मुद्राओ का नियमित अभ्यास करने से शरीर, मन और  आत्मा   संतुलित व शुद्ध होते  है|योग में मुद्राओं को आसन और प्राणायाम से भी बढ़कर माना जाता है। आसन से शरीर की हडि्डयां लचीली और मजबूत होती है जबकि मुद्राओं से शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास होता है।  ये शरीर में चैतन्य को अभिव्यक्ति देने वाली कुंजिया हैl

दरहसल हमारा शरीर इन पञ्च तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना हुआ हैं। जब भी शरीर में इन तत्वों का असंतुलन होता है तो शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न हो जाते है| हस्त मुद्राओ द्वारा हम इन पांच तत्वों को नियंत्रण में रख सकते हैं। हाथों की सारी अंगुलियों में पांचों तत्व मौजूद होते हैं जैसे अंगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी अंगुली में वायु तत्व, मध्यमा अंगुली में आकाश तत्व, अनामिका अंगुली में पृथ्वी तत्व और कनिष्का अंगुली में जल तत्व।अथार्त
अंगुलियों के पांचों वर्ग से अलग-अलग विद्युत धारा बहती है। इसलिए मुद्रा विज्ञान में जब अंगुलियों का योगानुसार आपसी स्पर्श करते हैं, तब रुकी हुई या असंतुलित विद्युत बहकर शरीर की शक्ति को पुन: जाग देती है और हमारा शरीर निरोग होने लगता है। ये अद्भुत मुद्राएं करते ही यह अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं।

कुंडलिनी या ऊर्जा स्रोत को जाग्रत करने के लिए मुद्राओं का अभ्यास सहायक सिद्ध होता है। कुछ मुद्राओं के अभ्यास से आरोग्य और दीर्घायु प्राप्त ‍की जा सकती है। इससे योगानुसार अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति संभव है। यह संपूर्ण योग का सार स्वरूप है।

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योग का पूरा लाभ उठाने षट्कर्म अति आवश्यक

षट्कर्म अथार्थ छ: कर्म जिनसे शरीर व मन की सफ़ाई की जाती हैlशारीरिक एवं मानसिक शुद्धीकरण के बिना योगाभ्यास से पूरा लाभ नहीं मिलता हैl शुद्धिकरण योग शरीर, मस्तिष्क एवं चेतना पर पूर्ण नियंत्रण का भास देता हैl वात,पित्त एवं कफ का संतुलन  होता हैlयोग के अनुसार निम्न छ: कर्म है:-
1 नेति
2 धौति
3 बस्ती
4 नौली
५ कपालभाति
6 त्राटक

 

 

1 नियमित रूप से नेति क्रिया करने पर कान, नासिका एवं कंठ क्षेत्र से गंदगी निकालने की प्रणाली ठीक से काम करती है तथा यह सर्दी एवं कफ, एलर्जिक राइनिटिस, ज्वर, टॉन्सिलाइटिस आदि दूर करने में सहायक होती है। इससे अवसाद, माइग्रेन, मिर्गी एवं उन्माद में यह लाभदायक होती है।

2 धौति क्रिया  में भोजन संसथान की सफाई की जाती हैl शंख प्रक्षालन में गुनगुना जल पीकर बाहर निकाला जाता हैl

3 बस्ती एक तरह का सहज एनिमा लगाने की तरह हैl इसमें गुदा द्वार से पानी को खिंच कर मल द्वार  को साफ किया जाता हैl

नौली क्रिया उदर की पेशियों, तंत्रिकाओं, आंतों, प्रजनन, उत्सर्जन एवं मूत्र संबंधी अंगों को ठीक करती है। अपच, अम्लता, वायु विकार, अवसाद एवं भावनात्मक समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति के लिए लाभदायक है।

5कपालभाति बीमारियों से दूर रखने के लिए रामबाण माना जाता है।  यह बलगम, पित्त एवं जल जनित रोगों को नष्ट करती है। यह सिर का शोधन करती है और फेफड़ों एवं कोशिकाओं से सामान्य श्वसन क्रिया की तुलना में अधिक कार्बन डाईऑक्साइड निकालती है। कहा जाता है कि कपालभाति प्रायः हर रोगों का इलाज है।

6 त्राटक नेत्रों की पेशियों, एकाग्रता तथा मेमोरी के लिए लाभप्रद होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव मस्तिष्क पर होता है।यह  मन को एकाग्र करता हैl हठ योग से राजयोग की तरफ ले जाने की क्रिया हैl

साधना में बाधा : पिंड में असंतुलन (Planetary Imbalances)

स्वस्थ शरीर साधना हेतु जरूरी हैlइसके अभाव में अंतर्यात्रा नहीं की जा सकती हैl  शरीर को स्वस्थ रखने हेतु सही विचारों का होना जरूरी हैl इस हेतु व्यक्तिमें नो दोषों का समाधान करना चाहिए l
1 वात दोष
2 पित्त दोष
3 कफ दोष
4 जोडों में दर्द
५ सरदर्द
6 दस्त
7 कब्ज
8 मूत्र  आने की आवृति में गडबड

