नकारात्मक भावनाएं निकाले एवं स्वस्थ हो

भावनाओं की जीवन में भूमिका


हमे सकारात्मक भाव दशा में सुख मिलता है । दुःख निराशा, चिन्ता नकारात्मक भाव दशाएं है । खुशी, प्रसन्नता, आनन्द, मस्ती घनात्मक दशाएं है । NEGATIVE EMOTIONSअपनी नकारात्मक भावनाओं को मिटाना। क्रोध, ईष्र्या, वैर, बदला, दिखा दूंगा से बचना है । क्षमा, प्रेम, संतोष, शान्ति के भाव रखने है । अपने भाव जगत को बदलना है । अपने परिणाम बदलने है ।
भाव बदलने अन्र्तयात्रा जरूरी है । इसके लिए स्वयं के भीतन झांकना पड़ता है । अपनी दुखःद भावों का रेचन जरूरी है । मन के भावों का पता कर उन पर क्षमा का मरहम लगाना है । क्रोध के भाव, बदले के भाव क्षमा से धोएं । हीनता के भाव समता से बदलें । अपने रोग के, दुःखों के प्रति सहज बने । उन्हे स्वीकारें । वे जैसे है वैसे अपने पैदा किए हैं । हमारी वर्तमान दशा सिर्फ अपने कारण से है । इस स्वीकार भाव से ही हमारे भाव बदलने शुरू होते हैं। फील गुड करते रहंे ।
रोग का जन्म ही नकारात्मक भावनाओं में है । जब हम अपना स्वभाव भूल विभाव में जीते हैं तब रोग पैदा होते हैं । विकृत भाव व चिन्तन रोग के माता-पिता है ।
हम भावनाओं में जीते है । उन्हे बदल कर ही हम सुखी हो सकते है । अपनी भाव दशा के प्रति सचेत बनो । अपनी भाव-दशा के प्रति तटस्थ रहो व उसे जानो, देखो ।
प्रेम, आभार, अपनत्व से हमारे शरीर की कोशिकाएं शिथिल व शान्त होती है । हमारे डीएनए की एंठन कम होती है । गुस्सा, ईष्र्या, वैर, बदले के भाव हमारे डीएनए की डबल हैलिक्स को और कठोर बनाते है । जिससे तनाव बढ़ता है । शरीर की प्रतिरोध क्षमता कम होती है ।

Related Posts:

भावनाओं का महत्व:आई क्यू से बढ़कर ई क्यू होता है

भाव एवं विचार ही हमारे निर्माता हैःराॅन्डा बर्न की ‘‘द सीक्रेट’’ का सार

प्यार का प्रतिउत्तर व आन्नद कैसे पाएँ?

सुखी होने अन्तर्यात्रा करें व अन्तर्मन की सुनंे

भावनात्मक असंतुलन के संकेत पहचाने एवं EQ (भावनात्मक संतुलन)बढ़ाए

Advertisements

8 विचार “नकारात्मक भावनाएं निकाले एवं स्वस्थ हो&rdquo पर;

  1. पिंगबैक: सुख का अर्थशास्त्र – हेलेना नोरबर्ग होज की नजर में स्थानीयकरण | उठो! जागो!

  2. पिंगबैक: बीमारी क्या कहती है? | उठो! जागो!

  3. पिंगबैक: यदि द्रोण जैसा गुरु उपलब्ध हो तो हम अर्जुन बनना चाहेंगे या एकलव्य? – स्वास्थ्य -सेतु

  4. पिंगबैक: डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक नाम को सार्थक करती “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?” – स्वास्

  5. पिंगबैक: नाम को सार्थक करती डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?” – स्वास्

  6. पिंगबैक: नाम को सार्थक करती डाक्टर बिस्वरूप रॉय चौधरी की पुस्तक “हॉस्पिटल से जिंदा कैसे लोंटे?” – स्वास्

  7. पिंगबैक: हार्ट अटैक आने पर उससे बचने अपान वायु मुद्रा लगाएँ – स्वास्थ्य -सेतु

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s