9 स्नायविक असंतुलन

एक साधक को अपनी विचार प्रक्रीया को बदलते हुए उपरोक्त दोषों का समाधान आयुर्वेद, आहार  व योगिक  प्रक्रियाओ को अपना कर साधना करनी चाहिए l दोष अनुरूप समाधान  आगे  कभी बताया जायेगा l

अंतर्यात्रा शिविर के साधकों का फीडबैक

तपोवन में आदरणीय शशांक जी ने 7 से १३ मार्च 18 तक गहन योगिक साधना करवाई l शिविरार्थियो के अनुभव ज्यों के त्यों उद्धरत कर रहा हू:

 

 

 

शशांक भैया ने जो भी विधियाँ ध्यान की कराई जैसे निशा ध्यान, रात्रि ध्यान,ज्योति ध्यान, संकल्प साधना, मौन साधना,क्रिया योग  आदि लयबद्ध तरीके से  कराएl इनका अनुभव  शब्दों  में नहीं किया जा सकता है;उसे स्वयं को अनुभव करना चाहिए l

—– श्रेया गदिया, M Sc yoga

 

Pranam Bhai Sahab,

Reached kota and got checked with Jim on B C A machine. As expected results are amazing. My metabolic age reduced by 2 years in these 7 days. And the body has shown amazing progress in all parameters.
Regards

—–Ajay Dutta, Kota

तन , मन ,  बुद्धि,एवं  भावनात्मक तल पर आंतरिक खिलावट का शानदार प्रोग्राम डिज़ाइन किया हुआ हैl  योग ,प्राणायाम, ध्यान के सम्बन्ध में कई मान्यताओ  एवं धारणाओं को नूतन परिभाषा देता अमूल्य प्रोग्राम l

—–प्रकाश चंद्र,टोंक

गुरूजी का अनुशाशन ,सिखाने व समझाने की शैली अति उत्तम व व्यावहारिक हैl मुद्राओं के साथ प्राणायाम व ध्यान करने से चक्र शुद्धी व कुण्डलिनि पर बहुत काम हुआ l

—– महेंद्रसिंह चौहान ,उदयपुर

संकल्प साधना बहुत  ही प्रभावकारी रही जो साधना पथ पर आगे बढ़ने में सहायक होगीl

—— अमित ,फतहपुर

आपने सम्पूर्ण विषय को बहुत बारीकी से समझाया व साधना करवाई l

—— भंवर लाल ,जयपुर

योग को व्यायाम समझ कर  10 वर्ष   से करती थी l यहाँ पर इसके प्रति गहन रूचि जगी व मन से साधना करने का मज़ा आया व जीवन जीने की कला  मिली l

—– मीना जैन ,उदयपुर

 

 

 

 

 

प्रात: शहद व लहसुन ले कर मोटापा, कोलेस्ट्रोल घटाएं व रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाए

शहद और लहसुन दोनों ही ऐसी चीजें हैं जिनका इस्तेमाल करने से हमारे शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। एक तरफ जहां लहसुन में एलिसिन और फाइबर शामिल होता है जोकि हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है।

  1. शहदऔरलहसुनकोमिलाकरइसकासेवनकरनेसेहमारेशरीरमेंमौजूदअतिरिक्तचर्बीकमहोजातीहै। इसीकेसाथमोटापेसेभीआपकोछुटकारामिलताहै।
  2. लहसुन और शहद इम्यूनिटी बढ़ाए -लहसुन और शहद के मेल से इस घोल की शक्ति बढ जाती है और फिर यह इम्यून सिस्टम को मजबूत कर देता है. इम्यून सिस्टम मजबूत होने से शरीर मौसम की मार से बचा रहता है और उसे कोई बीमारी नहीं होती.
  3.  लहसुन और शहद दिल की सुरक्षा करे -इस मिश्रण को खाने से हृदय तक जाने वाली धमनियों में जमा वसा निकल जाता है, जिससे खून का प्रवाह ठीक प्रकार से हृदय तक पहुंच पाता है। इससे हृदय की सुरक्षा होती है।
  1.  लहसुन और शहद फंगल इंफेक्‍शन से बचाए-फंगल इंफेक्‍शन, शरीर के कई भागों पर हमला करते हैं, लेकिन एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरा यह मिश्रण बैक्‍टीरिया को खतम कर के शरीर को बचाता है।इससे जुकाम व गले की खराश ठीक हो जाते है
  1.  लहसुन और शहद डीटॉक्‍स करे-यह एक प्राकृतिक डीटॉक्‍स मिश्रण है, जिसे खाने से शरीर से गंदगी और दूषित पदार्थ बाहर निकलता है।